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IAC-1 विक्रांत ने बढ़ाई चीन की टेंशन, जानिए समंदर में तैरते एयरफील्ड की खासियत

विमान वाहक पोत विक्रांत. (तस्वीर- Narendra Modi Twitter)

विमान वाहक पोत विक्रांत. (तस्वीर- Narendra Modi Twitter)

IAC-1 Vikrant में 32 ट्यूब वाला 2 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम लगा है. ये एक एडवांस्ड मिसाइल फायरिंग सिस्टम है. इससे लंबी दूरी तक सतह से सतह तक मार करने वाली मिसाइल को दागा जा सकता है.

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कोच्चि. समुद्र में चीन (China) की दादागिरी पर लगाम लगाने और पाकिस्तान (Pakistan) के शैतानी मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए भारतीय नौसेना ने समुद्र में तैरता एक दमदार और खतरनाक एयरफील्ड तैयार कर किया है. भारत का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएसी विक्रांत तैयार है. अगले साल तक स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएसी विक्रांत (IAC-1 Vikrant) नौसेना (Indian Navy) में शामिल हो जाएगा. इस एयरक्राफ्ट से चीन को सबसे ज्यादा तकलीफ तो इस बात की है कि उसका 70 से 80 फीसदी एनर्जी ट्रेड भारतीय समुद्री सीमा से होकर गुजरता है. ऐसे में भारत जब चाहे उसे बाधित कर सकता है. वहीं पाकिस्तान से निपटने के लिए अरब सागर में भारतीय नौसेना का कैरियर बैटल ग्रुप तो तैनात है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर (India Ocean) के इलाके पर अपनी ताकत को बरकरार रखने के लिए जल्द ही एक और करियर बैटल ग्रुप तैनात होगा.

आईएसी-1 विक्रांत एयरक्राफ्ट करियर पानी पर तैरता एयरफील्ड है. लिहाजा ये लड़ाई लड़ने के लिए प्रमुखता से काम नहीं आता. इसके पास किसी दुश्मन पर हमला करने के लिए कोई बड़ी मिसाइल नहीं होती. हां ये दुश्मन के मिसाइल से खुद को बचाने के लिए क्लोज इन वेपन सिस्टम से लैस है, जोकि किसी भी शॉर्ट रेंज मिसाइल या दुश्मन के जंगी जहाज के बाहरी सुरक्षा कवच को तोड़कर एयरक्राफ्ट कैरियर की तरफ बढ़ रहा हो तो उसे ध्वस्त कर सकता है.

जानें IAC-1 विक्रांत की ताकत और खासियत
विक्रांत में 32 ट्यूब वाला 2 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम लगा है. ये एक एडवांस्ड मिसाइल फायरिंग सिस्टम है. इससे लंबी दूरी तक सतह से सतह तक मार करने वाली मिसाइल को दागा जा सकता है. इसकी रेंज आधे किलोमीटर से लेकर 150 किलोमीटर तक है. इसके अलावा यह चार ऑटोब्रेडा 76mm गन और 4 क्लोज इन वेपन सिस्टम से लेस होगा, ये सिस्टम किसी भी दुश्मन की मिसाइल को एयरक्राफ्ट पर हिट करने से पहले तबाह कर देगा. इस एयरक्राफ्ट करियर में 36 से 40 एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं.

इन फाइटर विमानों को किया जा सकता है तैनात
भारतीय नौसेना के पास फिलहाल मिग-29K ही ऐसे फाइटर विमान हैं, जोकि एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भर सकते हैं. हालांकि इस दौड़ में रूस का ही सुखोई-33, रफाल एम और अमेरिका का एफ-17 सुपर हॉर्नेट भी है, लेकिन फिलहाल भारत ने मिग 29K को ही चुना है, क्योंकि आईएनएस विक्रमादित्य पर भी मिग 29K ही तैनात है. इसके अलावा स्वदेशी तेजस के नेवी वर्जन को भी इसके लिये तैयार किया जा रहा है. हेलिकॉप्टरों की बात करें तो हाल ही में अमेरिका से लिया गया मल्टीरोल एंटी सबमरीन हेलिकॉप्टर MH-60R तैनात किया जाएगा. इस हेलिकॉप्टर से हवा से ही टारपीडो को लॉन्च किया जा सकता है. साथ ही कामोव हेलिकॉप्टर, सीकिंग और स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव को भी तैनात किया जा सकता है.

खतरे की आहट पर चंद सेकेंड में कुंलाचे भरेंगे फाइटर
भारतीय वायुसेना के बेस पर हर वक्त दो फाइटर हमेशा हथियारों से लैस तैयार रहते हैं. ऐसा ही नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ है. वैसे तो एक दो फाइटर हमेशा हवा में पेट्रोलिंग करते रहते हैं, लेकिन अगर दुश्मन के फाइटर विमान या मिसाइल एयरक्राफ्ट कैरियर की तरफ बढ़ते हैं तो महज कुछ ही सेकेंड में इस एयरक्राफ्ट कैरियर से फाइटर विमान उड़ान भर सकते हैं. महज 45 मिनट के भीतर एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात सभी फाइटर हवा में कुलांचे भरने लगेंगे.

चीन की रणनीति को समझिए
बता दें कि चीन के पास इस वक्त दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जोकि भारत के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर से बड़ा है. तीसरा अभी तैयार हो रहा है. वहीं चीन परमाणु ईंधन से चलने वाला सुपर कैरियर बनाने की तैयारी में है. चीन 2030 तक अपने प्लान के मुताबिक 5 से 6 एयरक्राफ्ट कैरियर अपनी नौसेना में शामिल करना चाहता है. सिंतबर 2012 में चीन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को Liaoning नाम दिया था और उसे चीनी नौसेना में शामिल कर लिया था. 4 साल बाद 2016 में लिआओनिंग युद्ध ऑपरेशन के लिए तैयार हो गया. दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर Shandong Type-2 जो कि चीन का पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है, उसे 2013 में बनाना शुरू किया गया था और 2019 में कमीशन कर दिया गया.

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम से लैस
ये एयरक्राफ्ट कैरियर 70 हजार टन वजनी है और स्काई जंप कैरियर है. इसका मतलब ये है कि इसका रनवे का रैंप 12 डिग्री के एलिवेशन पर है, जिसकी वजह से विमान को टेकऑफ लेने के लिए लंबा रनवे नहीं चाहिए होता. तीसरे कैरियर को चीन ने अभी नाम नहीं दिया है, लेकिन उसे Type-003 के नाम से जाना जाता है. ये लिआओनिंग और शैंनडॉग के डिजाइन से बिल्कुल अलग है. ये चीन के अब तक के फ्लीट से सबसे बड़ा है और 85 हजार टन वजनी है. साथ ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम से लैस है. इस सिस्टम में एयरक्राफ्ट को कैटापुल्ट के जरिए कम से कम जगह से टेकऑफ कराया जा सकता है.

भारत सहित चार देशों ने चीन को चेताया
सबसे पहले अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर Gerald R Ford class aircraft carrier को 2017 में बनाना शुरू किया था. चीन अपने चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर भी तेजी से काम कर रहा है. ये कैरियर टाइप-003 से भी बड़ा और वजनी होगा. रिपोर्ट के मुताबिक इसका वजन 1 लाख 10 हजार टन होगा. इस कैरियर में 70 से 100 फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर रखे जाने की जगह होगी. ये चीन का पहला न्यूक्लिअर प्रोपल्शन एयरक्राफ्ट कैरियर होगा. हालांकि चीन जिस तरह से समुद्र में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन का बेजा इस्तेमाल कर रहा है, उसे लेकर भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने क्वाड बनाकर चीन को चेताया है.

भारत को चाहिए 3 एयरक्राफ्ट कैरियर
वर्तमान परिस्थितियों में भारत को कम से कम तीन एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है. फिलहाल भारतीय नौसेना के पास एक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रामादित्य है जोकि 2014 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और ये पश्चिमी समुद्र तट पर कारवार में तैनात हैं, जबकि भारत को एक और एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है, जिसे पूर्वी समुद्र तट पर विशाखापट्टनम में रखा जा सके. तीसरा कैरियर इसलिए भी जरूरी है कि जब भी एक कैरियर रिपेयर के लिए जाता है तो कम से कम दो एयरक्राफ्ट कैरियर अपनी सेवाएं दे रहे हों.

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