Rajasthan: आहत 'माननीय' का सदन में छलका दर्द, बोले- हारे हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हैं, हमें बुलाया भी नहीं जाता

राजस्थान में विधानसभा सत्र के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया.

राजस्थान में विधानसभा सत्र के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर ने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया.

प्रोटोकॉल की पालना नहीं होने से आहत प्रतिपक्ष के विधायकों की पीड़ा आज विधानसभा में छलक पड़ी. उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने शून्यकाल में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए अपना दर्द बयां किया.

  • Last Updated: March 19, 2021, 8:37 PM IST
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जयपुर. प्रोटोकॉल की पालना नहीं होने से आहत प्रतिपक्ष के विधायकों की पीड़ा आज विधानसभा में छलकी. उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने शून्यकाल में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए अपना दर्द बयां किया. राठौड़ ने प्रमुख तौर पर चार मसले उठाए. उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के विधायकों को राजकीय समारोहों में आमंत्रित नहीं किया जाता है. साथ ही अधिकारी हमारे पत्रों के उत्तर नहीं देते. इतना ही नहीं विधायक विकास कोष से 6-6 महीने तक पैसे की स्वीकृतियां जारी नहीं होती. कोविड के दौरान विधायकों ने जो राशि दी उससे अभी तक उपकरण नहीं खरीदे गए.

राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि विधायक 3 से 5 लाख जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, हमारे नाम के आगे माननीय लिखा जाता है और प्रोटोकॉल में हमारा स्थान चीफ सेक्रेटरी से भी ऊपर है, लेकिन बार-बार हमें नीचा देखना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मैं 7 बार जीतकर आया हूं. मेरे क्षेत्र में जिन्हें मैंने हराया, वह व्यक्ति समारोह की अध्यक्षता करते हैं और मैं टुकुर-टुकुर देखता रह जाता हूं.

हरियाणा जैसी परम्परा नहीं होनी चाहिए

राजेंद्र राठौड़ ने इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बता दिया. राठौड़ ने कहा कि हो सकता है हमारी सरकार के समय भी ऐसे मामले सामने आए हों लेकिन अब व्यवस्था सुधार की पहल करनी होगी. राजस्थान में हरियाणा जैसी परम्परा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हरियाणा में बंशीलाल और देवीलाल की सरकार के दौरान ऐसा होता था जब सरकार बदलती थी तो विपक्ष के विधायकों को समारोहों में नहीं बुलाया जाता था. राजेन्द्र राठौड़ ने यह भी कहा कि प्रभारी मंत्री जब जिलों में मीटिंग लेने जाते हैं तो दहेज में अपने साथ इतने लोगों को लेकर आते हैं कि हमें दूर कोने में बैठना पड़ता है.
यह विशेषाधिकार हनन नहीं

राठौड़ के उठाए मुद्दे का जवाब देते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि यह सभी सदस्यों के सम्मान की बात है और सम्मान कायम रहे इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही का प्रावधान है. इस सम्बन्ध में पूर्व में गाइडलाइंस बनी हुई हैं जिनकी पालना के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही का प्रावधान है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि पत्र का जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों पर सख्ती होगी.

धारीवाल ने कहा कि जिला कलेक्टर प्रोटोकॉल की पालना करवाने के लिए नोडल ऑफिसर होता है जहां शिकायत की जानी चाहिए. धारीवाल ने कहा कि यह प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला तो हो सकता है लेकिन विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं है. विशेषाधिकार हनन का मामला तब बनता है जब संसदीय दायित्वों और कर्तव्यों के पालन से रोका जाता हो. उन्होंने कहा कि शिलापट्ट पर हर किसी का नाम नहीं होगा बल्कि केवल उद्घाटनकर्ता, अध्यक्ष या मुख्य अतिथि का ही नाम होगा.



भारत सरकार की तरह तय होगा प्रोटोकॉल

स्पीकर डॉ. सीपी जोशी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए चीफ सेक्रेट्री स्तर की बैठक बुलाकर प्रोटोकॉल तय करने की बात कही. स्पीकर ने कहा कि राजकीय समारोहों को लेकर भारत सरकार में स्पष्ट रुप से प्रोटोकॉल बना हुआ है. उसी तरह का प्रोटोकॉल राज्य में भी तैयार कर लिया जाना चाहिए. स्पीकर ने कहा कि दो महीने के अन्दर इस मामले को लेकर चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में मीटिंग बुलाई जाएगी जिसमें मैं भी मौजूद रहूंगा. बैठक में संसदीय कार्यमंत्री के साथ ही, मुख्य सचेतक और प्रतिपक्ष के नेता भी मौजूद रहेंगे.

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