जम्‍मू-कश्‍मीर से 10000 जवान वापस बुलाने के पीछे कारण है सुधरा लॉ एंड आर्डर

जम्‍मू-कश्‍मीर से 10000 जवान वापस बुलाने के पीछे कारण है सुधरा लॉ एंड आर्डर
कश्‍मीर से वापस बुलाए जा रहे 10000 जवान.

केंद्र सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) से 10000 जवान वापस बुलाने का फैसला लिया है. इनमें 40 सीआरपीएफ और एसएसबी, बीएसएफ और सीआईएसएफ की 20-20 कंपनियां हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 11:21 AM IST
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अरुणिमा

नई दिल्‍ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के लिए करीब 80,000 अर्धसैनिक बल के जवानों को जुटाए जाने के करीब साल भर बाद केंद्र सरकार ने अब तक की उनकी सबसे बड़ी वापसी की कवायद का आदेश दिया है कि अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां राज्य से वापस बुला ली जाएं. इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, 'मंत्रालय द्वारा जम्मू और कश्मीर में सीएपीएफ की तैनाती की समीक्षा की गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर से तत्काल प्रभाव से सीएपीएफ की 100 कंपनियों को वापस लेने और अपने-अपने स्थानों पर वापस लौटने का फैसला किया गया है.'

इन कंपनियों में 40 सीआरपीएफ और एसएसबी, बीएसएफ और सीआईएसएफ की 20-20 कंपनियां हैं. अधिकारियों ने कहा कि बुलाई जा रही एसएसबी, सीआईएसएफ और बीएसएफ कंपनियां कश्मीर और जम्मू दोनों क्षेत्रों में तैनात हैं. सीएपीएफ के एक अफसर ने News18 को बताया, 'जो यूनिट वापस बुलाई जा रही हैं, उन्हें जम्मू और श्रीनगर दोनों में तैनात किया गया है. यह महसूस किया गया था कि केंद्र प्रशास‍ित प्रदेश में काउंटर-इंसर्जेंसी और काउंटर-टेररिस्ट ग्रिड बरकरार है और ये अतिरिक्त इकाइयां जो पिछले साल भेजी गई थीं, उन्हें वापस बुलाया जा रहा है. ताकि उन्‍हें आराम और प्रशिक्षण दिया जा सके.'



हालांकि, सीआरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की वापस बुलाई जा रही सभी 40 कंपनियां घाटी से हैं. CRPF के एक अधिकारी ने News18 को बताया, 'जुलाई-अगस्त 2019 में जिस तरह की लामबंदी हुई थी, उसकी तुलना में अब केवल 10% सैनिक घाटी में रहेंगे.'
अधिकारियों ने कहा कि सैनिकों को वापस लेने का अंतिम निर्णय गृह मंत्रालय का था, लेकिन स्थानीय इनपुट ने पथराव की कम संख्या और अन्य कानून और व्यवस्था की घटनाओं को बताया है.

जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने की पहली वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर तैयार एक गृह मंत्रालयी रिपोर्ट के अनुसार, घाटी में समग्र सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है. पिछले एक साल में 150 के करीब आतंकियों का सफाया हो चुका है, जिनमें रियाज नाइकू जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या में भी 40% की कमी आई है.

गृह मंत्रालय ने कहा कि 1 जनवरी से 15 जुलाई तक कश्मीर घाटी में 188 आतंकवादी-संबंधी घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2020 में यह संख्या घटकर 120 हो गई. आंकड़ों में कहा गया है कि 2019 में इसी अवधि में कश्मीर में 126 आतंकवादी मारे गए, जबकि 2020 में 136 आतंकवादी ढेर किए गए. 2019 में 1 जनवरी से 15 जुलाई तक कश्मीर में 51 ग्रेनेड हमले हुए, जबकि 2020 में यह संख्या सिर्फ 21 थी.

गृह मंत्रालय ने आखिरी बार दिसंबर में जम्मू-कश्मीर से 82 सीएपीएफ कंपनियों को वापस बुलाया था. इसलिए नए आदेश के बाद सुरक्षाबलों की 182 कंपनियां कश्मीर घाटी से वापस आ गईं.
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