कोरोना वायरस : गुजरात में डाक्टरों ने दिया लॉकडाउन लगाने का सुझाव, सरकार पक्ष में नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस के स्ट्रेन B.1.167 में तीसरे म्यूटेशन की पहचान की गई है. (पीटीआई फाइल फोटो)

रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस के स्ट्रेन B.1.167 में तीसरे म्यूटेशन की पहचान की गई है. (पीटीआई फाइल फोटो)

Gujarat Coronavirus Lockdown: आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र पटेल ने न्यायालय से कहा कि यदि राज्य सरकार लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है तो उसे लोगों को उनके घरों तक सीमित कर देने के लिए गतिविधियों पर पाबंदी लगाने पर सोचना चाहिए.

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अहमदाबाद. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की प्रदेश इकाई ने मंगलवार को गुजरात उच्च न्यायालय में सुझाव दिया कि राज्य सरकार को कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए दो सप्ताह का लॉकडाउन लगाना चाहिए. आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र पटेल ने न्यायालय से कहा कि यदि राज्य सरकार लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है तो उसे लोगों को उनके घरों तक सीमित कर देने के लिए गतिविधियों पर पाबंदी लगाने के बारे में सोचना चाहिए.



उन्होंने मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति भार्गव करिया की खंडपीठ के सामने एक जनहित याचिका की ऑनलाइन सुनवाई के दौरान ये सुझाव दिये. खंडपीठ राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति का संज्ञान लेते इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. खंडपीठ ने पटेल को डाक्टरों की ओर से अपनी राय देने के लिए बुलाया था.



गुजरात से करीब 30000 डॉक्टर आईएमए की प्रदेश शाखा के सदस्य हैं. पटेल ने कहा, ‘सरकार को सभी तरह के जमावड़े, चाहे वह सामाजिक हो या राजनीतिक या धार्मिक, पर पूर्ण रोक लगा देनी चाहिए. यदि संभव हो तो सरकार को 14 दिनों का पूर्ण लॉकडाउन लगाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो तो उसे गतिविधियों पर गंभीर पाबंदिया लगानी चाहिए.’




उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को बिस्तरों की उपलब्धता को प्रदर्शित करने की केंद्रीयकृत प्रणाली अपनानी चाहिए क्योंकि ‘लोग बिस्तरों के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भाग रहे हैं.’



सुझावों पर सरकारी वकील मनीषा साह ने कहा कि लॉकडाउन लगाने का फैसला करना ‘तलवार की धार पर चलने जैसा है.’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘जीवन और आजीविका’ बचाने के लिए कटिबद्ध है. मामले पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी.


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