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दुख जटिल भी होते हैं: अपनों की मौत के सदमे से खुद को ऐसे निकालें बाहर

परिवार में किसी सदस्य की मौत का असर आपके जीवन के बड़े फैसले लेने को भी प्रभावित कर सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में जीवन में तुरंत बड़े बदलाव न करें.

परिवार में किसी सदस्य की मौत का असर आपके जीवन के बड़े फैसले लेने को भी प्रभावित कर सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में जीवन में तुरंत बड़े बदलाव न करें.

भारत में आत्महत्या के कारणों में एक किसी प्रियजन की अचानक मौत से मिला दुख या सदमा भी होता है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब ...अधिक पढ़ें

(काकोली मुखर्जी)

नई दिल्ली. इस साल मई में एक परिवार के तीन सदस्यों ने खुदकुशी (Suicide) कर ली, क्योंकि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने प्रियजन को खो दिया था. 2021 में पिता के निधन के बाद अंशिका (30) और अंकू (26) को अपनी मां मंजू श्रीवास्तव (55) के साथ इस दुख का सामना करने में मुश्किल हो रही थी. लगभग एक साल बाद उन्होंने अपने घर को गैस चैंबर में बदल दिया और अपनी जिंदगी खत्म कर ली.

भारत में आत्महत्या के कारणों में एक किसी प्रियजन की अचानक मौत से मिला दुख या सदमा भी होता है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau Data) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 में अपने किसी प्रिय व्यक्ति की मौत के सदमें के कारण 1452 लोगों ने आत्महत्या कर ली. 2021 में यह संख्या बढ़कर 1925 हो गई. ये भारत में सभी आत्महत्याओं का कुल 1.2 प्रतिशत था.

किसी परिवार में मौत खासतौर पर माता-पिता का चले जाना बाकी सदस्यों के लिए दूरगामी प्रभाव डालता है. मजबूत साथ के अभाव में शोक संतप्त परिवार के सदस्य लंबे समय तक आर्थिक, मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से संघर्ष कर सकते हैं. News18 से बात करते हुए YourDOST के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट तितली सरकार ने कहा: “ऐसे व्यक्ति में उदासी, अकेलापन, अपराधबोध, अस्वीकृति, शर्म, गुस्सा, शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे भूख न लगना, नींद न आना जैसी भावनाएं हो सकती हैं. ऐसे व्यक्ति अवसाद, तनावग्रस्त और आत्मघाती व्यवहार जैसी मानसिक स्थितियों को भी विकसित कर सकते हैं. साथ ही साथ दुख का एक लंबा रूप जिसे जटिल दुख कहा जाता है… उस ओर भी जा सकते हैं.”

जटिल दुख से पीड़ित लोगों के लिए किसी प्रिय व्यक्ति की मौत का शोक लंबा और अधिक तेज होता है. ऐसे व्यक्ति अक्सर सोच सकते हैं कि उनके लिए जीवित रहना सही नहीं है, क्योंकि उनके किसी खास की मौत हो गई है. यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित ‘‘Grief and mourning gone awry: pathway and course of complicated grief’के एक चैप्टर के अनुसार, जटिल दुख एक ऐसी स्थिति है, जो मौत की परिस्थितियों के बारे में बताती है.

हैदराबाद में रोशनी परामर्श केंद्र की उप निदेशक नीलिमा प्रसाद कहती हैं: “परिवार के किसी सदस्य के गुजर जाने के बाद जीवित सदस्यों को अपराधबोध की गंभीर भावना महसूस हो सकती है. वे उन चीजों के बारे में सोचते हैं जो वे मौत को रोकने के लिए कर सकते थे या नहीं कर सकते थे. अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीकों से दुख का सामना करते हैं. हालांकि, कुछ लोग मृतक के बारे में बात करना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं, फिर भी यादों को ताजा करना दूसरों के लिए चिकित्सीय उपाय हो सकता है. परामर्श करते समय, हम शोक संतप्त व्यक्ति की इच्छाओं का सम्मान करते हैं और सवाल पूछते हैं कि वे दुख को कैसे संभालना चाहेंगे.”

वहीं, मुंबई के मसीना अस्पताल में सलाहकार मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक डॉक्टर साहिर जमाती कहते हैं, ‘जीवन में कठिन समय में काम करने से व्यक्ति अलग-अलग रणनीतियां विकसित करता है. ये शोक के दौरान भी मदद कर सकता है. उन्होंने आगे कहा, “शायद, बस अपनी भावनाओं को शेयर करना और दोस्तों या अन्य संबंधित लोगों से बात करना नुकसान के बोझ को कम करने में मदद कर सकता है. दोस्तों को बताएं कि आप उनसे सलाह या जवाब की उम्मीद नहीं करते हैं, बल्कि बस उस व्यक्ति के बारे में अपनी भावनाओं या यादों को साझा करना चाहते हैं, जिसे आपने खो दिया है. अगर बात करने के लिए कोई नहीं है, तो पेशेवरों की मदद लेनी चाहिए.”

हैदराबाद में रोशनी परामर्श केंद्र की उप निदेशक नीलिमा प्रसाद कहती हैं, “एक व्यक्ति जो ऐसी भावनाओं से जूझ रहा है उसकी सह-निर्भरता मृतक के साथ हो सकती है. हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि क्या उसके पास रिश्तेदार या दोस्त जैसे बेस हैं. यह महत्वपूर्ण है कि एक शोक संतप्त व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर अपना शोक जाहिर करने की अनुमति दी जाए.”

डॉक्टर साहिर का सुझाव है कि रचनात्मक गतिविधियां जैसे ड्राइंग बनाना, क्राफ्ट करना, संगीत सुनना या बजाना आदि अत्यधिक भावनाओं को संसाधित करने में मदद कर सकते हैं. पालतू जानवर पालना, धर्म या आध्यात्म की शरण लेना, शोक सहायता समूहों में शामिल होना और लंबी सैर भी इस तरह के सदमे से निपटने में मदद कर सकती है.

परिवार में किसी सदस्य की मौत का असर आपके जीवन के बड़े फैसले लेने को भी प्रभावित कर सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में जीवन में तुरंत बड़े बदलाव न करें. क्योंकि एक बड़ा नुकसान आपके जीवन में पहले से ही बहुत बाधा डाल रहा है. इसलिए बाकी सब चीजों को यथासंभव सामान्य रखना सबसे अच्छा है. नौकरी बदलने, बड़े वित्तीय फैसले लेने, आगे बढ़ने या जीवन के अन्य बड़े निर्णय लेने से इस समय बचना चाहिए. शोक संतप्त लोगों के लिए स्वयं के प्रति दयालु होना और अपने दुख को पीछे छोड़कर धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.

[हेल्पलाइन नंबर: रोशनी परामर्श केंद्र (हैदराबाद), सभी दिनों (सुबह 11 बजे – रात 9 बजे), 81420 20033, 81420 20044 पर मुफ्त परामर्श उपलब्ध है]

Tags: Boyfriend Suicide, Life, Mental health, Mental Health Awareness, Suicide

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