IAS अधिकारी ने दिया इस्तीफा, कहा- पाबंदियों से नहीं मानेंगे कश्मीरी

भाषा
Updated: August 25, 2019, 11:50 PM IST
IAS अधिकारी ने दिया इस्तीफा, कहा- पाबंदियों से नहीं मानेंगे कश्मीरी
कश्मीर (Kashmir) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के खिलाफ अपने विचार प्रकट करने के लिये कन्नन ने नौकरी से इस्तीफे का दावा किया है.

कश्मीर (Kashmir) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के खिलाफ अपने विचार प्रकट करने के लिये कन्नन ने नौकरी से इस्तीफे का दावा किया है.

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पूर्व आईएएस अफसर कन्नन गोपीनाथ ने रविवार को कहा कि घाटी के लोगों को अनुच्छेद 370 (Article 370) को लेकर मनाया जाना चाहिये, लेकिन उन्हें विचार प्रकट करने का मौका न दिए जाने से ऐसा नहीं हो सका. कश्मीर (Kashmir) में "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन" के खिलाफ अपने विचार प्रकट करने के लिये कन्नन ने नौकरी से इस्तीफे का दावा किया है.

2012 बैच के अधिकारी गोपीनाथन (32) उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2018 में केरल (Kerala) में आई बाढ़ के दौरान अपनी पहचान छिपाकर स्वयंसेवकों के साथ राहत और बचाव कार्यों में हिस्सा लिया था. संघ शासित प्रदेशों दमन और दीव (Daman & Div) तथा दादरा एवं नागर हवेली (Dadra & Nagar Haveli) के ऊर्जा विभाग में सचिव रहे गोपीनाथन ने पिछले बुधवार को इस्तीफा दे दिया था. उनके त्यागपत्र में कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) का कोई जिक्र नहीं था.

गोपीनाथन ने रविवार को कहा, "मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहता हूं लेकिन सेवा में रहते मेरे लिये ऐसा करना नामुमकिन था. इसमें कई नियम-कायदे होते हैं."

लोकतंत्र में लोगों को प्रतिक्रिया देने का अधिकार

केरल के कोट्टायम (Kottayam) जिले के निवासी गोपीनाथन ने कहा कि अनुच्छेद 370 का निरसन "चुनी हुई सरकार का अधिकार है" लेकिन लोकतंत्र में लोगों को ऐसे फैसलों पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार है.

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, "कश्मीर (Kashmir) पर फैसला लिये जाने के करीब 20 दिन बाद भी वहां लोगों को इस पर प्रतिक्रिया देने की अनुमति नहीं है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वीकार्य नहीं है. निजी तौर पर, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सका साथ ही ऐसे समय में अपनी सेवाएं भी जारी नहीं रख सकता था."

उन्होंने कहा, "यह ऐसी चीज नहीं है जिसे मैं अपने देश में स्वीकार कर सकूं. मुझे पता है कि मेरी स्वीकृति से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मैं यह जाहिर करना चाहता था कि यह सही नहीं है. हमें उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति देनी चाहिए. अगर उन्हें यह पसंद नहीं है तो हम उन्हें समझाने की कोशिश कर सकते हैं. हम उन्हें बंद करके और और विचार व्यक्त करने से रोककर नहीं मना सकते."
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First published: August 25, 2019, 11:32 PM IST
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