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HRD मंत्री का दावा, संस्कृत सबसे वैज्ञानिक भाषा, इसे पढ़ सकते हैं कंप्यूटर

भाषा
Updated: August 27, 2019, 10:47 PM IST
HRD मंत्री का दावा, संस्कृत सबसे वैज्ञानिक भाषा, इसे पढ़ सकते हैं कंप्यूटर
HRD मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भारतीय विरासतों पर रिसर्च करने का आह्वान भी किया है (फाइल फोटो)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (HRD Minister) रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने मंगलवार को संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वैज्ञानिक भाषा है और उन्होंने इसके दुनिया की प्रथम भाषा होने का भी दावा किया.

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (Cabinet Minister of Human Resource Development) रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने मंगलवार को संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वैज्ञानिक भाषा है और उन्होंने इसके दुनिया की प्रथम भाषा होने का भी दावा किया. आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के 65वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए निशंक ने कहा कि भारत सदियों से ज्ञान से विज्ञान तक का वैश्विक नेता रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत ने सदियों पूर्व दुनिया को योग और आयुर्वेद दिए और विज्ञान इनके पीछे आया. मंत्री ने कहा कि संस्कृत सबसे उपयोगी, सबसे वैज्ञानिक भाषा है और कंप्यूटर द्वारा पढ़ी जा सकती है. उन्होंने कहा, ‘‘संस्कृत (Sanskrit) दुनिया की पहली भाषा है.’’

'हिमालय ने 'नीलकंठ' की तरह विष पीकर रोका प्रदूषण'
देश के समृद्ध इतिहास और संस्कृति का उल्लेख करते हुए निशंक ने गंगा नदी को ‘मां और जीवन’ की संज्ञा दी. निशंक ने कहा कि हिमालय ‘नीलकंठ’ की तरह सारा विष पीकर विकसित देशों के प्रदूषण से पर्यावरण को बचा रहा है. मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष पर पहुंच रहा है और अर्थव्यवस्था के मामले में चीन को छोड़कर तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘एफडीआई (FDI) के मामले में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है.’’

'रामसेतु पर रिसर्च करें युवा इंजीनियर'
इसके अलावा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने युवा इंजीनियरों से यह आह्वान भी किया कि राम सेतु (Rama Setu) जैसे ऐतिहासिक चमत्कारों पर अनुसंधान करके देश के गौरवपूर्ण स्मारकों के बारे में नए सत्य खोजें.

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम पीछे देखते हैं तो याद करते हैं कि हमारे इंजीनियरों ने कैसे राम सेतु बनाया था और हमारे भावी इंजीनियरों को इस पर गहन अध्ययन करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि भारतीय पुराणों में उल्लेख है कि भगवान राम की वानर सेना ने समुद्र पार करके लंका जाने के लिए राम सेतु का निर्माण किया था.
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'हमारे गौरवपूर्ण स्मारकों के बारे में नए सत्य खोजे जाएं'
जब निशंक से बाद में संवाददाता सम्मेलन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के इस रुख के बारे में पूछा गया कि यह साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि राम सेतु मानव निर्मित सेतु है. इस पर एचआरडी मंत्री ने कहा, ‘‘मेरा आशय है कि नया अनुसंधान होना चाहिए और राम सेतु के बारे में अध्ययन होना चाहिए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कहा था कि हमारे युवा इंजीनियरों की भावी पीढ़ी को राम सेतु जैसे ऐतिहासिक चमत्कारों के बारे में नए निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए नए अनुसंधान करने चाहिए ताकि हमारे गौरवपूर्ण स्मारकों के बारे में नए सत्य खोजे जाएं. जिससे दुनिया को एक बार फिर इस बारे में बताया जा सके कि सदियों पहले हमने किस-किस का निर्माण किया था.’’

दो संस्थाएं राम सेतु पर अध्ययन से कर चुकी हैं इनकार
ASI ने कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के कार्यकाल में उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर दावा किया था कि भगवान राम के अस्तित्व और मानव निर्मित सेतु के तौर पर राम सेतु के अस्तित्व को साबित करने के लिए कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. हालांकि सितंबर 2007 में हलफनामा वापस ले लिया गया था.

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) ने पिछले साल अप्रैल में घोषणा की थी कि वह यह पता लगाने के लिए कोई अध्ययन नहीं करेगा या अध्ययन के लिए धन नहीं देगा कि राम सेतु मानव निर्मित है या प्राकृतिक है.

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First published: August 27, 2019, 10:38 PM IST
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