प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मामले में मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी को समन जारी किया

बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर. फाइल फोटो

भोपाल से सांसद और मालेगांव विस्‍फोट मामले (Malegaon Blast Case) में आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) को हिरासत में प्रताड़ित करने की शिकायत पर महाराष्‍ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को समन जारी कर दिया है.

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    मुंबई. महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने 2008 मालेगांव विस्फोट मामले  (Malegaon Blast Case) में आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) को हिरासत में प्रताड़ित करने की शिकायत पर राज्य के पुलिस महानिदेशक को मंगलवार को समन जारी किया. आयोग ने पुलिस प्रमुख से छह अप्रैल को उसके समक्ष उपस्थित होने को कहा है.

    पेशे से वकील आदित्य मिश्रा ने 2018 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी थी. उस दौरान ठाकुर ( वर्तमान में भाजपा सांसद ) ने टीवी पर एक साक्षात्कार में आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के बाद राज्य (महाराष्ट्र) पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने उन्हें प्रताड़ित किया था. आयोग ने इस मामले को राज्य मानवाधिकार आयोग के पास भेज दिया था.

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    अर्जी में अनुरोध किया गया है कि आयोग को ठाकुर के आरोपों पर संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि यह ‘‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) से जुड़ा मुद्दा है.’’ ठाकुर फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं. वह 29 सितंबर, 2008 में उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए विस्फोट मामले की मुख्य आरोपी हैं. शहर के एक मस्जिद के पास बाइक पर रखा बम फटने से छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation Agency) इस मामले की जांच कर रहा है. मुकदमे की सुनवाई चल रही है.

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    मामले में छह अन्य आरोपियों में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, समीर कुलकर्णी, रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर और सुधारकर द्विवेदी शामिल हैं. मामले की सुनवाई पिछले साल मार्च में कोविड-19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन की वजह से रूक गई थी.  पिछले महीने एनआईए की विशेष अदालत ने सुनवाई फिर से शुरू की थी. अब तक 400 में से करीब 140 गवाहों से जिरह की जा चुकी है. अदालत ने अक्टूबर 2018 में पुरोहित, ठाकुर और पांच अन्य के खिलाफ आतंकवाद के आरोप तय कर दिए थे.



    अदालत में नियमित रूप से पेश होने से छूट मिल चुकी है
    एनआईए (NIA) की एक विशेष अदालत ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर को अदालत में नियमित रूप से पेश होने से मंगलवार को छूट मिल चुकी है. ठाकुर इस मामले के सात आरोपियों में एक हैं. विशेष न्यायाधीश पीआर सित्रे ने मंगलवार को ठाकुर को अदालत में पेशी से छूट दी. इससे पहले उनके वकील जेपी मिश्रा ने आवेदन दायर कर कहा था कि सांसद को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से नियमित रूप से यहां आने में दिक्कत होती है. भाषा के मुताबिक वकील ने आवेदन में कहा, "ठाकुर को कई बीमारियां हैं और एम्स में उनका उपचार चल रहा है. वह (कल) मुंबई में थीं और इस दौरान कोकिलाबेन अस्पताल में उनकी कई जांच हुईं, डॉक्टरों ने उनसे कहा कि उन्हें कई जटिलताएं हैं और उनका उपचार किए जाने की जरूरत है." मिश्रा ने कहा कि भोपाल से बीजेपी सांसद ठाकुर को "जान का खतरा" है. इसलिए मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए छह सशस्त्र कर्मी उपलब्ध कराएं हैं.

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