हैदराबाद के दंपति से 40 लाख रुपये ठगे, कर्ज चुकाने को किडनी बेचने को तैयार

सायबर जालसाजों ने बुजुर्ग दपंति से लाखों रुपए लूट लिए . ( प्रतीकात्‍मक चित्र )

क्राइम पुलिस के मुताबिक हैदराबाद (Hyderabad) के खैरताबाद निवासी मोदी वेंकटेश और लावण्या दंपति स्टेशनरी और चूड़ी की दुकान चलाते हैं. दंपति की शिकायत के अनुसार, उन्होंने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से 34 लाख रुपये और दूसरी संस्था से 10 लाख रुपये उधार लेकर 1.50 करोड़ रुपये से चार मंजिला इमारत का निर्माण किया. कोरोना लॉकडाउन के कारण कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ और कर्ज चुकाने का दबाव बन रहा था. दंपति ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने का फैसला किया.

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    हैदराबाद. हैदराबाद (Hyderabad) के एक दंपति से साइबर क्राइम जालसाज ने 40.38 लाख रुपये ठग लिए. पीड़ित दंपति ने बुधवार को साइबर क्राइम (Cyber Crime) पुलिस में शिकायत की. साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक हैदराबाद के खैरताबाद निवासी मोदी वेंकटेश और लावण्या दंपति स्टेशनरी और चूड़ी की दुकान चलाते हैं. दंपति की शिकायत के अनुसार, उन्होंने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से 34 लाख रुपये और दूसरी संस्था से 10 लाख रुपये उधार लेकर 1.50 करोड़ रुपये से चार मंजिला इमारत का निर्माण किया. कोरोना लॉकडाउन के कारण कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ और कर्ज चुकाने का दबाव बन रहा था. दंपति ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने का फैसला किया.

    दंपति ने गुर्दा खरीदने वालों को खोजने के लिए Google की मदद ली और आखिरकार उन्हें एक व्यक्ति मिल गया. शुरू में, उन्होंने उनके नाम मुफ्त में दर्ज करने के लिए कहा और फिर बीमा और विनिमय शुल्क के लिए 10 लाख रुपये एकत्र किए लेकिन सौदा सफल नहीं हुआ. दूसरा सौदा भी दूसरे व्यक्ति को 12 लाख रुपये देने के बाद भी सफल नहीं हुआ. वेंकटेश और लावण्या ने मिलकर चार लोगों से ऑनलाइन संपर्क किया. एक व्यक्ति का मानना ​​है कि सिर्फ पंजीकरण शुल्क काटने से देय राशि का आधा हिस्सा जुड़ जाएगा.

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    बताया जा रहा है कि दोनों खातों में पैसे जमा किए गए थे. उन्होंने कहा कि दो-तीन दिन के लिए पैसे लिए जा सकते हैं. दंपति तीन दिन बाद भी वापस नहीं ले सके. संपर्क करने पर दंपति ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्रालय, वायु सेना प्राधिकरण और आयकर विभाग से मंजूरी के नाम पर फिर से पैसा वसूल किया गया. एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर वे पैसे लेने के लिए बेंगलुरु आते हैं, तो उनके आदमी अग्रिम भुगतान करेंगे. इसे सच मानकर वे बेंगलुरु चले गए. दो लोगों ने होटल में आकर लॉकर खोलकर रुपये दिखाए.

    दंपति ने पूछा कि नोट काले रंग के क्यों हैं. उन्होंने जवाब दिया, सभी नोट आरबीआई के पैसे से हैं और इन्हें रसायनों से साफ करने की जरूरत है. कुछ नोट साफ कर दिखाए गए. उन्हें एक पैकेट में लपेट कर दंपति को सौंप दिया और 48 घंटे तक न खोलने को कहा. दंपति ने कहा कि उन्होंने मुंबई से रसायन आयात करने के लिए उनसे फिर से पैसे लिए थे और सोना गिरवी रखकर भुगतान किया था. जब वे हैदराबाद वापस आए और पैक खोला तो उन्हें सारे नकली नोट मिले.

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