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अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष के पास बचा है अब ये रास्ता, सुन्नी वक्फ बोर्ड 17 नवंबर को करेगा फैसला

News18Hindi
Updated: November 12, 2019, 1:00 AM IST
अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष के पास बचा है अब ये रास्ता, सुन्नी वक्फ बोर्ड 17 नवंबर को करेगा फैसला
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक पीसी के दौरान. (फाइल फोटो)

अयोध्या विवाद (Ayodhaya Case) में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के वकील जफरयाब जिलानी ने संकेत दिए हैं कि वो एक बार फिर से रिव्यू पेटिशन के साथ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जा सकते हैं.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 1:00 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने अयोध्या विवाद (Ayodhya Land Dispute) को लेकर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामलला को दी है. वहीं मस्जिद के लिए अयोध्या में ही किसी दूसरी जगह पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दूसरा पक्ष इस फैसले को मानेगा या फिर कोई और कदम उठाएगा.

रिव्यू पेटिशन पर फैसला
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अध्ययन कर रहा है. अखबार के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कई सदस्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं है. बोर्ड 17 नवंबर को रिव्यू पेटिशन डालने को लेकर फैसला करेगा. AIMPLB के वकील जफरयाब जिलानी ने शनिवार को संकेत दिए कि वो रिव्यू पेटिशन के साथ एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं.

AIMPLB का तर्क

AIMPLB के सदस्यों का सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिर कैसे उनके पक्ष में फैसला नहीं सुनाया. उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 1949 में बाबरी मस्जिद के अंदर छुपकर मूर्ति रख दी गई. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी माना कि कानून को तोड़ते हुए 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद को ढहाया गया. AIMPLB का ये भी तर्क है कि उन्होंने हिंदुओं को सीता रसोई और चबुतरे पर पूजा करने से कभी मना नहीं किया. सुन्नी वक्फ बोर्ड का कहना है कि उनके पास ज़मीन की कोई कमी नहीं है. उन्हें बस न्याय चाहिए.

क्या था सुप्रीम कोर्ट कै फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पूरी विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है. इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है. केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी.
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First published: November 12, 2019, 12:58 AM IST
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