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पहली बार : साल भर के संघर्ष के बाद मां के दस्तावेज पर बेटे को मिला जाति प्रमाण पत्र

पहली बार : साल भर के संघर्ष के बाद मां के दस्तावेज पर बेटे को मिला जाति प्रमाण पत्र

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने गीता को उनके बेटे का जाति प्रमाण पत्र सौंपा.

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने गीता को उनके बेटे का जाति प्रमाण पत्र सौंपा.

करीब एक साल से अपने बेटे का जाति प्रमाण (Cast Certificate) पत्र बनवाने के लिए संघर्ष कर रहीं दिल्ली की गीता देवी को आखिरकार इसी मंगलवार को कामयाबी मिल ही गई. दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया (Deputy CM Manish Sisofdiya) ने गीता को उनके बेटे का जाति प्रमाण पत्र सौंपा.

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    नई दिल्ली. करीब एक साल से अपने बेटे का जाति प्रमाण (Cast Certificate) पत्र बनवाने के लिए संघर्ष कर रहीं दिल्ली की गीता देवी को आखिरकार इसी मंगलवार को कामयाबी मिल ही गई. दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया (Deputy CM Manish Sisofdiya) ने गीता को उनके बेटे का जाति प्रमाण पत्र सौंपा.

    गीता का संघर्ष करीब सालभर पहले तब शुरू हुआ, जब उनके बेटे के स्कूल वालों ने उनसे जाति प्रमाण पत्र मांगा. वे अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखती हैं. लिहाजा बेटे को छात्रवृत्ति का लाभ मिल सके, इसलिए जाति प्रमाण पत्र की जरूरत थी. वे जब यह कागज बनवाने के लिए एसडीएम (Subdivisional Magistrate) के दफ्तर पहुंची तो वहां उनसे उनके पति के दस्तावेज मांगे गए. कहा गया कि उन्हीं दस्तावेज के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी हो सकेगा.

    लेकिन गीता अपने पति से अलग हो चुकी थीं. वे बताती हैं, ‘मैं शादीशुदा जरूर हूं लेकिन मेरे पति की अब मेरी जिंदगी में कोई भूमिका नहीं. सालों पहले उन्होंने मुझे छोड़ दिया. मैं बेटे के लिए प्रमाण के तौर पर उनका जाति प्रमाण पत्र कैसे लाती‌? मेरे पास अपना जाति प्रमाण पत्र है. मेरे बेटे की उम्र 13 साल है. अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र (Cast Certificate of SC) उसे भी भविष्य में काम आएगा. मैं इसके लिए चार बार एसडीएम के दफ्तर गई. लेकिन हर बार वहां मुझसे बेटे के पिता के दस्तावेज लाने को कहा गया.’

    इसी बीच, गीता की नौकरी भी चली गई. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपने काम की ज्यादा फिक्र किए बगैर उन्होंने बेटे का जाति-प्रमाण पत्र बनवाने पर ज्यादा ध्यान और वक्त दिया. स्थानीय विधायक विशेष रवि से मिलीं. उन्होंने मदद की. उन्हें महसूस हुआ कि गीता जैसी परेशानी में और भी कई महिलाएं हो सकती हैं. लिहाजा उन्होंने सरकारी विभागों से पत्राचार किया.

    पत्राचार इसलिए ताकि नियम बदलवाए जा सकें. दिल्ली सरकार में पहले बीते साल तक सिर्फ पिता और पैतृक परिवार के किसी पुरुष सदस्य के दस्तावेज के आधार पर ही जाति-प्रमाण पत्र जारी करने का नियम था. रवि ने इस नियम को बदलवाने के लिए विधानसभा में मसला उठाया. आखिर जुलाई 2020 में अनुसूचित जाति-जनजाति प्रमाण पत्र (Cast Certificate of SC/ST) जारी करने के नियम बदल दिए गए.

    अब दिल्ली में मां के दस्तावेज के आधार पर भी बच्चों को जाति प्रमाण पत्र जारी हो सकते हैं. नए नियमों के तहत गीता के बेटे को भी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र मिल गया है. इसे कामयाबी के बाद वे कहती हैं, ‘मैं अब संतुष्ट हूं. क्योंकि मैं अपने बेटे को उसका हक दिला पाई.’

    Tags: Caste Certificate, Manish sisodia, New Delhi

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