कोरोना वैक्सीन: अमेरिका के सहयोग से भारत और दूसरे जरूरतमंद देशों को कैसे मिलेगी मदद?

राष्ट्रपति जो बिडेन ने बुधवार को ऐलान किया है कि अमेरिका अपने ढाई करोड़ वैक्सीन का 75 फीसदी हिस्सा संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन शेयरिंग प्रोग्राम को देगा

राष्ट्रपति जो बिडेन ने बुधवार को ऐलान किया है कि अमेरिका अपने ढाई करोड़ वैक्सीन का 75 फीसदी हिस्सा संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन शेयरिंग प्रोग्राम को देगा

Covid-19: अमेरिका ने वैक्सीन दूसरों के साथ साझा करने का तब ऐलान किया है जब उनके यहां कोरोना के केस तेज़ी से घटने लगे. अमेरिका में 63 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग गई है.

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नई दिल्ली. इन दिनों दुनियाभर में कोरोना की वैक्सीन (Covid-19) की किल्लत है. ऐसे में अमेरिका ने कहा है कि वो अपने यहां की वैक्सीन दूसरे देशों के साथ साझा करेंगे. अमेरिका का ये ऐलान से भारत जैसे विकासशील और दूसरे गरीब देशों राहत भरी खबर है. बता दें कि वैक्सीन लॉन्च करने के करीब छह महीने बाद अमेरिका ने ये ऐलान किया है. जल्द ही भारत को फाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन मिलने वाली है. खास बात ये है कि फाइजर की वैक्सीन 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को भी लगाई जा सकती है.

राष्ट्रपति जो बिडेन ने बुधवार को ऐलान किया है कि अमेरिका अपने ढाई करोड़ वैक्सीन का 75 फीसदी हिस्सा संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन शेयरिंग प्रोग्राम को देगा. इसके अलावा अमेरिका की तरफ से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ-साथ अफ्रीका के देशों को भी वैक्सीन दी जाएगी. संयुक्त राष्ट्र के कोवैक्स प्रोग्राम के जरिए गरीब देशों को वैक्सीन की मदद दी जाती है. इसके तहत 92 एडवांस मार्केट कमिटमेंट (एएमसी) देशों में लगभग 20 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण करने की जाती है, जिसमें मध्यम और निम्न-आय वाले देश शामिल हैं जो कोविड -19 टीकों का भुगतान नहीं कर सकते. इसका मतलब है कि जिन देशों की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 4000 अमेरिकी डॉलर से कम है और कुछ अन्य देश जो विश्व बैंक अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) के तहत आते हैं.

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बता दें कि अपने घर में महामारी से लड़ने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने खुद के वैक्सीन निर्माताओं को शॉट्स बनाने के लिए आवश्यक अमेरिकी-निर्मित सामग्रियों की प्राथमिकता दी थी. व्हाइट हाउस ने यह भी घोषणा की कि वह एस्ट्राजेनेका, साथ ही सनोफी और नोवावैक्स द्वारा उत्पादित टीकों को साझा करने पर प्रतिबंध हटा रहा है, जो वहां अधिकृत नहीं हैं.


अमेरिका ने वैक्सीन दूसरों के साथ साझा करने का तब ऐलान किया है जब उनके यहां कोरोना के केस तेज़ी से घटने लगे. अमेरिका में 63 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग गई है. अमेरिका से कई देशों में वैक्सीन की मांग की है. लेकिन अब तक सिर्फ कनाडा और मेक्सिको को कुलमिलाकर 4.5 मिलियन वैक्सीन की डोज़ मिली है. एशिया को लगभग सात मिलियन खुराक मिल सकती है. इस रेस में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मालदीव, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, लाओस, पापुआ न्यू गिनी, ताइवान और प्रशांत द्वीप समूह,जैसे देश शामिल है.

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