हफ्ते भर बाद मिला AN-32 का मलबा, पहले भी लापता हो चुके हैं कई विमान

इस विमान ने 3 जून असम के जोरहाट दोपहर साढ़े 12 बजे उड़ान भरी थी और उसके आधे घंटे बाद ही करीब 1 बजे ये रडार से गायब हो गया था. विमान में 8 चालक दल के समेत 13 लोग सवार थे.

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Updated: June 11, 2019, 6:38 PM IST
हफ्ते भर बाद मिला AN-32 का मलबा, पहले भी लापता हो चुके हैं कई विमान
IAF AN-32 विमान ने 3 जून असम के जोरहाट दोपहर साढ़े 12 बजे उड़ान भरी थी और उसके आधे घंटे बाद ही करीब 1 बजे ये रडार से गायब हो गया था. (फाइल फोटो)
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Updated: June 11, 2019, 6:38 PM IST
असम के जोरहाट हवाई अड्डे से सोमवार को उड़ान भरने वाले AN-32 विमान के टुकड़े मिले हैं. समाचार एजेंसी ANI के अनुसार विमान के कुछ हिस्सों का मलबा अरुणाचल प्रदेश के लीपो शहर में मिला है. ये जगह विमान के उड़ान वाली जगह से 15-20 किलोमीटर उत्तर में है. बता दें विमान का ये मलबा जमीन से 12 हजार फुट की ऊंचाई पर मिला है. विमान के बाकी हिस्सों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है. इस विमान ने 3 जून असम के जोरहाट दोपहर साढ़े 12 बजे उड़ान भरी थी और उसके आधे घंटे बाद ही करीब 1 बजे ये रडार से गायब हो गया था. विमान में 8 चालक दल के समेत 13 लोग सवार थे.

पहले भी क्रैश हो चुके हैं कई  AN-32 विमान
लेकिन ये पहली बार नहीं है कि जब भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान क्रैश हुआ हो. इससे पहले कई विमान लापता हो चुके हैं. अब तक कितने AN-32 विमान हुए हैं क्रैश

- तीन साल पहले भी ऐसे ही एक AN-32 विमान लापता हुआ था जिसका अभी तक मलबा भी नहीं मिल पाया है. अभी तक नौ AN-32 विमान क्रैश हो चुके हैं.

-22 मार्च 1986 को जम्मू में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-25 मार्च 1986 को अरब सागर में दुर्घटना.

-1991-92 में केरल में दुर्घटना का शिकार हुआ.
-26 मार्च 1992 को असम में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-एक अप्रैल 1992 को पंजाब में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-सात मार्च 1999 को दिल्ली में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-नौ जून 2009 को अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-20 सितंबर 2014 को चंडीगढ़ में दुर्घटना का शिकार हुआ.

-22 जुलाई 2016 को बंगाल की खाड़ी में गायब हो गया.

क्या है AN-32 विमान की खासियत
AN-32 रूस में निर्मित वायुयान है और वायुसेना बड़ी संख्या में इन विमानों का इस्तेमाल करती है. यह दो इंजन वाला ट्रर्बोप्रॉप परिवहन विमान है. मेन्चुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड चीन की सीमा से ज्यादा दूर नहीं है. मेन्चुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड, जहां विमान को उतरना था, को पिछले साल 12 जुलाई को दोबारा शुरू किया गया है. 2013 से ये बंद था.

यह विमान 1984 में सोवियत रूस से खरीदा गया था. जिस समय इसे खरीदा गया था तब विमान की उम्र 25 साल थी. लेकिन समय और ज़रूरत के हिसाब से इस विमान को अपग्रेड किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना के पास करीब 100 AN-32 विमान हैं. यह दो इंजन वाला मालवाहक विमान है जो कि पैरा जंप के काम भी आता है. इसकी अधिकतम स्पीड 530 किमी प्रति घंटा है.

कौन-कौन सी टीमें कर रही हैं खोज
गौरतलब है कि इस विमान को ढूंढने के लिए कई टीमें काम क रही थीं. इसके लिए नौसेना, इसरो की भी मदद ली जा रही थी. इस विमान को ढूंढने के लिए भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, पुलिस और राज्य प्रशासन की मदद ली जा रही है. वहीं जमीन पर मौजूद टीमों और हवाई सेंसरों के जरिए भी रातों में इसकी खोज कर रही हैं.

इसके अलावा रात में दो SU और सी-130J रात में ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं. इतना ही नहीं लापता विमान को ढूंढने के लिए इसरो की सैटेलाइट की मदद ली जा रही है. विमान को ढूंढने के मिशन में भारतीय नौसेना के लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रीकानसन्स एयरक्राफ्ट्स P8i और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैटेलाइट को भी लगाया गया है. वायु सेना ने लापता अंतोनोव AN-32 विमान का पता लगाने के लिए दो MI-17 हेलीकॉप्टरों के साथ ही C-130J और AN-32 विमानों को लगाया है, वहीं भारतीय सेना ने आधुनिक हल्के हेलीकॉप्टरों को लगाया है.

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