COVID-19: कोरोना की तीसरी लहर को कैसे कंट्रोल कर सकती है सरकार? विशेषज्ञ ने बताए 7 उपाय

अभी भारत में कोविशिल्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-v की खुराक दी जा रही है. जबकि फाइजर और मॉर्डना के जल्द भारत में आने की उम्मीद है.

सरकार अभी से कोरोना की तीसरी लहर (Third Wave of Covid-19) से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है. इस बीच मशहूर कार्डियक सर्जन डॉ. देवी शेट्टी ने देश में कोरोना से तीसरी लहर से बचाव के लिए सात कदम बताए हैं:-

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave of Covid-19) के उफान के बाद अब इसमें कमी देखी जा रही है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दो-तीन महीनों बाद देश कोरोना की तीसरी लहर से संक्रमित हो सकता है. देश की 35 फीसदी जनता कोरोना की तीसरी लहर की जद में आ सकती है. इसके साथ यह भी माना जा रहा है कि तीसरी लहर का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और किशोर हो सकते हैं.

    ऐसे में सरकार अभी से तीसरी लहर से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है. इस बीच मशहूर कार्डियक सर्जन डॉ. देवी शेट्टी ने देश में कोरोना से तीसरी लहर से बचाव के लिए सात कदम बताए हैं:-
    केंद्र सरकार को जल्द से जल्द उचित कीमत पर भारतीय और विदेशी टीकों की खरीद करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीनेट किया जा सके. अभी भारत में कोविशिल्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक-v की खुराक दी जा रही है. जबकि फाइजर और मॉर्डना के जल्द भारत में आने की उम्मीद है. भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक और भारतीय कंपनी द्वारा निर्मित एक टीका अब अधिकांश अमेरिकी टीकों की तुलना में अधिक महंगा है.
    केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने पारदर्शी तरीके से फ्रंटलाइन वर्कर्स के बीच टीकों की खरीद और वितरण का उत्कृष्ट काम किया. अब जरूरत है कि राज्य सरकारें सरकारी अस्पतालों को मुफ्त में और निजी अस्पतालों या क्लीनिकों को लागत मूल्य पर टीके वितरित करें.
    लोगों को वैक्सीनेशन को लेकर 24×7 सर्विस मिलनी चाहिए. लोग घर पर, कार के अंदर या आधी रात को भी अस्पताल परिसर में वैक्सीन लगवा सकें, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए.
    कोई भी टीका सरकारी या निजी अस्पताल के रेफ्रिजरेटर में 10 दिनों से अधिक नहीं रहना चाहिए. ये सुनिश्चित किया जाना भी जरूरी है. अगर कोई अस्पताल 10 दिनों में अपने स्टॉक का टीकाकरण करने में सक्षम नहीं है, तो उसे इसे दूसरों को वितरित करना चाहिए. यह रणनीति सरकारी अस्पतालों की अक्षमता और निजी अस्पतालों द्वारा टीकों की जमाखोरी को खत्म करेगी.
    टीकाकरण एक सामुदायिक स्तर का मामला होना चाहिए. इससे पूरे शहर के गरीब लोगों को बिना सरकार की मदद से वैक्सीन लगाई जा सकेगी. 20,000 करोड़ रुपये सीएसआर फंड को भी वैक्सीन खरीदने या गरीबों को टीका लगाने के लिए प्राइवेट क्लीनिकों को भुगतान करने पर खर्च किया जा सकता है.
    राज्य सरकारें बड़े और छोटे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को मुफ्त टीकाकरण के लिए शामिल करें. अस्पताल टीकाकरण के लिए लगभग 5% नर्सिंग स्टाफ को ही छोड़ सकते हैं. सरकारी अस्पतालों के लिए इतने कम वर्कफोर्स के साथ 75% आबादी का वैक्सीनेशन बहुत मुश्किल होगा.
    जब वैक्सीन पूरी तरह से मुफ्त में उपलब्ध हो, तो वर्कप्लेस, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और मनोरंजक सुविधाओं के लिए वैक्सीन सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया जा सकता है.

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