ICMR प्रमुख ने कहा - कोविड से होने वाली मौतों में पॉल्यूशन का भी योगदान

दिल्ली में तेजी से बढ़ रहा है एयर पॉल्युशन.  (File Photo)
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहा है एयर पॉल्युशन. (File Photo)

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक बलराम भार्गव ने प्रदूषण को भी कोविड से होने वाली मौतों का जिम्मेदार बताया है. उन्होंने इसके लिए अमेरिका और यूरोप में हुई स्टडीज का हवाला दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 4:55 PM IST
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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के लोग पहले ही खराब हवा की परेशानी से जूझ रहे हैं. ऐसे में यह खबर दिल्लीवासियों को और परेशान करने वाली है. इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च (Indian Council Medical Research) के महानिदेशक बलराम भार्गव (DG Balram Bhargava) ने बताया कि कोविड के कारण हो रही मौतों में प्रदूषण भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने (Stubble Burning) और दूसरे कई कारणों से दिल्ली में हवा बेहद खराब हो चुकी है.

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बलराम भार्गव ने यूरोप और अमेरिका में हुई स्टडीज का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि इन स्टडीज में शोधकर्ताओं ने प्रदूषित इलाकों पर ध्यान दिया और डेटा की तुलना लॉकडाउन के दौरान मृत्युदर से की. उन्होंने पाया कि कोविड के कारण हो रही मौतों के लिए प्रदूषण भी एक कारण है.

दिल्ली के कुछ इलाकों हवा की हालत 'बेहद खराब'
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (Central Pollution Control Board (CPCB)) के डेटा के मुताबिक, आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 377 है, जो कि बहुत ही खराब स्तर माना जाता है. इसके अलावा दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (Delhi Pollution Control Committee(DPCC)) का डेटा बताता है कि रोहिणी में एयर क्वालिटी इंडेक्स 346, आरके पुरम में 329, मुंडका में 363 है. इन सभी इलाकों में हवा की स्थिति 'बेहद खराब' है.




केवल पराली ही नहीं है दिल्ली में प्रदूषण का कारण
दिल्ली में बढ़ते हवा प्रदूषण के कारण सभी का ध्यान पंजाब और हरियाणा में सामने आ रहे पराली जलाने के मामलों की ओर गया है. हालांकि, डेटा बताता है कि दिल्ली में हवा खराब होने का प्रमुख कारण पराली नहीं है. पराली जलाने के मामले में सबसे आगे पंजाब में हवा की क्वालिटी सामान्य थी. मॉनिटरिंग एजेंसी सफर के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी केवल 16 प्रतिशत थी.

इसके अलावा बीते वर्ष मार्च में प्रकाशित काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक स्टडी में गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन को पॉल्यूशन के सबसे बड़े कारणों में रखा था. गाड़ियों से निकलने वाले धुएं ने दिल्ली में पॉल्यूटेंट्स में पीएम 2.5 की हिस्सेदारी निभाई थी.

दिल्ली में मामले 4 लाख के करीब
देश में बढ़ रहे कोरोना के मामले में सितंबर के तीसरे हफ्ते के बाद नए मामलों में कमी आई है. दिल्ली में संक्रमण के कुल 3,59,488 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 3,27,390 मरीज ठीक हो चुके हैं. यहां अब तक कुल 6312 मौतें हो चुकी हैं. वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, भारत में मंगलवार सुबह तक मौतों का आंकड़ा 1,19,535 था. जबकि, कुल संक्रमितों की संख्या 79,46,429 पर पहुंच गई थी.
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