IIIT सूरत के दो छात्रों के बनाई कोरोना स्‍क्रीनिंग मशीन, संदिग्‍धों की तुरंत करेगी पहचान

IIIT सूरत के दो छात्रों के बनाई कोरोना स्‍क्रीनिंग मशीन, संदिग्‍धों की तुरंत करेगी पहचान
मशीन बनाने वाली एक छात्रा और कॉलेज के डीन ने दी जानकारी.

आईआईआईटी सूरत (IIIT Surat) के डीन ने भी मानव संसाधन मंत्रालय को इसके इस्‍तेमाल को लेकर प्रस्ताव भेजा है. अगर यह प्रस्ताव सफल होता है तो स्‍कैनिंग कार्य में जुड़े लोगों को काफी राहत मिल सकती है.

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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच राहत की खबर है कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) सूरत के दो इंजीनियर छात्रों ने मिलकर कोरोना के संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए एक मशीन तैयार की है. आईआईआईटी सूरत के डीन ने भी मानव संसाधन मंत्रालय को इसके इस्‍तेमाल को लेकर प्रस्ताव भेजा है. अगर यह प्रस्ताव सफल होता है तो स्‍कैनिंग कार्य में जुड़े लोगों को काफी राहत मिल सकती है.

इसे रोपड़ (पंजाब) की रहने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स व कंप्यूटर साइंस की छात्रा एकता अरोड़ा और बीकानेर के रहने वाले छात्र कृष्ण ओझा ने तैयार किया है. इस मशीन को कोविड-19 स्कैनर नाम दिया है. यह मशीन स्क्रीनिंग कर कोरोना लक्षण मिलने पर तुरंत क्वारंटाइन करने के संकेत दे देगी. इसके बाद डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ इस मरीज के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज सकते हैं.

रोपड़ के आजाद नगर की रहने वाली एकता अरोड़ा ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर लाखों लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. इसमें डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, पुलिस कर्मचारी व अन्य कर्मचारियों के संक्रमित होने का डर बना रहता है. सरकार की तरफ से कर्मचारियों के बचाव के लिए उनको पूरी किट दिया जाना संभव नहीं है. इस मशीन से फील्ड में काम करने वाले मेडिकल स्टाफ व पुलिस कर्मचारियों के संक्रमित होने की संभावना काफी कम हो जाएगी. उन्होंने बताया कि इस समय पर यह ऑटोनोमस कोविड-19 महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कोरोना योद्धाओं का बचाव कर सकती है जो इस कोरोना महामारी पर रोक लगाने के लिए कारगर साबित हो सकता है.



डेढ़ मिनट में करेगी जांच
मशीन के बारे में एकता अरोड़ा ने बताया कि इस मशीन को बनाने में दोनों दोस्तों को करीब 25 दिन लगे हैं. इस मशीन से लोगों की डेढ़ मिनट में स्क्रीनिंग हो जाएगी. इसके लिए मशीन को छूने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि मशीन से 50 सेंटीमीटर की दूरी पर संदिग्ध को खड़ा करने से जांच हो जाएगी. यह जांच होने के बाद पूरी जानकारी दे देगी. स्कैनर एक मरीज को खुद को ठीक से स्थिति देने का निर्देश देता है और कुछ मिनटों के लिए उसके शरीर के मूवमेंट का अध्ययन करता है. अगर रोगी को कोविड -19 लक्षण जैसे सर्दी, खांसी, बहती नाक या छींक है, तो स्कैनर तुरंत डेटा का विश्लेषण करता है और पूर्व एक्सरे लेता है.

मशीन में दूर से स्कैनर विकसित करने के लिए संक्रमित व्यक्तियों के मूवमेंट, मशीन लर्निंग सॉफ्टवेयर, अल्ट्रसोनिक सेंसर और सर्वो मोटर, माइक्रो कंट्रोलर और अन्य उपकरणों के वीडियो कैमरा डेटा का इस्तेमाल किया गया है.

एकता अरोड़ा ने बताया कि कोविड-19 स्कैनर बनाने के बाद आईआईआईटी सूरत के डीन ने इसका प्रस्ताव मानव संसाधन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है. यदि यह प्रस्ताव सफल होता है तो स्‍कैनिंग कार्य में जुड़े लोगों को काफी राहत मिल सकती है. एकता ने बताया कि अगर अधिक स्तर पर इस मशीन को तैयार करवाया जाए तो लागत भी काफी कम आएगी और एक ही मशीन द्वारा कई लोगों की स्कैनिंग की जा सकेगी.

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