मक्का मस्जिद ब्लास्ट में फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगी NIA, जानें कौन है असीमानंद

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस से पहले असीमानंद का नाम अजमेर दरगाह में धमाके, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट में भी जुड़ चुका है.

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Updated: May 29, 2018, 4:37 PM IST
मक्का मस्जिद ब्लास्ट में फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगी NIA, जानें कौन है असीमानंद
स्वामी असीमानंद (फाइल फोटो)
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Updated: May 29, 2018, 4:37 PM IST
एनआईए, हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में आगे अपील नहीं करेगी. 16 अप्रैल को आए फैसले में अदालत ने असीमानंद को बरी कर दिया था. CNN-NEWS18 को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार NIA असीमानंद को बरी करने के खिलाफ अपील नहीं करेगी.

11 साल बाद एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी 5 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. इस मामले में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया था. मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस से पहले असीमानंद का नाम अजमेर दरगाह में धमाके, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट और 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट में भी जुड़ चुका है.

आइए जानते हैं कौन हैं असीमानंद?:-

-असीमानंद को जतिन चटर्जी उर्फ नबाकुमार उर्फ स्वामी ओंकारनाथ के नाम से भी जाना जाता है. वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) से ग्रेजुएशन किया.

-1990 से 2007 के बीच असीमानंद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े. यहां उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली. 1995 के आस-पास वह गुजरात के डांग जिले के मुख्यालय आह्वा आए. यहां 'हिंदू धर्म जागरण और शुद्धीकरण' का काम करने लगे.

-असीमानंद ने आह्वा में शबरी माता का मंदिर और धाम बनाया. ऐसी खबरें भी आई थी कि उन्होंने 2006 में अल्पसंख्यक समुदाय को आतंकित करने के लिए कुंभ का आयोजन किया. इस दौरान यहां सुनियोजित धमाके हुए.

-स्वामी असीमानंद को अजमेर, हैदराबाद और समझौता एक्स्प्रेस विस्फोट मामलों में 19 नवंबर 2010 को उत्तराखंड के हरिद्वार से अरेस्ट किया गया था.
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-साल 2011 में उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया था कि अजमेर की दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्य कई स्थानों पर हुए बम धमाकों में उनका और दूसरे हिंदू चरमपंथियों का हाथ था. हालांकि, बाद में वो अपने बयान से पलट गए.

-असीमानंद को साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का करीबी माना जाता है. साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का नाम भी मालेगांव ब्लास्ट में सामने आया था.

असीमानंद 1988 तक अपने गुरु के साथ पश्चिम बंगाल के बर्धवान में ही रहते हैं.

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