Mucormycosis: ब्लैक फंगस से कैसे लड़ें? क्या करना सही, क्या गलत; जानें

ब्लैक फंगस (Black Fungus Infection) नए तरह का संक्रमण नहीं है, लेकिन यह बहुत ही कम फैलता देखा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

black fungus: शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने ब्लैक फंगस पर जागरूकता फैलाने के लिए एक ट्वीट किया, जिसमें इसके कई पहलुओं की अहम जानकारी दी गई है.

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    नई दिल्ली. देशभर में जिस तरह से ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानि म्यूकरमाइकोसिस (Mukermycosis) के मामले सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शुक्रवार को ट्विटर पर लोगों को सलाह दी कि किस तरह इस संक्रमण में अपनी देखरेख करें.

    हाल ही में देखने को मिल रहा है कि जल्दी जानकारी मिल जाने और सही उपचार से लोगों में दहशत का कारण बने फंगल इन्फेक्शन पर लगाम लगाई जा सकती है. अपने इस ट्विटर के साथ स्वास्थ्य मंत्री ने चार स्लाइड में समझाया है कि किस तरह इसकी पहचान करके इसकी रोकथाम की जा सकती है.

    म्यूकरमाइकोसिस या फिर ब्लैक फंगस क्या है? 
    पहली स्लाइड पर म्यूकरमाइकोसिस क्या होता है, ये बताया गया है. इसमें लिखा है कि म्यूकरमाइकोसिस एक फंगल इन्फेक्शन है, जो उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो और जो वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने में अक्षम हों.

    कोई व्यक्ति म्यूकरमाइकोसिस से कैसे संक्रमित हो जाता है?
    दूसरी स्लाइड में इस बात का जवाब दिया गया है कि किस तरह लोग इस संक्रमण के शिकार हो सकते हैं. ऐसे लोग जो पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त हों, जिनकी वेरिकोनाज़ोल थेरेपी यानि किसी गंभीर फंगल इन्फेक्शन का इलाज चल रहा हो, जिनका डायबिटीज नियंत्रण में न हो, स्टेरायड देने की वजह से इम्यूनिटी पर असर हुआ हो और जो लंबे वक्त से आईसीयू में रहे हैं. उन्हें ये फंगल इन्फेक्शन जल्दी हो सकता है.

    म्यूकरमाइकोसिस के लक्षण क्या हो सकते हैं?
    अगली दो स्लाइड में म्यूकरमाइकोसिस के क्या लक्षण हो सकते हैं और इस दौरान क्या करें और क्या ना करें ये बताया गया है. कोविड -19 की दूसरी लहर में ऐसे मरीज जो ठीक हो रहे हैं या ठीक हो चुके हैं दोनों में ही फंगस का संक्रमण मिलने के बाद म्यूकरमाइकोसिस चर्चा का विषय बन गया है.

    आंखों/नाक के किनारे दर्द होना या फिर लाल निशान पड़ना, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खूनी उल्टी और मानसिक स्थिति पर असर पड़ना इस संक्रमण के लक्षण हैं.

    क्या करें

    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया है कि अगर संक्रमण का डर है या फिर संक्रमण हो चुका है तो आपको क्या करना चाहिए,

    - हाइपरग्लाइसीमिया यानी खून में शर्करा की मात्रा को कंट्रोल करने की कोशिश करें.

    - ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान ह्यूमिडीफायर्स में साफ, स्टराइल पानी का इस्तेमाल करें.

    - कोविड से डिस्चार्ज होने के बाद या फिर डायबिटीज़ में ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को मॉनिटर करते रहें.

    - एंटीबायोटिक्स या एंटी फंगल दवाइयों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण ढंग से करें.

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    कई राज्यों में सामने आ चुके हैं मामले
    महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि उनके राज्य में वर्तमान में ऐसे 2000 से ज्यादा मामले हो सकते हैं, बृह्नमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन यानि बीएमसी ने बताया कि सभी 111 मरीज जिन्हें कोविड हो चुका है, उनका मुंबई के अस्पताल में म्यूकरमाइकोसिस का इलाज चल रहा है.

    कर्नाटक में भी ब्लैक फंगस के मामले दर्ज किए गए हैं इसके बाद कर्नाटक सरकार ने केंद्र से एम्फोटेरिसिन बी के 25,000 डोज की मांग की है. ये दवा इस संक्रमण के इलाज में कारगर बताई जा रही है. इन दो राज्यों के अलावा, ओडिशा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी ऐसे मामले सामने आए हैं.

    मध्यप्रदेश में भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने के बाद बुधवार को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए शासकीय चिकित्सा संस्थान, भोपाल और जबलपुर में अलग से 10 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध किए जाने की घोषणा की है.