नक्सलबाड़ी में गिर रही ममता की साख, फायदा उठाने में जुटी बीजेपी

पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में तृणमूल कांग्रेस के पतन का बड़ा कारण है पार्टी का वैचारिक पतन. स्थानीय लोगों का कहना है कि टीएमसी ने जिस आधिपत्य को चुनौती दी और लेफ्ट को उखाड़ फेंका, अब वही हाल उनके साथ भी होगा. आज माहौल टीएमसी के खिलाफ है.


Updated: April 15, 2019, 1:35 PM IST
नक्सलबाड़ी में गिर रही ममता की साख, फायदा उठाने में जुटी बीजेपी
नक्सलबाड़ी में ब्रांड ममता बनर्जी की घट रही है अहमियत.

Updated: April 15, 2019, 1:35 PM IST
किशोर अवस्था का शिबा महाली (10) खुश है कि वह और उसके माता-पिता नए घर में रहने आ गए हैं. उसे फर्क नहीं पड़ता कि उसके माता-पिता नक्सलबाड़ी के सबसे चर्चित लोगों में हैं और उनके नाम पर नक्सलबाड़ी में सियासी बहस शुरू हो जाती है. उसे तो बस अपने पुराने घर से बेहतर मकान में रहने की खुशी है. इस सब की शुरुआत उनके पुराने घर से तब हुई थी, जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनके घर आए थे.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शिबा के दक्षिण कोटियाजोत वाले घर पहुंचे थे, जहां उसके माता-पिता राजू और गीता ने उनका स्वागत किया था. न तो शाह का नक्सलबाड़ी से भाजपा के लिए प्रचार अभियान शुरू करना संयोग था और न ही इसमें कोई सच्चाई थी कि शिबा के माता-पिता ने टीएमसी में शामिल होने के लिए बीजेपी छोड़ दी थी. बाद में पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री गौतम देब ने उन्हें ममता बनर्जी आवास योजना के तहत बने घर की चाभी सौंपी.

करीब 50 साल पहले उत्तरी बंगाल में हुई सियासी उठापटक और बदले हालात ने पूरे देश की राजनीति पर असर डाला, जो आज तक जारी है. यह बदलाव बार-बार नक्सली हिंसा के तौर पर सामने आता रहता है. बाकी नक्सलबाड़ी की ही तरह दक्षिण कोटियाजोत में आजकल नई तरह की वैचारिक जंग छिड़ी हुई है. हालांकि, दशकों पुराने मुद्दे भी जिंदा हैं. क्षेत्र में सामाजिक अन्याय के कारण लोग गरीबी के दलदल में धंसते चले जा रहे हैं. बस आज सबसे बड़ा फर्क यही है कि बदलाव और क्रांति का वादा वामदल के बजाय दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग कर रहे हैं.

शिबा महाली और उसकी चाची अंजलि.


राजू और गीता राजनीति पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते हैं. हालांकि, शिबा की चाची अंजलि का कहना है कि हम राजनीति के बारे में क्या बात करें. हम तो सीधी-सादी जिंदगी जीना चाहते हैं. शाह के दौरे के बाद महाली परिवार चुनावी सियासत में घिर गया है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में नक्सलबाड़ी की रणनीतिक अहमियत है, लेकिन दोनों ही दल के नेताओं का कहना है कि क्षेत्र की अहमियत शब्दों में नहीं बताई जा सकती. एक भाजपा नेता का कहना है कि इस क्षेत्र की अहमियत पौराणिक है.

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किसानों ने जोतदारों के खिलाफ किया विद्रोह
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नक्सलबाड़ी की कहानी भी बाकी किस्सों की तरह रक्तरंजित है. चारू मजमूदार, कानु सान्याल और जनगल संथाल के नेतृत्व में किसानों ने जोतदारों के खिलाफ विद्रोह कर दिया. कब्जा कर जमीनों को फिर से बांटा गया. बहीखाते आग के हवाले कर दिए गए. किसानों पर लादे गए कर्ज खत्म कर दिए गए और जोतदारों को मौत की सजा सुनाई गई. इसी दौरान एक मुठभेड़ में पुलिस इंस्पेक्टर सोनम वांगड़ी शहीद हो गए. इसके बाद 25 मई को पुलिस ने प्रसादजोत के ग्रामीणों पर गोलियां बरसाईं, जिसमें दो बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हो गई. चीन के दैनिक समाचारपत्र जेन-मिन जिन-पाओ ने विद्रोह के पक्ष में लिखा, 'भारत की जमीन पर क्रांति का बादल फटा है.' तब शुरू हुआ तूफान आज तक नहीं थमा है.

भूमाफिया ने किसानों को नहीं दिया विकल्प
नक्सलबाड़ी में एनएच-31 पर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले रामकुमार राय अकसर पुराने दिनों के किस्से सुनाने लगते हैं. वह कहते हैं कि टीएमसी ने जिस आधिपत्य को चुनौती दी और उखाड़ फेंका, अब वही उनके साथ भी होगा. आज हर तरफ टीएमसी के खिलाफ माहौल है. उन्होंने बताया कि एनएच-31 पर काम शुरू होने के साथ ही जमीनों की कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़ गई थीं. अब वास्तविक कीमत से 60 फीसदी तक उछाल आ गया है. ज्यादातर किसानों ने बाजार भाव से कम पर जमीनें बेची हैं. भूमाफिया ने कोई विकल्प ही नहीं दिया.

भूमाफिया के नेटवर्क में शामिल हैं टीएमसी नेता
पुलिस ने अगस्त, 2018 में टीएमसी नेता जयप्रकाश सिंह चौहान को पीडब्ल्यूडी की तीन एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि भूमाफिया के इस नेटवर्क में करीब 70 लोग शामिल है. इनमें कई टीएमसी नेता हैं. ये लोग अकसर किसानों से जबरन जमीन हथिया लेते हैं. इससे पहले जुलाई, 2018 में राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने प्रशासनिक समीक्षा बैठक में पुलिस को भूमाफिया पर त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया था.

वामदलों की तरह माफिया बन चुकी है टीएमसी
नक्सलबाड़ी के लोगों का कहना है कि जमीनों पर कब्जा महज शुरुआत थी. आज टीएमसी वामदलों की तरह माफिया बन चुकी है. आपात स्थिति में वे आपकी मद करेंगे, लेकिन इसके बाद वे आपको लूटेंगे और वसूली करेंगे. किसान सुरेश महाली का कहना कि बस टीएमसी के लोग लूटने से पहले हमसे 'लाल सलाम' नहीं कहते. बीजेपी टीएमसी और वामदलों से हुए नक्सलबाड़ी के लोगों के इसी मोहभंग को भुनाने की कोशिश में जुट गई है.

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माधव भवन से पूर्वोत्तर में पैठ बढ़ा रहा आरएसएस
2014 से पहले बहुत कम लोग जानते थे कि सिलिगुड़ी के हाकिमपाड़ा में बना माधव भवन उत्तरी बंगाल में मालदा से गंगटोक तक आरएसएस की पैठ बढ़ाने का केंद्र है. इमारत के सामने भारत माता की विशालकाय प्रतिमा है. इसके नीचे लिखा है, हिमालय और हिंद महासागर के बीच की पावन भूमि को हिंदुस्तान कहते हैं. क्षेत्र में संघ के बढ़ने के साथ इमारत भी बड़ी होती गई. संघ प्रमुख मोहन भागवत दिसंबर तें यहां आकर ठहरते हैं. संघ की पूरी रणनीति आदिवासी बच्चों के लिए राष्ट्रवादी स्कूल शुरू करने और चाय के बागानों में पहुंच बढ़ाने के इर्दगिर्द घूमती है. संघ का शारदा शिशु मंदिर क्षेत्र का सबसे बड़ा स्कूल चलाता है. यह छह बीघे से ज्यादा क्षेत्र में फैला है.

अभिजीत मजूमदार के मुताबिक, वैचारिक पतन के कारण वामदलों की दुगर्ति हुई.


ममता से पहले धर्म के आधार पर नहीं लड़े जाते थे चुनाव: अभिजीत
चारू मजूमदार के बेटे और सीपीआई-एमएल (लिबरेशन) के दार्जिलिंग के सचिव अभिजीत मजूमदार का कहना है कि आरएसएस देश के किसी भी दूसरे राज्य के मुकाबले बंगाल में आसानी से पैठ बना सकता है. उनके मुताबिक, ममता बनर्जी से पहले राज्य में विचारधारा के आधार पर चुनाव लड़े जाते थे, न कि धर्म के आधार पर.

अभिजीत के मुताबिक, वैचारिक पतन के कारण ही सूबे में वामदलों की दुगर्ति हुई. हालांकि, राज्य में वामदल का नेतृत्व भ्रष्ट नहीं था, लेकिन इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना बड़ी गलती थी. वामदलों से लोगों का भरोसा खत्म होने लगा. नेताओं के सामाजिक व्यवहार पर नजर रखी जाने लगी, उनके परिवारों की गतिविधियां सार्वजनिक होने लगीं. इसके बाद सिंगुर मामले ने वामदलों के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया. बीजेपी वामदलों के छोड़े गए इसी खालीपन को भरने की उम्मीद में है.

मोदी के कारण भाजपा के बारे में जान पाए
सिलिगुड़ी के बाहरी इलाके में एक बड़ा मॉल खड़ा हो चुका है, जो नक्सलबाड़ी से ज्यादा दूर नहीं है. मॉल की ज्यादातर दुकाने बंद हैं. हालांकि, कुछ दुकानों के साथ फूड कोर्ट में अच्छी भीड़ दिख जाती है. स्थानीय संदीप महतो ने बताया कि मॉल की जगह पर चाय का बागान था. संदीप फिलहाल ई-रिक्शा चलाते हैं. उनका कहना है कि वह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण भाजपा के बारे में जान पाए.

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