तालिबान से बात हो सकती है तो कश्मीर के संगठनों से क्यों नहीं: उमर अब्दुल्लाह

नेशनल कॉफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने रूस में भारत और तालिबान में होने वाली गैर आधिकारिक स्तर की बातचीत पर मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला किया


Updated: November 9, 2018, 3:26 PM IST
तालिबान से बात हो सकती है तो कश्मीर के संगठनों से क्यों नहीं: उमर अब्दुल्लाह
उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो- getty images)

Updated: November 9, 2018, 3:26 PM IST
नेशनल कॉफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने रूस में भारत और तालिबान में होने वाली गैर आधिकारिक स्तर की बातचीत पर मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला किया. उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट पर लिखा कि अगर मोदी सरकार को तालिबान के साथ ग़ैर आधिकारिक स्तर पर बातचीत मंज़ूर है तो जम्मू कश्मीर में मुख्य धारा से अलग संगठनों से ग़ैर आधिकारिक बातचीत मंज़ूर क्यों नहीं है? जम्मू कश्मीर की छीनी हुई स्वायतत्ता और उसकी बहाली पर ग़ैर आधिकारिक बातचीत क्यों नहीं?


उमर अब्दुल्ला के ट्वीट पर बीजेपी नेता नलिन कोहली ने पलटवार किया है. न्यूज 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा उमर सोशल मीडिया के आधार पर चलते हैं,वो जो खबर देखते हैं उस पर ट्वीट कर देते हैं, जो पत्थरबाज हैं उसको उनकी पार्टी राष्ट्रवादी नजरिए से देखती है..यह उनका अपना नजरिया है, लेकिन यह गंभीर विषय है और इसपर काम करने के लिए सारे लोग काम कर रहे हैं राज्यपाल है वहां पर अधिकारी हैं सब लोग हैं.




दरअसल, अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए आज भारत पहली बार तालिबान के साथ मंच साझा करेगा. ये बातचीत रूस के मॉस्को में होने जा रही है. भारत इस बातचीत में गैर आधिकारिक स्तर पर शामिल होगा. भारत के अलावा पाकिस्तान, चीन, ईरान और अमेरिका भी बातचीत में शामिल हो सकते हैं.

बता दें, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि भारत की विदेश नीति में इस बात का ज़ोर है कि अफ्गानिस्तान के साथ उनके अच्छे संबध रहें. इस कोशिश में अफगान-नेतृत्व में, अफगान-स्वामित्व वाले और अफगान-नियंत्रित तथा अफगानिस्तान सरकार की भागीदारी होना जरूरी है.

Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर