हैदराबादः AIMIM के गढ़ याकूतपुरा में बदल रहे हैं समीकरण, जीत सकती है BJP!

याकूतपुरा में समीकरण कुछ ऐसे बन गए हैं कि अल्पसंख्यक समाज का वोट बंटना लाज़मी है और यही बात बीजेपी को उम्मीद की किरण के तौर पर नजर आ रही है.

Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 3:32 PM IST
हैदराबादः AIMIM के गढ़ याकूतपुरा में बदल रहे हैं समीकरण, जीत सकती है BJP!
असदुद्दीन ओवैसी की फाइल फोटो
Sanjay Tiwari | News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 3:32 PM IST
तंग गलियां, सीवेज का बहता पानी, बदबू और मच्छर. याकूतपुरा इलाके में आते ही हाईटेक हैदराबाद की हवा निकल जाती है. छोटी-छोटी दुकानों की बीच सड़कों पर धुआं छोड़ती और बेतरतीब ढंग से भागती गाड़ियां विशुद्ध कस्बाई तस्वीर पेश करती हैं. यह हैदराबाद का याकूतपुरा इलाका है. विकास की रफ्तार जैसे याकूतपुरा विधानसभा इलाके तक आते-आते दम तोड़ चुकी हो.

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम याकूतपुरा विधानसभा सीट पर दशकों से जीतती आई है. लेकिन इस बार हवा का रुख कुछ बदला-बदला नज़र आ रहा है. याकूतपुरा की मदन्नापेट इलाके में रहने वाले 65 साल के अबदुल्ला सब्जियां बेचते हैं. उनका कहना है बुढ़ापा आ गया है लेकिन इस इलाके की तस्वीर नहीं बदली. रोजगार की समस्या सबसे बड़ी है और हुक्मरानों ने इस दिशा में कुछ नहीं किया है.



मुर्तजानगर में रहने वाली खदीजा बी घरेलू महिला हैं. खदीजा बी का कहना है कि पूरा हैदराबाद बदल गया, लेकिन याकूतपुरा में कुछ नहीं बदला. अब्दुल्ला और खदीजा बी जैसे लोगों के ही असंतोष को भांपकर शायद एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने याकूतपुरा से अपने पार्टी उम्मीदवार को बदल दिया है. 1994 से पांच बार याकूतपुरा सीट से विधायक रह चुके मुमताज अहमद खान को ओवैसी ने इस बार चारमीनार सीट पर ट्रांसफर कर दिया है और उनकी जगह चारमीनार इलाके से विधायक रहे अहमद पाशा कादरी को याकूतपुरा सीट से उम्मीदवार बनाया है. असदुद्दीन ओवैसी को उम्मीद है कि प्रत्याशी बदलने से शायद सीट बच जाए, लेकिन मामला इतना आसान नहीं लग रहा.

एआईएमआईएम के इस गढ़ में असदुद्दीन ओवैसी का गणित मजलिस बचाओ तहरीक के अध्यक्ष फरहतुल्ला खान ने बिगाड़ दिया है. एआईएमआईएम की तरह मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) भी हैदराबाद की स्थानीय पार्टी है. फरहतुल्ला खान के पिता अमानुल्लाह खान एआईएमआईएम की तरफ से पांच बार विधायक रह चुके थे और बाद में उन्होंने एआईएमआईएम से अलग होकर एमबीटी का गठन किया. फरहतुल्ला खान ने जोर-शोर से प्रचार किया है और ओवैसी की पार्टी से नाराज वोटर्स फरहतुल्ला खान को वोट देने की बातें कर रहे हैं.

इस वजह से याकूतपुरा सीट में मुस्लिम वोट दो फाड़ होता हुआ साफ नजर आ रहा है. इस सीट से बहुजन समाज पार्टी से सैयद इनायतुल्ला, तेलंगाना लेबर पार्टी से मोहम्मद उस्मान, सीपीआईएम से सैयद हाजी पाशा और मुस्लिम समाज से छह निर्दलीय उम्मीदवार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.
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ऐसे में अल्पसंख्यक समाज का वोट बंटना लाज़मी है और यही बात बीजेपी को उम्मीद की किरण के तौर पर नजर आ रही है. याकूतपुरा में करीब 60 फीसदी आबादी अल्पसंख्यक समाज की है. लेकिन अगर वोट बंटता है, तो नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. हालात को भांपते हुए असदुद्दीन ओवैसी याकूतपुरा में करीब 20 बार पदयात्रा और जनसभा कर चुके हैं. उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी याकूतपुरा में पूरा दम लगा रहे हैं. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती एआईएमआईएम के परम्परागत वोटर्स को बचाए रखने की है. पार्टी के कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी मुश्किलें बढ़ा रही है.

खास बात यह है कि बीजेपी ने याकूतपुरा सीट से इस बार फिर रूपराज को उम्मीदवार बनाया है. 2014 में रूपराज को 32 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और वो दूसरे नंबर पर आए थे. इस बार फिर रूपराज मैदान में हैं. पिछले साढ़े चार सालों में उन्होंने अपने वोट बैंक को मजबूत करने में भी काफी मेहनत की है. ऐसे में अगर ओवैसी के गढ़ में कमल खिल जाता है तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी.
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