लाइव टीवी

CAA और NRC पर शशि थरूर बोले- मैं नहीं कहूंगा जिन्ना जीत गए लेकिन वे जीत रहे हैं

News18Hindi
Updated: January 26, 2020, 6:55 PM IST
CAA और NRC पर शशि थरूर बोले- मैं नहीं कहूंगा जिन्ना जीत गए लेकिन वे जीत रहे हैं
शशि थरूर ने कहा है कि जिन्ना जहां भी होंगे कह रहे होंगे कि वे ठीक थे (फाइल फोटो, PTI Photo)

शशि थरूर ने कहा कि मुस्लिम लीग (Muslim League) द्वारा 1940 में अपने लाहौर अधिवेशन (Lahore Session) में इसे सामने रखने से पहले ही सावरकर दो-राष्ट्र के सिद्धांत (two-nation theory) की पैरोकारी कर चुके थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2020, 6:55 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) से जब उनके CAA को लागू किया जाना, जिन्ना के दो-राष्ट्र के सिद्धांत को पूरा किए जाने संबंधी बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहता कि जिन्ना की जीत हुई है लेकिन वे जीत रहे हैं.' इससे पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने शुक्रवार को कहा कि दक्षिणपंथी नेता वीर सावरकर ( VD Savarkar) ने ही सबसे पहले द्विराष्ट्र सिद्धांत (two-nation theory) सामने रखा था और उसके तीन साल बाद मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान प्रस्ताव पारित किया था. उन्होंने यह भी कहा कि विभाजन के समय सबसे बड़ा सवाल था कि क्या धर्म राष्ट्र की पहचान होना चाहिए.

थरूर ने जी जयपुर साहित्य उत्सव में कहा कि मुस्लिम लीग (Muslim League) द्वारा 1940 में अपने लाहौर अधिवेशन (Lahore Session) में इसे सामने रखने से पहले ही सावरकर इस सिद्धांत की पैरोकारी कर चुके थे.

जिन्ना ने कहा था, 'हिंदू कभी भी मुस्लिमों के प्रति न्यायपूर्ण नहीं हो सकेंगे'
अब शशि थरूर ने कहा है कि अगर CAA हमें NPR और NRC की ओर लेकर जाता है तो यह उसी रास्ते पर चलना होगा. अगर ऐसा होता है तो आप कह सकते हैं कि जिन्ना की जीत पूरी हुई. जिन्ना जहां भी हों, वो कह रहे होंगे वे ठीक थे कि मुस्लिमों का अलग देश होना चाहिए क्योंकि हिंदू कभी भी मुस्लिमों के प्रति न्याय नहीं कर पाएंगे.



सावरकर की परिभाषा में मुसलमान और ईसाई नहीं
थरूर ने कहा, 'सावरकर ने कहा कि हिंदू ऐसा व्यक्ति है जिसके लिए भारत पितृभूमि (पूर्वजों की जमीन), पुण्यभूमि है. इसलिए, उस परिभाषा से हिंदू (Hindu), सिख, बौद्ध और जैन दोनों श्रेणियों में समाते थे, मुसलमान और ईसाई नहीं.'

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व आंदोलन ने ‘संविधान को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया.' उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी पुस्तक ‘व्हाई एम आई ए हिंदू’ में सावरकर, एम एस गोलवलकर (MS Golwalkar) और दीन दयाल उपाध्याय का हवाला दिया है. ये ऐसे लोग थे जो मानते थे कि धर्म से ही राष्ट्रीयता तय होनी चाहिए.'

यह भी पढ़ें: पद्म भूषण PDP नेता बोले, 'J&K को पाक-अमेरिका ने भी माना भारत का अभिन्न अंग'

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 26, 2020, 6:03 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर