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SC पर 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का कोई पछतावा नहीं, हो रहा है बदलाव: जस्टिस जोसेफ

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Updated: December 1, 2018, 1:50 PM IST
SC पर 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का कोई पछतावा नहीं, हो रहा है बदलाव: जस्टिस जोसेफ
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ हाल ही में रिटायर हुए हैं.

12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकूर, जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा पर सवाल उठाए थे.

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  • Last Updated: December 1, 2018, 1:50 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ हाल ही में रिटायर हुए हैं. शुक्रवार को उन्होंने शीर्ष अदालत में कामकाज को लेकर की गई चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बेबाकी से अपनी राय रखी. कुरियन ने कहा कि 12 जनवरी के विवादित प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कोई पछतावा नहीं है, जिसमें उन्होंने और तीन अन्य जजों ने शीर्ष अदालत के कामकाज को लेकर कई मुद्दे उठाए थे. हालांकि, कुरियन जोसेफ ने कहा कि अब चीजें बदल रही हैं. जस्टिस जोसेफ ने कहा कि शीर्ष अदालत की व्यवस्थाओं और परंपराओं में बदलाव आने में समय लगेगा, क्योंकि वे लंबे वक्त से मौजूद हैं.

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बता दें कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकूर, जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा पर सवाल उठाए थे. चारों जजों ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है और लोकतंत्र खतरे में है. चार जजों के इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस ने देश को हैरानी में डाल दिया था. इस पर काफी विवाद भी हुआ.

लेकिन, बीते दिन एक कार्यक्रम में जस्टिस कुरियन ने कहा, 'मुझे कोई पछतावा नहीं है. मैंने बहुत सोच समझकर ऐसा किया, क्योंकि कोई और रास्ता नहीं बचा था. मैं नहीं कह सकता कि संकट खत्म हो गया है. यह एक सांस्थानिक संकट था और सिस्मट को बदलने में समय लगता है. हालांकि, यह बदल रहा है और यह आगे भी जारी रहेगा.'

जस्टिस कुरियन ने कहा कि जहां तक शीर्ष अदालत की बात है, तो उच्चतर न्यायपालिका में नियुक्तियों और स्थानान्तरण से जुड़े ‘मैमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (एमओपी) अंतिम रूप में है. ये कॉलेजियम मसौदे के अनुसार काम कर रहा है.



यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, जस्टिस कुरियन ने कहा,‘मैं इस आम राय से सहमत नहीं हूं कि समाज में भ्रष्टाचार है, लेकिन मैं इस बात को मानता हूं कि लोगों में कुछ निचले स्तरों पर भ्रष्टाचार को लेकर कुछ नजरिया है.’

सुप्रीम कोर्ट में पूर्व जज ने कहा कि अगर पूर्व जजों को रिटायरमेंट के बाद सरकार कोई पद ‘उपकार स्वरूप’ यानी चैरिटी में देती है, तो उन्हें इसे स्वीकार नहीं करना चाहिए. जस्टिस कुरियन ने कहा, 'पूर्व जजों को रिटायरमेंट के बाद सिर्फ उस स्थिति में पद संभालना चाहिए, जब सरकार द्वारा उनसे न्यायाधिकरण की जिम्मेदारी संभालने के लिए ‘‘सम्मानपूर्वक आग्रह’’ किया जाए. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: December 1, 2018, 1:21 PM IST
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