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समय बीतने के साथ लैंडर विक्रम से संपर्क साधना होगा मुश्किल, वैज्ञानिकों की बढ़ीं धड़कनें

भाषा
Updated: September 9, 2019, 7:48 AM IST
समय बीतने के साथ लैंडर विक्रम से संपर्क साधना होगा मुश्किल, वैज्ञानिकों की बढ़ीं धड़कनें
आखिर ऐसा क्या गलत हो गया, जिससे चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के लैंडर विक्रम का कंट्रोल रूम के साथ संपर्क टूट गया?

‘इसरो (ISRO) के चंद्रयान-2 (CHANDRAYAN-2) द्वारा विक्रम मॉड्यूल की स्थिति की जानकारी देना साबित करता है, कि ऑर्बिटर सही से काम कर रहा है.’

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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 (CHANDRAYAN-2) के लैंडर विक्रम से संपर्क बहाल करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. रविवार को ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया था, जिसके बाद से लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की उम्मीद एक बार फिर जगी है. हालांकि लैंडर विक्रम से संपर्क साधना वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं है. जैसे-जैसे समय बीत रहा है लैंडर विक्रम से वैज्ञानिकों की पकड़ ढीली होती जा रही है. इसरो प्रमुख के. सिवन ने शनिवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी 14 दिनों तक लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करेगी.

गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के सिवन ने कहा था कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे कैमरों ने लैंडर की मौजूदगी का पता लगाया है. बता दें कि शुक्रवार देर रात चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान अपने रास्ते से भटक गया था. लैंडर विक्रम चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर पहले कहीं खो गया और उसका संपर्क इसरो सेंटर से टूट गया था.

मिशन के 90 से 95 फीसदी लक्ष्य हासिल
रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ शोधार्थी अजय लेले ने कहा, लैंडर विक्रम की लोकेशन के बारे में ऑर्बिटर ने जिस तरह की जानकारी दी है उससे साफ हो जाता है कि ऑर्बिटर बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहा है. ऑर्बिटर मिशन का मुख्य हिस्सा था, क्योंकि इसे एक साल से ज्यादा वक्त तक काम करना है. उन्होंने कहा कि ऑर्बिटर के सही ढंग से काम करने से मिशन के 90 से 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिए जाएंगे.

डेटा के जरिए पता चलेगी लैंडर की स्थिति
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल एक साल का है. इस दौरान यह चंद्रमा की लगातार परिक्रमा कर हर जानकारी पृथ्वी पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों को भेजता रहेगा. वहीं, रोवर ‘प्रज्ञान’ का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है. इस दौरान यह वैज्ञानिक प्रयोग कर इसकी जानकारी इसरो को भेजेगा. इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस नांबी नारायणन ने कहा कि अगली चुनौती लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने की है. उन्होंने कहा कि फिर से संपर्क स्थापित करने की संभावना कम है क्योंकि हो सकता है कि लैंडर ने क्रैश लैंडिंग की हो.

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First published: September 9, 2019, 5:30 AM IST
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