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सरदार पटेल ने कार्रवाई न की होती तो हैदराबाद-जूनागढ़ जाने को वीजा लेना पड़ता: रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी.

दोनों रियासतों (वर्तमान में गुजरात और तेलंगाना) ने देश की स्वतंत्रता के समय भारत में विलय से इनकार कर दिया था. इसके बाद सरदार पटेल ने दोनों रियासतों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया था.

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    गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शुक्रवार को कहा कि अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पूर्व नवाब शासित रियासतों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न की होती तो भारतीयों को जूनागढ़ और हैदराबाद जाने के लिए वीजा लेना पड़ता. वह बीजेपी की एकता यात्रा के तहत वड़ोदरा के बाहरी इलाके छानी में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. यह यात्रा अब तक पांच हजार गांवों से गुजर चुकी है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 अक्टूबर को होने गुजरात का दौरा करेंगे. इसके पहले रूपाणी द्वारा 19 अक्टूबर को हरी झंडी दिखाकर शुरू की गई एकता यात्रा का उद्देश्य देश की एकता में पटेल के योगदान के बारे में लोगों को जागरूक करना है. मोदी 31 अक्टूबर को सरदार पटेल को समर्पित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करेंगे.

    रूपाणी ने कहा, ‘यह सरदार वल्लभ भाई पटेल के कठोर रुख की वजह से था कि नवाबों के शासन वाली ये दोनों रियासतें (जूनागढ़ और हैदराबाद) भारत का हिस्सा बनीं, नहीं तो हमें इन दोनों जगहों पर जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती.’

    दोनों रियासतों (वर्तमान में गुजरात और तेलंगाना) ने देश की स्वतंत्रता के समय भारत में विलय से इनकार कर दिया था. इसके बाद सरदार पटेल ने दोनों रियासतों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया था. रूपाणी ने कहा कि अगर सरदार पटेल को छूट मिली होती, तो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का कोई मुद्दा नहीं होता.

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी ने 182 मीटर लंबी प्रतिमा का निर्माण कराकर आधुनिक भारत के शिल्पी सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी है. यह प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बताई जाती है. रूपाणी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकारों ने केवल एक ही परिवार के इतिहास को बढ़ावा दिया और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान की अनदेखी की.

    मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा, ‘उन्होंने (कांग्रेस नीत सरकारों) महात्मा गांधी के इतिहास की अनदेखी की...यहां तक कि उन्होंने वर्षों तक संसद में सरदार पटेल की तस्वीर तक नहीं लगाई. वीर सावरकर, डॉ भीमराव आंबेडकर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का कभी उल्लेख नहीं किया गया.’

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