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IIM डायरेक्टर का खत्म होने वाला है कार्यकाल, सरकार को अब तक नहीं मिली है उनकी स्नातक की डिग्री: रिपोर्ट

मंत्रालय के वरिष्ठ वकील, जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्होंने सरकार से शर्मा की स्नातक की डिग्री लेने को कहा है. (फ़ाइल फोटो)

मंत्रालय के वरिष्ठ वकील, जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्होंने सरकार से शर्मा की स्नातक की डिग्री लेने को कहा है. (फ़ाइल फोटो)

IIM Rohtak: याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि डायरेक्टर ने अन्य बातों के अलावा अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत तरीके से पेश किया और लिहाजा वो पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM Rohtak) रोहतक के डायरेक्टर धीरज शर्मा का पांच साल का कार्यकाल खत्म होने में बमुश्किल से पांच महीने बचे हैं. लेकिन केंद्र सरकार को अभी भी उनकी स्नातक की डिग्री नहीं मिली है. रिकॉर्ड बताते हैं कि शिक्षा मंत्रालय ने इस साल उन्हें दो बार चिट्ठी लिखकर उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों की सत्यापित प्रतियों के लिए कहा है. लेकिन, अब तक उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया है. बता दें कि उनकी नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी गई है. खास बात ये है कि सरकार ने उन पर लगे अयोग्यता के आरोपों का बचाव किया है.

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मंत्रालय का पहला पत्र धीरज शर्मा को 18 फरवरी को भेजा गया था. 28 जून को उन्हें फिर से रिमाइंडर लेटर भेजा गया. लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया. बता दें कि शर्मा की नियुक्ति को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि डायरेक्टर ने अन्य बातों के अलावा अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत तरीके से पेश किया और लिहाजा वो पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं.

    डायरेक्टर की डिग्री
    बता दें कि आईआईएम में डायरेक्टर के रूप में नियुक्त होने के लिए सबसे पहले प्रथम श्रेणी स्नातक की डिग्री जरूरी है. इसके बाद ही दूसरी डिग्री देखी जाती है. धीरज शर्मा ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली है. साथ ही उन्होंने लुइसियाना टेक यूनिवर्सिटी (एलटीयू), अमेरिका से पीएचडी की डिग्री ली है. इन दोनों डिग्री की कॉपी शिक्षा मंत्रालय के पास है. लेकिन उनकी स्नातक डिग्री का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. ये स्पष्ट नहीं है कि इस डॉक्यूमेंट के बिना फरवरी 2017 में शर्मा की नियुक्ति को कैसे मंजूरी दी गई थी.

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    कोर्ट में सरकार की दलील
    अखबार के मुताबिक ये पता चला है कि मंत्रालय के वरिष्ठ वकील, जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्होंने सरकार से शर्मा की स्नातक की डिग्री लेने को कहा है. इस साल फरवरी में अपने हलफनामे में, सरकार ने नियुक्ति का बचाव किया और अदालत से याचिका खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का कोई अधिकार नहीं है. सरकार ने दलील दी कि डायरेक्टर की नौकरी के लिए 60 आवेदकों में से किसी ने भी नियुक्ति को चुनौती नहीं दी थी.

    डिग्री पर सस्पेंस
    मंत्रालय ने शर्मा की एमबीए और पीएचडी डिग्री की कॉपी दाखिल कीं, लेकिन उन्होंने स्नातक की डिग्री नहीं दी. इसके बाद उनको दो रिमाइंडर भेजे गए. डिग्री के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्होंने अपनी पात्रता सत्यापित करने के लिए मंत्रालय को “जो कुछ भी आवश्यक था” दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक उनके पास दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री है.

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