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कोवैक्सीन की बिक्री पर ICMR को मिलेगी 5 फीसदी रॉयल्टी, जानिए अब क्यों उठे सवाल

कोवैक्सीन को ICMR और भारत बायोटेक ने मिलकर विकसित किया है. (फाइल फोटो)

कोवैक्सीन को ICMR और भारत बायोटेक ने मिलकर विकसित किया है. (फाइल फोटो)

Coronavirus Vaccine Covaxin: 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद से अभी तक देश में कुल 45 करोड़ से ज्यादा टीकाकरण हुआ है. लेकिन, कोवैक्सीन की सिर्फ 5 करोड़ से कुछ ज्यादा खुराक ही इस्तेमाल की गई हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस वैक्सीन कोवैक्सीन (Coronavirus Vaccine Covaxin) की कुल बिक्री पर भारत बायोटेक (Bharat Biotech) को 5 फीसदी रॉयल्टी का भुगतान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) को करना होगा. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोवैक्सीन (Covaxin) का उपयोग बौद्धिक संपदा के तहत नियंत्रित है. इस वैक्सीन को भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने साझा तौर पर विकसित किया है. यही वजह है कि आईसीएमआर को रॉयल्टी का भुगतान किया जाना है.

    द हिंदू को भेजे गए एक ईमेल जवाब में आईसीएमआर (ICMR) के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने लिखा है, “पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को आईसीएमआर और भारत बायोटेक के बीच एक औपचारिक समझौते के तहत अंजाम दिया गया है. इसमें कुल बिक्री पर आईसीएमआर के लिए रॉयल्टी का एक प्रावधान भी है. साथ ही देश में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई को लेकर अन्य प्रावधान भी हैं. इसके साथ ही प्रोडक्ट की आईपी भी साझा की गई है. इस बात पर भी सहमति है कि आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी का नाम वैक्सीन के बॉक्स पर प्रिंट किया जाएगा, जैसा कि अभी हो रहा है.”

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीएमआर और भारत बायोटेक के बीच भुगतान को लेकर हुए समझौते ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इसमें एक यह कि भुगतान छमाही आधार पर किया जाना है और भुगतान की गणना भी छमाही आधार पर होगी. ये भुगतान वैक्सीन की लागत में जोड़ा जाएगा और इससे वैक्सीन की कीमत पर असर पड़ेगा. जूनियर हेल्थ मिनिस्टर भारती प्रवीण पवार ने संसद को बताया कि रॉयल्टी का प्रावधान आईसीएमआर और भारत बायोटेक के बीच हुए एमओयू से संचालित होगा, जोकि कोवैक्सीन के विकास के लिए किया गया था.

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद से अभी तक देश में कुल 45 करोड़ से ज्यादा टीकाकरण हुआ है. लेकिन, कोवैक्सीन की सिर्फ 5 करोड़ से कुछ ज्यादा खुराक ही इस्तेमाल की गई हैं. केंद्र सरकार ने कोवैक्सीन के प्री-क्लिनिकल अध्ययन में भी पैसा लगाया था और फिर क्लिनिकल ट्रायल में 35 करोड़ रुपये खर्च किये गये. केंद्र सरकार ने मई में इस बारे में हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी थी.

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    पूरे मसले पर टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में वकील मुरली नीलकांत ने कहा, “केंद्र सरकार को भारत बायोटेक द्वारा किए गए निवेश को भी सत्यापित करना चाहिए. अगर 35 करोड़ के निवेश पर आईसीएमआर को 5 फीसदी की रॉयल्टी मिलती है तो क्या सरकार यह सत्यापित कर सकती है कि भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के विकास में 650 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है?”

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