मोदी सरकार के 100 दिन: आर्टिकल 370 से लेकर ट्रिपल तलाक कानून तक, सरकार ने लिए कई साहसिक फैसले

गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जब सदन के भीतर अनुच्छेद 370 (Article 370) और 35 (ए) को निष्प्रभावी बनाने के प्रस्ताव पेश किए, तो सभी अचंभे में आ गए. सरकार ने दो दिन के भीतर सदन के दोनों सत्रों से इसे पारित भी करवा लिया.

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:19 PM IST
मोदी सरकार के 100 दिन: आर्टिकल 370 से लेकर ट्रिपल तलाक कानून तक, सरकार ने लिए कई साहसिक फैसले
मोदी सरकार की दूसरी पारी के पूरे हुए सौ दिन, इस दौरान लिए गए कई साहसिक फैसले.
विक्रांत यादव
विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 1:19 PM IST
नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की दूसरी पारी के सौ दिन (Hundred Days) आज यानी सात सितंबर को पूरे हो रहे हैं. सौ दिन के इस कार्यकाल को कई ऐतिहासिक और साहसिक फैसलों के लिए जाना जाएगा. जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निष्प्रभावी करने का फैसला हो या मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से राहत देने के लिए कानून की बात हो, सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला संसद सत्र रिकार्ड कामकाज के लिए जाना जाएगा. जिसने पहले के तमाम रिकार्ड तोड़ दिए और एक ही सत्र के दौरान 36 विधेयकों को मंजूरी मिली.

सौ दिन और एक "मजबूत सरकार"
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के सौ दिनों को बीजेपी "मजबूत सरकार" के कामकाज के रूप में प्रचारित कर रही है. ऐसा करने के लिए पार्टी और सरकार के पास वजहें भी हैं. इन सौ दिनों में संसद का एक सत्र हुआ है और उस सत्र ने कामकाज के तमाम पुराने रिकार्ड तोड़ दिए. यूं तो सरकार 2014 से भी प्रचंड बहुमत के साथ 2019 में आई थी. लेकिन राज्यसभा में अब तक उसका बहुमत नहीं था. ऐसे में सरकार को अंदेशा था कि कहीं पिछले कार्यकाल की तरह उसके अहम बिल राज्यसभा में ना रुक जाएं. लेकिन इस बार संसद सत्र के पहले दिन से सरकार आक्रामक दिखाई दी, सरकार के रुख से साफ दिखाई दे रहा था कि राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत को वो अपने कामकाज में बाधा नहीं बनने देगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.


कई महत्वपूर्ण बिल हुए पास
इसका सबसे बड़ा परिणाम दिखाई दिया, जब सरकार ने आरटीआई कानून में संशोधन पास करवा लिया. बस फिर क्या था, पिछले कार्यकाल में तीन तलाक को लेकर भरसक कोशिश करने वाली सरकार ने एक झटके में इस बिल को पास करवा लिया. ये सरकार के लिए एक बड़ी कामयाबी थी. जब ये बिल पास हुआ, तो ये लग रहा था कि ये इस सत्र के लिए सरकार के लिए सबसे बड़ी कामयाबी होगा, लेकिन सरकार तो इससे कहीं आगे का सोच रही थी. संसद का सत्र समाप्ति की ओर था, तभी सरकार ने 9 अगस्त तक सत्र बढ़ाने का फैसला ले लिया था. पांच अगस्त को लग रहा था कि सरकार जम्मू-कश्मीर के बारे में कोई फैसला ले सकती है. लेकिन क्या फैसला लेगी, किसी को हवा नहीं थी.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया
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गृहमंत्री अमित शाह ने जब सदन के भीतर अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निष्प्रभावी बनाने के प्रस्ताव पेश किए, तो सभी अचम्भे में आ गए. सरकार ने दो दिन के भीतर सदन के दोनों सत्रों से इसे पारित भी करवा लिया. ये एक ऐसा फैसला था, जिस पर बीजेपी जनसंघ के जमाने से अपना विरोध दर्ज कराती रही थी. पार्टी का हमेशा से ये कहना था कि जब भी सही समय आएगा और उसके पास जरूरी बहुमत होगा, वो इसे समाप्त कर देगी और उसने ऐसा कर भी दिया. संसद में सरकार बेहद मजबूत होकर सामने आई. महत्वपूर्ण विधेयकों पर दो तिहाई बहुमत जुटा कर सरकार ने विपक्ष को निष्प्रभावी कर दिया. इस सत्र के दौरान करीब दस विपक्षी सांसदों ने अपने राज्यसभा सीटों से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया.

गृह मंत्री अमित शाह.


पाकिस्तान को किया अलग-थलग
जम्मू-कश्मीर के मामले में फैसले के बाद सभी को लगा था कि पाकिस्तान अपनी हरकते तेज कर देगा लेकिन सरकार पहले से ही चौकस थी. जम्मू-कश्मीर के बड़े नेताओं और अलगावदियों को नजरबंद कर दिया गया. राज्य का इंटरनेट बंद कर दिया गया और तमाम तरह की चौकसी बढ़ा दी गई. नतीजा ये रहा कि पाकिस्तान चाहकर भी किसी गलत हरकत को अंजाम नहीं दे सका. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समेत कई मंचों पर इस मसले को उठाने या दुनिया के बाकी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन चौकस सरकार ने उसके ये प्रयास विफल कर दिए. पूरी दुनिया से एक स्वर से आवाज आई कि ये भारत का अंदरूनी मसला है और वो फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है. पीएम मोदी अपने इन सौ दिनों में करीब दस देशों का दौरा कर चुके हैं और इस दौरान भारत की ताकत साफ दिखाई दी.

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First published: September 7, 2019, 11:41 AM IST
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