जाने कैसे बाबा साहेब ने बुद्ध के तीन सूत्रों को लोकप्रिय नारों में बदल दिया

बाबा साहेब अंबेडकर के बारे में रोचक बातें

Sanjeev Mathur | News18Hindi
Updated: December 6, 2017, 5:42 PM IST
जाने कैसे बाबा साहेब ने बुद्ध के तीन सूत्रों को लोकप्रिय नारों में बदल दिया
बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर
Sanjeev Mathur | News18Hindi
Updated: December 6, 2017, 5:42 PM IST
स्वतंत्र भारत के पहले कानून और विधि मंत्री डॉक्टर भीम राव अंबेडकर को भारतीय संविधान का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है. भारत में सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था. 6 दिसंबर 1956 में उनका दिल्ली के आवास में परिनिर्वाण हो गया.

पढ़िए उनके अहम सामाजिक बदलाव के नारों से जुड़ी कुछ रोचक बातें-

बाबा साहेब अंबेडकर तीन व्यक्तियों को अपना गुरू मानते थे. बाबा साहेब के पहले गुरू थे महात्मा बुद्ध, दूसरे थे संत कबीर और तीसरे गुरू थे महात्मा ज्योतिबा फुले.



बुद्ध, कबीर और फुले के दर्शन को ही बाबा साहेब ने आम जन को सहज समझने आने वाली भाषा में समाज को समझाया है.

बाबा साहेब अंबेडकर ने बौद्ध धम्म के प्रसिद्ध सूत्र के अर्थों को सामाजिक बदलाव का उद्घोष बना दिया.

बुद्धं शरणं गच्छामि (मैं बुद्ध की शरण लेता हूँ) ,धम्मं शरणं गच्छामि (मैं धर्म की शरण लेता हूँ),संघं शरणं गच्छामि (मैं संघ की शरण लेता हूँ), को आधुनिक अर्थों व सरल भाषा में बाबा साहेब ने तीन नारों तब्दील कर सामाजिक चेतना की अलख जागाई.

बाबा साहेब ने इन तीन सूत्रों को शिक्षित बनों,संघर्ष करो और संगठित रहो के आधुनिक कलेवर में पेश कर समाज के भीतर की कमजोरियों को दूर करने का संदेश दिया.
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बाबा साहेब ने क्या बताए अर्थ:

बुद्धं शरणं गच्छामि का अर्थ है कि मैं बुद्ध की शरण लेता हूँ. बुद्ध से यहां अभिप्राय था बुद्धि, ज्ञान, तर्क और विवेक. बाबा साहेब ने इसे शिक्षित होने से जोड़कर पेश किया. बाबा साहेब का मानना था कि सच्चा शिक्षित व्यक्ति वही होता है जो बुद्धि,ज्ञान,तर्क और विवेक का इस्तेमाल अपने व समाज के जीवन को बेहतर बनाने के लिए करे. धम्मं शरणं गच्छामि से अभिप्राय था कि मैं धम्म अर्थात् न्याय,समानता और शोषण से मुक्ति जैसे मानवीय मूल्यों के रास्ते पर चलूंगा. इसी तरह तीसरे सूत्र संघं शरणं गच्छामि का मतलब है कि मैं संघ की शरण लेता हूँ. संघ यानी शोषण और अज्ञान के खिलाफ एकत्र हुए लोगों का संगठन. बाबा साहेब के अनुसार शिक्षित होकर, न्याय की राह पर चलना काफी नहीं है अगर हम मनुष्य अन्याय व शोषण के खिलाफ एकत्र नहीं होते हैं. संगठित नहीं होते हैं. इसीलिए अन्याय व शोषण के खिलाफ अ​केले लड़ने के बजाए हमें संगठित होकर संघर्ष करना चाहिए.

बाबा साहेब के बारे में पांच रोचक व अनजाने तथ्य
1 अपने माता-पिता की 14वीं संतान थे डॉक्टर अंबेडकर.

2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में अंबेडकर के पिता ने नौकरी करी थी.

3. मुंबई में एक सरकारी लॉ स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर 2 वर्ष तक रहे अंबेडकर.

4. अंबेडकर मधुमेह के रोग से ग्रसित थे.

5. अंबेडकर को नव बौद्ध आंदोलन शुरू करने का श्रेय भी जाता है. उन्होंने परांपरागत बौद्ध धम्म में बदलाव कर क्रांतिकारी 22 प्रतिज्ञाओं से उसे जोड़ा.

क्या है 22 प्रतिज्ञाएं

डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धम्म में “वापस लौटने” के अवसर पर,15 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ निर्धारित कीं.उन्होंने इन शपथों को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके.ये 22 प्रतिज्ञाएँ हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं.

प्रसिद्ध 22 प्रतिज्ञाएँ निम्न हैं:

मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परामिताओं का पालन करूँगा.
मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
मैं चोरी नहीं करूँगा.
मैं झूठ नहीं बोलूँगा
मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
मैं शराब,  जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा.
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