अगर बच्चा सवाल समझ सकता है तो मिल जा सकती है गवाही की अनुमति- सुप्रीम कोर्ट

ट्रायल कोर्ट ने अन्य सबूतों के आधार पर धारा 302 और 498ए के तहत दोषी ठहराया था.

News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 11:30 PM IST
अगर बच्चा सवाल समझ सकता है तो मिल जा सकती है गवाही की अनुमति- सुप्रीम कोर्ट
ट्रायल कोर्ट ने अन्य सबूतों के आधार पर धारा 302 और 498ए के तहत दोषी ठहराया था.
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Updated: July 25, 2019, 11:30 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में कम उम्र के बाल गवाहों को गवाही की इजाजत दी जा सकती है, बशर्ते वह इतना समझदार हो कि सवालों को समझ कर उनका तार्किक जवाब दे सके .

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की एक बेंच ने कहा कि बाल गवाह से सवाल जवाब कर घटना को समझने और अदालत के सामने सच बोलने की उसकी बौद्धिक क्षमता को सुनिश्चित किया जा सकता है.

बेंच ने कहा कि बाल गवाह उस स्थिति में ही अक्षम होता है जब अदालत को यह लगता है कि वह सवालों को नहीं समझ पाएगा और सही तरीके से जवाब नहीं देगा. इसके साथ ही बाल गवाह की क्षमता को सुनिश्चित करने के लिये जज को अपनी राय भी बनानी होगी.

सर्वोच्च न्यायालय हत्या के एक मामले में अपील की सुनवाई कर रहा था जिसमें अभियोजन के दो गवाह नाबालिग थे.

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यह था मामला

लाइव लॉ डॉट इन की एक रिपोर्ट के अनुसार पी रमेश बनाम स्टेट के मामले के में एक हत्याकाण्ड के मामले में प्रॉसीक्यूशन की ओर से दो गवाह नाबालिग थे. मामले के ट्रायल जज ने उनके सबूत इसलिए नहीं रिकॉर्ड किए क्योंकि उनका मानना था कि गवाह उस शख्स की पहचान करने में असमर्थ थे जिसके समक्ष वह गवाही दे रहे थे.
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उदाहरण के लिए वह जज और वकीलों को नहीं पहचान रहे थे. हालांकि नाबालिग गवाहों का कहना था कि वह अपनी मां के हत्या के मामले में गवाही देना चाहते हैं.

ट्रायल कोर्ट ने अन्य सबूतों के आधार पर धारा 302 और 498ए के तहत दोषी ठहराया था.

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First published: July 25, 2019, 11:21 PM IST
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