साल 2019 में तेज वाहन चलाने से हुई सड़क दुर्घटना में 3.19 लाख लोगों की मौत

पिछले कैलेंडर वर्ष 2019 के दौरान कुल 4,49,002 सड़क दुर्घटनाएं हुईं (सांकेतिक फोटो)
पिछले कैलेंडर वर्ष 2019 के दौरान कुल 4,49,002 सड़क दुर्घटनाएं हुईं (सांकेतिक फोटो)

सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री (Minister of State for Road Transport and Highways) वी के सिंह ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने हर जिले में सड़क उपयोगकर्ताओं (road users) के बीच जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ‘‘सांसदों (MPs) की सड़क सुरक्षा समिति’’ को सूचित किया है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 19, 2020, 5:37 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल देश में हुई 4.49 लाख सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) में से लगभग 71 प्रतिशत सड़क दुर्घटना, तेज गति से वाहन (speeding vehicle) चलाने के कारण हुई. यह जानकारी संसद को शनिवार को दी गई. सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री (Minister of State for Road Transport and Highways) वी के सिंह ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में कहा, ‘‘उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले कैलेंडर वर्ष (Calendar year) 2019 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की कुल संख्या 4,49,002 है. इनमें से 3,19,028 सड़क दुर्घटनाएं (71.1%) दुर्घटना, तेज गति से वाहन चलाने से हुई हैं.’’

उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने हर जिले में सड़क उपयोगकर्ताओं (road users) के बीच जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ‘‘सांसदों (MPs) की सड़क सुरक्षा समिति’’ को सूचित किया है. मंत्री ने कहा कि उस जिले के संसद सदस्य (लोकसभा) इस समिति (committee) के अध्यक्ष होंगे.

भारत में प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक
सिंह ने कहा कि मंत्रालय ने शिक्षा, इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों), प्रवर्तन और आपातकालीन देखभाल के आधार पर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है. भारत में प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है. इन दुर्घटनाओं में लगभग 1.5 लाख लोग मारे जाते हैं और करीब 3 लाख अपंग हो जाते हैं.
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गंभीर चोट न केवल विकलांग करती है बल्कि गहरे भावनात्मक निशान छोड़ती है: SC
इससे पहले शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटना के पीड़ित के मामले में मुआवजा राशि में वृद्धि करते हुए कहा कि अदालत को यह ध्यान में रखना चाहिए कि गंभीर चोट न केवल विकलांगता लाती है बल्कि गहरे भावनात्मक निशान छोड़ती है. शीर्ष अदालत ने कहा कि इसने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि 'उचित मुआवजे' में उन सभी तत्वों को शामिल किया जाना चाहिए जो कि पीड़ित व्यक्ति को उस स्थिति के निकट ले आयेगा , जैसा वह दुर्घटना से पहले था.
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