38 साल की देश की सेवा, 3 बार पेश किए दस्तावेज़ तब भी NRC से नाम गायब

News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 10:25 PM IST
38 साल की देश की सेवा, 3 बार पेश किए दस्तावेज़ तब भी NRC से नाम गायब
असम (Assam) में शनिवार को एनआरसी (NRC) की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के एक पूर्व कर्मी का नाम लिस्ट में शामिल नहीं है. हालांकि उनके पूरे परिवार का इस सूची में नाम शामिल है.

असम (Assam) में शनिवार को एनआरसी (NRC) की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के एक पूर्व कर्मी का नाम लिस्ट में शामिल नहीं है. हालांकि उनके पूरे परिवार का इस सूची में नाम शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2019, 10:25 PM IST
  • Share this:
(करिश्मा हसनत)
असम (Assam) में शनिवार को एनआरसी (NRC) की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के एक पूर्व कर्मी का नाम लिस्ट में शामिल नहीं है. हालांकि उनके पूरे परिवार का इस सूची में नाम शामिल है. सम्मानित रिटायर्ड फ्लाइट लेफ्टिनेंट छबिंद्र सरमा असम के बिस्वनाथ चरियाली के रहने वाले हैं और उनका इस लिस्ट में नाम नहीं है. इस सूची में उनके माता-पिता और बच्चों का नाम शामिल है.

बता दें, एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद 19 लाख से ज्यादा लोगों का नाम इस सूची से बाहर हो गया है. 57 साल के पूर्व सैन्यकर्मी सरमा को विश्वास नहीं हो रहा कि आखिर कैसे वह सिटिज़नशिप टेस्ट में फेल हो गए. उनका कहना है कि यह मेरे लिए दुर्भाग्य की बात है.

38 साल की देशसेवा

भारतीय वायुसेना में अपनी 38 साल की सेवा पर गर्व करते हुए सरमा ने कहा कि उन्हें न तो किसी व्यक्ति से या न ही उस प्रणाली से कोई शिकायत है जिसके तहत वह तीन बार एनआरसी की सुनवाई में शामिल होने के बाद भी वह सूची से बाहर हो गए.

सरमा ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि वे मेरा नाम स्पष्ट करें. मुझे किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. मैं मूल रूप से भारतीय हूं, भारतीय पैदा हुआ. मैं भारतीय वायु सेना के साथ अपना समय हमेशा याद रखूंगा - मैंने एक एयरमैन के रूप में देशसेवा की, यह एक बहुत ही प्रतिष्ठित सेवा थी.

मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में हुए रिटायर
Loading...

सरमा को 15 अगस्त, 2017 को उड़ान अधिकारी की मानद रैंक दी गई और वह 28 फरवरी 2018 को मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में सेवानिवृत्त हुए. सरमा का नाम 31 दिसंबर, 2017 की मध्यरात्रि को प्रकाशित हुए NRC ड्राफ्ट से गायब था. इसके बाद 30 जुलाई 2018 को जारी हुए कम्पलीट ड्राफ्ट में भी उनका नाम नहीं था.

अब लेंगे कानूनी सहारा
सरमा ने कहा, 'मैंने अपने पिता की 1951 की विरासत का डेटा, मेरा मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, सेवा पहचान पत्र - मेरी नागरिकता स्थापित करने के लिए आवश्यक सब कुछ प्रस्तुत किया था. जब मेरा नाम पहले ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था. NRC अधिकारियों ने कहा कि मेरा लिंकेज स्थापित नहीं किया गया था. ये कैसे संभव है? मैं अपने पिता से जुड़ा हुआ हूं जो 97 साल के हैं, मेरे बच्चे मुझसे जुड़े हुए हैं. हम सभी ने एक ही विरासत डेटा का इस्तेमाल किया. सरमा ने कहा, वह अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कानूनी सहारा लेंगे.'

यह मानते हुए कि यह हजारों कर्मचारियों और टेक्नोलॉजी के लिए ये एक विस्तृत अपडेटिंग अभ्यास था. इसमें 3.3 करोड़ लोगों द्वारा प्रस्तुत किए गए 6 करोड़ दस्तावेजों की जांच की गई थी. इसे इस तरह समझें कि अगर इस प्रक्रिया में सिर्फ 0.5% की भी गलती रह जाती है तो करीब 1.65 लाख लोग NRC से बाहर हो जाएंगे.  सरमा सवाल करते हैं कि कोई भी बार-बार गलतियां कैसे कर सकता है. 'यह विश्वास करना मुश्किल है कि वे क्लेरिकल एरर कैसे कर सकते हैं - एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार.

देश के कई हिस्सों में हुई पोस्टिंग
फिर भी, वह अपने परिवार के सदस्यों के लिए खुश हैं, जिनके नाम इस सूची में शामिल हैं. सरमा की बेटी मैसूर इन्फोसिस में बतौर इंजीनियर काम करती है. वहीं उनका बेटा गोवा में एक लक्जरी होटल में काम कर रहा है. सरमा ने भारत भर में कई स्थानों पर सेवा की है - असम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और राजस्थान में अन्य स्थानों पर पोस्टिंग के साथ. कारगिल युद्ध के दौरान, वह तेजपुर वायु सेना अड्डे पर काम कर रहे थे.

ये भी पढ़ें-
ममता बनर्जी का दावा- 1 लाख से अधिक गोरखा NRC के बाहर

हिमंत सरमा बोले- 14 लाख से ज्यादा अवैध प्रवासियों का पता चला

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 1, 2019, 11:32 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...