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कैसे दोगुनी होगी 'अन्‍नदाता' की आय?

आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोर देना होगा

आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोर देना होगा

प्रधानमंत्री ने फरवरी 2016 में किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने का आश्वासन दिया था. इसके लिए 13 अप्रैल 2016 को 'डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी' का गठन किया गया.

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नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक, 2013 में किसानों की औसत मासिक आय 6426 रुपये थी. जबकि खर्च 6223 रुपए था. बचते हैं सिर्फ 203 रुपये. ऐसे में कोई खेती क्यों करेगा? केंद्र सरकार ने इस हालात को बदलने के लिए काम शुरू किया है.

प्रधानमंत्री आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा में किसानों की आय दोगुनी करने के विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करेंगे. प्रधानमंत्री ने फरवरी 2016 में किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने का आश्वासन दिया था. इसके लिए 13 अप्रैल 2016 को 'डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी' का गठन किया गया. 1984 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक दलवाई को इसका चेयरमैन बनाया गया.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, मार्केट की उपलब्‍धता और उचित मूल्य मिलने से ही किसानों की आय बढ़ सकती है. फिलहाल आय बढ़ाने के लिए सरकार 14 खंडों में स्ट्रेटजी तैयार कर रही है. जिसके नौ खंड पब्लिक डोमेन (http://agricoop.nic.in/doubling-farmers)  में डाल दिए गए हैं. 14वां अध्याय आय दोगुनी करने के लिए की जाने वाली सिफारिशों का है.

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इस कोशिश से अलग किसानों को संकट से उबारने के लिए तेलंगाना ने एक अनोखा काम किया है. वहां के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने खरीफ और रबी में किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है. यानी एक साल में प्रति एकड़ 8000 रुपये. कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा के मुताबिक "2016 के इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार देश के 17 राज्यों में किसानों की सालाना आय सिर्फ 20 हजार रुपये है. इसलिए सरकार किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज की जगह कमीशन फॉर फामर्स इनकम वेलफेयर का गठन  करे." शर्मा भी किसानों को हर माह एक निश्‍चित राशि देने का सुझाव देते हैं.

कमेटी के सदस्य एवं भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर कांग्रेस पर सवाल करते हैं. उन्होंने कहा "देश में इस वक्त करीब 22 फीसदी किसान गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं, इसका जिम्मेदार कौन है? मोदी सरकार सबसे पहले किसानों को उनके घर के आसपास मार्केट उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है. 2000 करोड़ रुपये के एग्री मार्केट डेवलपमेंट फंड से 22 हजार देहाती हाट को मंडी में बदलेंगे. इससे उन्हें वाजिब दाम मिलेगा. हम मधुमक्खी पालन एवं फूड प्रोसेसिंग के लिए भी किसानों को प्रेरित करके आय बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. सरकार ने कृषि ऋण को पिछले साल के 10 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2018-19 में 11 लाख करोड़ कर दिया है."

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हाल ही में हमने 'डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी' के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवाई से बातचीत की थी. तब उन्‍होंने कहा था कि "पहले सिर्फ कृषि के बारे में सोचा जाता था लेकिन पहली बार किसानों के बारे में भी सोचा गया है, ताकि वह खुशहाल हों. कितनी उपज हुई इसके साथ-साथ यह बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान को लाभ कितना मिला."

सरकार के मुताबिक इस तरह दोगुनी होगी किसानों की आमदनी

मार्केटिंग में सुधार: इसके लिए एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग एक्ट 2017 बनाया गया है. मार्केटिंग सुधार के लिए इसे लागू कर दिया गया है. इसके तहत सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट मंडियां भी बनेंगी. इस समय छोटी-बड़ी करीब 6700 मंडियां हैं, जिन्हें 30 हजार तक पहुंचाएंगे. ससका काम शुरू हो गया है. इसी के तहत ऑनलाइन ट्रेड भी होगा. जब किसान को नजदीक में बाजार मिलेगा तभी उसे फायदा मिलेगा.

कांट्रैक्ट फार्मिंग : आय बढ़ाने के लिए जो एक और काम हो रहा है, वह है कांट्रैक्ट फार्मिंग का. निजी कंपनियां बुवाई के समय ही किसानों से एग्रीमेंट कर लेंगी कि वह उत्पाद किस रेट पर लेंगी. रेट पहले ही तय हो जाएगा. ऐसे में किसान फायदा देखकर दाम बताएगा. कांट्रैक्ट करने वाली कंपनी को उसी रेट पर उत्पाद खरीदना पड़ेगा. इसके लिए कांट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट बन रहा है. इसका ड्रॉफ्ट (Model Contract Farming Act 2018) मंत्रालय की वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक करके किसानों की राय मांगी गई है.

स्वायल हेल्थ कार्ड: कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां पर स्वायल हेल्थ कार्ड हिसाब से खाद का इस्तेमाल हुआ है. नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल हुआ है वहां-वहां पर प्रोडक्टिविटी बढ़ी है और प्रोडक्शन कॉस्ट 8-10 फीसदी कम हुई है. प्रधानमंत्री ने 19 फरवरी 2015 को स्वायल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की थी. दावा किया गया है कि 10 करोड़ से ज्‍यादा लोगों के स्‍वायल हेल्‍थ कार्ड बन चुके हैं. हालांकि कृषि अधिकारियों की लापरवाही से इस योजना का कार्यान्‍वयन ठीक तरीके से नहीं हो रहा.

सही लोगों को लोन: 63 हजार प्राइमरी एग्रीकल्चर कॉपरेटिव सोसायटियों (पैक्स) को कम्यूटराइज्ड किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि कृषि के नाम पर लोन गलत लोग न लें. किसानों को ही लोन मिले. इससे सही किसानों तक पैसा पहुंचेगा और उसका इस्तेमाल खेती-किसानी में ही होगा. इसका असर पड़ेगा.

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कृषि उत्पादों का रख-रखाव: इस समय देश भर में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता 32 मिलियन टन की है. कोल्ड स्टोरेज के साथ-साथ रिफर वैन की संख्या जरूरत के हिसाब से काफी कम है. 60 हजार रिफर वैन की जगह सिर्फ 10 हजार ही हैं. रिफर वैन का मतलब कोल्ड स्टोर से सामान दूसरे जगह भेजने के लिए ट्रासंपोर्ट की. यह बढ़ेगा तब किसानों की आय बढ़ेगी.

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