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शाह फैसल का नई सच्चाई के सामने समर्पण, बोले-कश्मीर में 5 अगस्त से पहले का दौर लौटाने की शक्ति नहीं

शाह फैसल ने राजनीति छोड़ दी है और इस महीने वे फिर से IAS ज्वाइन कर सकते हैं (फोटो- PTI)

शाह फैसल ने राजनीति छोड़ दी है और इस महीने वे फिर से IAS ज्वाइन कर सकते हैं (फोटो- PTI)

जम्मू-कश्मीर के पहले आईएएस टॉपर शाह फैसल (Shah Feasal) के इस यू-टर्न ने उन्हें 'इस्तीफा देने वाले' (Resignation man) की पदवी दिला दी है, लेकिन उन्होंने न्यूज18 से एक इंटरव्यू में कहा कि राजनीति छोड़ना, आत्मसमर्पण (surrender) नहीं बल्कि एक रणनीतिक निर्णय (strategic decision) है.

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    (मुफ्ती इस्लाह)

    नई दिल्ली. IAS टॉपर शाह फैसल (Shah Faesal) ने जम्मू कश्मीर की राजनीति से विदाई ले ली. उनका राजनीतिक करियर (political career) अनुच्छेद 370 (Article 370) की बलि चढ़ गया. अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने की कड़ी आलोचना करने वाले शाह ने पिछले हफ्ते राजनीति से किनारा कर लिया. यह एक ऐसा निर्णय है, जिसने इलाके की आबादी (population) को नाराज कर दिया है. अगर सभी चीजें सही रहती हैं तो शाह के इस महीने के आखिर में आईएएस (IAS) में फिर से शामिल होने की संभावना है.

    उनके इस यू-टर्न ने उन्हें 'इस्तीफा देने वाले' (Resignation man) की पदवी दिला दी है, लेकिन उन्होंने न्यूज18 से एक इंटरव्यू में कहा कि राजनीति छोड़ना, आत्मसमर्पण (surrender) नहीं बल्कि एक रणनीतिक निर्णय (strategic decision) है. उन्होंने पूछा कि लोगों को ऐसे में नेतृत्व के लिए आगे क्यों आना चाहिए, जब लोग पीठ में घोंपने के लिए छुरा लिए घूम रहे हों. मुझे यकीन है कि मेरे यहां मुझसे बेहतर लोग हैं जो वह बदलाव ला सकते हैं, जिसे लाने की शक्ति मेरे पास नहीं है."

    उन्होंने बातचीत में सार्वजनिक जीवन से दूर रहने के लिए प्रेरित करने वाली बात, नई व्यवस्था में कश्मीर का भविष्य क्या है और महीनों की नजरबंदी से जीवन में किस तरह का बदलाव आया है, जैसे सवालों के जवाब दिये-

    एक सेलिब्रिटी नौकरशाह से लेकर एक महत्वाकांक्षी राजनेता तक और शायद अब फिर से नौकरशाह के रूप में, आप हमेशा अस्थिर क्यों रहे हैं?

    इस प्रश्न में मैं गुस्सा देखता हूं और मैं इसका पूरा सम्मान करता हूं. यह धारणा बनी है कि मैं एक 'इस्तीफा देने वाला आदमी' हूं और मैं एक जगह से दूसरी जगह जाता रहता हूं. लेकिन इसका मेरे जीवन को समझने के तरीके के जुड़ाव है. हम सभी बड़ी चुनौतियों की तलाश में रहते हैं. कई बार यह काम करता है और कई बार ऐसा नहीं होता है. यह किसी भी तरह से असामान्य नहीं है.

    क्या यह नया अहसास आपकी साल भर की नजरबंदी के दौरान आप पर हावी हुआ है?

    हां. सच कहूं तो मैंने इत्मीनान से इसके बारे में सोचा. सात महीने तक हिरासत में रहने के दौरान जब मेरा परिवार एक जगह से दूसरी जगह भाग रहा था तो एक स्थानीय पत्रकार, जिसे आप जानते हैं, ने मेरी नजरबंदी पर स्टोरी की. उसे बुरी तरह से ट्रोल किया गया था और मुझे अविश्वसनीय रूप से गालियां दी गईं, जबकि मैं अंदर था. वह भी किस लिए?

    फिर जैसे-जैसे समय बीतता गया मुझे लगता था कि अगर मैं बाहर निकलता हूं और राज्य का दर्जा (कश्मीर के लिए) मांगता हूं, तो भीड़ इसे ‘समझौता’ कहेगी, अगर मैं अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करता हूं, तो भीड़ इसे 'समझौता’कहेगी. मैं जो भी कह लूं, प्रतिक्रिया पहले से ही तय है. इसलिए मैंने जीवन में आगे बढ़ने और कुछ सार्थक करने के बारे में सोचा है.

    आपने महसूस किया होगा कि मुख्यधारा में वापसी आसान काम नहीं है. वहां बलिदान करना होता है और कभी-कभी आप सरकार की मजबूत रणनीतियों और परिवार के भावनात्मक दबावों के आगे हार मान लेते हैं?

    मैं बलिदान देने के लिए तैयार था और मैंने दिया. लेकिन मुद्दा यह है कि क्या लोग उन चुनौतियों को तवज्जो देते हैं, जिनका मुख्यधारा के नेताओं को सामना करना पड़ता है. हम बस यही देखते हैं कि गालियां और उपहास बढ़ा है. मुझे नहीं पता कि किसी को आगे बढ़ने के लिए क्यों आगे आना चाहिए जब लोग बाहर उसकी पीठ में छुरा घोंपने के लिए बाहर रहते हैं.

    मेरी गुस्ताखी माफ करें... क्या आपने आत्मसमर्पण कर दिया? बीबीसी पर आपके एक इंटरव्यू से जोड़कर पूछें तो आप क्या हैं- एक कठपुतली या अलगाववादी?

    समर्पण करने और रणनीतिक के मुताबिक चलने के बीच एक महीन रेखा है. आत्मसमर्पण लड़ाई से पहले हार मान लेना है. रणनीतिक होना अपनी लड़ाइयों को समझदारी से चुनना है और गलत कारणों से गलत समय पर अपने जीवन को चलाना नहीं है. मुझे एक ही समय में अलगाववादी और कठपुतली होने का विशेषाधिकार है. मुझे दोनों ओर से ईंट-पत्थरों का सामना करना पड़ रहा है और यह इस बात का प्रमाण है कि मैं दोनों में से नहीं हूं.

    लगता है आप 5 अगस्त को संवैधानिक परिवर्तन को स्वीकार कर चुके हैं? क्या आप चाहेंगे कश्मीरी भी इसे स्वीकार कर लें? और अन्य क्षेत्रीय दल जैसे NC और PDP भी?

    मैं किसी को कोई सलाह देने वाला नहीं हूं. अपने आप से, मैं कह रहा हूं कि 5 अगस्त एक वास्तविकता है, हम इसे पसंद करें या नहीं. लेकिन हम इससे इनकार नहीं कर सकते. जो लोग इसे पूर्ववत करने की शक्ति रखते हैं, वे आगे आ सकते हैं और ढाल उठा सकते हैं. मेरे जैसे लोग जो सोचते हैं कि हमारे पास पूर्ववत करने की कोई शक्ति नहीं है, उन्हें लोगों को सच्चाई बताने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और आगे बढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए.

    कई लोग यह भी कहते हैं कि आपकी पिछले एक साल का जीवन सहानुभूति हासिल करने के लिए तय किया गया था?

    इस तरह की बेवजह अटकलों के लिए हमेशा गुंजाइश होती है और यह मेरे राजनीति छोड़ने के कारणों में से एक है. हम एक कम-भरोसे वाले समाज में रहते हैं. आपके जीवित रहने तक आपसे हमेशा सवाल किये जाएंगे. केवल आपकी मृत्यु कश्मीर में आपकी प्रतिष्ठा को वापस ला सकती है.

    यह पूरा इंटरव्यू अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    आपके हालिया साक्षात्कारों से पता चलता है कि आप खुद को देशभक्त और उग्रवाद का शिकार दिखाना चाहते हैं? और आप एक मुस्लिम, कश्मीरी और IAS टॉपर होने के नाते पूरे भारत में हाथों-हाथ लिए जाएंगे. मुझे क्षमा करें, क्या यह जानबूझकर है?

    मैं आईएएस का सदस्य रहा हूं और हालांकि मैं खुद को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर लूं, फिर भी मुझे भारतीय प्रतिष्ठान के सदस्य के रूप में देखा जाएगा. मेरे पास अब छिपाने का कोई कारण नहीं है. मुझे वोट नहीं चाहिए. मुझे संरक्षण नहीं चाहिए. लेकिन ऐसी स्थिति में जहां आप केवल भारत के साथ हो सकते हैं या इसके खिलाफ हो सकते हैं, मैं अब जानबूझकर अस्पष्ट नहीं होना चाहता.

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    आपने विदेश में करियर के विकल्प की तलाश क्यों नहीं की? आप हार्वर्ड में एक कार्यक्रम में थे? आपने ऐसा क्यों नहीं किया?

    मैं हमेशा से अकादमिक जगत में जाना चाहता हूं. और मेरी प्राथमिक रुचि शिक्षण में है. यह आखिरी एक छलांग हो सकती है अगर मैं इसे कभी लगाता हूं. वर्तमान में यह थोड़ा मुश्किल लगता है.

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