साध्वी प्रज्ञा के मुद्दे पर महबूबा और उमर के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग

मालेगांव धमाके की मुख्य संदिग्ध साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी की तरफ से भोपाल सीट से प्रत्याशी बनाने पर महबूबा के ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला ने कुछ ऐसे जवाब दिया कि उन्हें बादाम खाने की नसीहत मिल गई.

News18Hindi
Updated: April 18, 2019, 3:58 PM IST
साध्वी प्रज्ञा के मुद्दे पर महबूबा और उमर के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग
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Updated: April 18, 2019, 3:58 PM IST
जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बीच उस वक्त ट्विटर पर जंग छिड़ गई जब महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी की ओर से साध्वी प्रज्ञा को चुनावी मैदान में उतारने पर अपनी प्रतिक्रिया दी. मालेगांव धमाके की मुख्य संदिग्ध साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी ने भोपाल सीट से कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा है.

इस पर महबूबा ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सोचिए मुझे कितने गुस्से का सामना करना पड़ता अगर मैंने किसी संदिग्ध आतंकी को मैदान में उतारा होता. टीवी चैनल वाले अब तक हैशटैग महबूबा आतंकी ट्रेंड करा चुके होते.'



उन्होंने आगे ट्वीट किया, 'इन लोगों के हिसाब से आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता अगर भगवा आतंकवाद की बात करें तो, लेकिन वैसे सभी मुस्लिम आतंकी हैं.'

इस पर उमर अब्दुल्ला ने उन्हें याद दिलाया कि पिछले साल तक वो उसी बीजेपी के सहयोग से राज्य की मुख्यमंत्री थीं जिसके खिलाफ अभी वो बोल रही हैं.

उमर ने महबूबा के ट्वीट के जवाब में लिखा, 'यही लोग आपके सहयोगी थे जब तक कि इन्होंने आपको बिना सोचे विचारे गद्दी से बेदखल नहीं कर दिया. 2014 में सत्ता में आने से पहले से ही वो ऐसे थे, लेकिन आपको उनका गुनाह जून 2018 के बाद दिखा. सत्ता पर काबिज़ रहने की चाह ने आपको इनका गुनाह देखने नहीं दिया जब तक कि इन लोगों ने ज़बरदस्ती आपको वो नहीं दिखाया.'



उमर अब्दुल्ला की ये प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक है क्योंकि अब तक उनके और महबूबा के बीच ट्विटर पर दोस्ताना रिश्ता रहा है. राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद ट्रोल्स के खिलाफ दोनों एक दूसरे का साथ देते और कभी मज़ाक भी करते रहे हैं.

अभी कुछ ही दिनों पहले उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के काफिले पर हुए हमले की निंदा की थी और ठीक उसके एक दिन बाद महबूबा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक नेता पर ग्रेनेड हमले की निंदा की थी.



उमर के जवाब में महबूबा ने ट्वीट कर उन्हें याद दिलाया कि अगर उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई थी तो उमर भी अटल बिहारी वाजपेयी के पीएम रहते हुए एनडीए सरकार में बतौर मंत्री कार्यरत थे.

उन्होंने ट्वीट किया, 'गुजरात हिंसा के बाद राम विलास पासवान ने नैतिक आधार पर अपना इस्तीफा दिया था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया. बादाम खाइए और अपनी याददाश्त को बेहतर कीजिए.'
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