Exclusive Interview with News18: पीएम मोदी का दावा- इस बार 2014 से ज्यादा सीटें जीतेगी बीजेपी

Exclusive Interview of Pm Narendra With Modi News18 : प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी के घोषणापत्र को मैच्योर बताते हुए कहा कि इसमें कालाधन, करप्शन सरीखे मुद्दों से लड़ने का माद्दा है वहीं कांग्रेस के मेनिफेस्टो को पीएम ने आतंकवादियों के प्रति नरमी बरतने वाला करार दिया.

News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 7:24 AM IST
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भारतीय जनता पार्टी का घोषणापत्र जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने News18 को इंटरव्यू दिया. एडिटर-इन-चीफ़ राहुल जोशी को दिये एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पीएम मोदी ने देश की सुरक्षा, विपक्षियों का हमला, राफेल, नेहरू-गांधी परिवार समेत तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 के रण में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी पर भी टिप्पणी की.

प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी के घोषणापत्र को मैच्योर बताते हुए कहा कि इसमें कालाधन, करप्शन सरीखे मुद्दों से लड़ने का माद्दा है. वहीं, कांग्रेस के मेनिफेस्टो को पीएम ने आतंकवादियों के प्रति नरमी बरतने वाला करार दिया. प्रधानमंंत्री ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ यानी साल 2022 तक का खाका भी पेश किया.



यहां पढ़ें इंटरव्यू का संपादित अंश :-

बीजेपी ने सोमवार को अपना घोषणापत्र जारी किया. आपके मुताबिक इस मेनिफेस्टो की अहम बातें क्या हैं?

एक जिम्मेदार दल ने गंभीरतापूर्वक मेनिफेस्टो जारी किया है. जिस पार्टी की सरकार दोबारा बनना तय है, यह उसका मैच्योर मेनिफेस्टो है. इस मेनिफेस्टो में पहली बार हमने साल 2022 और 2024 को विशेष रूप से पेश किया है यानी इसमें सरकार की जवाबदेही पांच साल बाद नहीं, बल्कि इसके बीच में भी होगी. ऐसा अब तक किसी ने नहीं किया. दूसरी बात, हमने मेनिफेस्टो में यह भी कहा है कि आजादी के 100 साल होने पर देश को कहां पहुंचाने का लक्ष्य होना चाहिए.

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कालाधन, भ्रष्टाचार, बेईमानी जैसे विषयों को हैंडल करने की चर्चा मेनिफेस्टो में है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी बातचीत है. इस मुद्दे पर पहले आए मेनिफेस्टो में घोर अन्याय किया गया. गरीब, दलित, पीड़ित, वंचित, शोषित और आदिवासियों के कल्याण के लिए समयबद्ध कार्यक्रमों पर युवाओं महिलाओं को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए. गांव, गरीब और किसान के जीवन में बदलाव कैसे लाया जाए. इन सब बातों पर विचार करते हुए यह भी ध्यान रखा है कि देश को आधुनिकता की तरफ भी ले जाना है.
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देश में टेक्नोलॉजी के प्रभाव को देश के विकास के अनुकूल बनाने पर भी विचार किया गया है. साल 2014 से 2019 के बीच हमने निराशा में डूबे देश को आशा की किरण देने, नये आत्मविश्वास को पैदा करने और सामान्य जन की आवश्यकताओं जैसे घर, बिजली, पानी, सड़कें आदि पूरी करने की दिशा में काम किया. बीते पांच वर्ष देश की जरूरत को पूरा करने के रहे और आने वाले पांच वर्ष में हम देश की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे. आने वाले पांच साल इन आकांक्षाओं को ताकत और अवसर देने के होंगे.

आपका मेनिफेस्टो दूसरी पार्टियों और खासकर कांग्रेस के मेनिफेस्टो से अलग कैसे है?

सबसे पहले तो नाम का ही फर्क है. कांग्रेस ने घोषणापत्र जारी किया है और हमने 'संकल्प पत्र.' मैं चाहता हूं कि देश के विद्वान बीजेपी और कांग्रेस के घोषणापत्रों का तुलनात्मक अध्ययन करें. हमारे ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर हमारे घोषणापत्र को देखा जाए. उनके ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर उनके घोषणापत्र की पड़ताल की जाए. कई बातों में जमीन आसमान का अंतर है.

आज हम आतंकवाद खत्म करने के अहम मोड़ पर खड़े हैं. ऐसे में आतंकवाद को उखाड़ना, उन पर दबाव बनाना और मनोवैज्ञानिक रूप से जीतना महत्वपूर्ण है. ऐसे समय में कांग्रेस के मेनिफेस्टो से ऐसी प्रतिध्वनि आ रही है कि आतंकवादियों के प्रति नरमी बरती जाएगी. हमदर्दी दिखाई जाएगी. जहां तक सेना का सवाल है, तो इस बारे में वैसा ही कुछ कहा गया है जैसा कभी न कभी पाकिस्तान बोलता रहा है. कोई भी देशभक्त इस भाषा को स्वीकार नहीं करेगा. पीस कीपिंग फोर्स में भारत की सेना के जवान जाते हैं. दुनिया में सबसे ज़्यादा शांति बहाली सैनिक हिंदुस्तान भेजता है. अनुभव है कि दुनिया भर के सैनिकों की तुलना में भारतीय सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की भरसक सराहना हुई है. अब हाल ये है कि हमारे देश की ही एक पार्टी, जिसने 50-60 साल शासन चलाया है, वो इस तरह की भाषा बोलती है. इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?

14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ पर आतंकी हमला हुआ. 25 फरवरी की शाम मैं आपसे नेटवर्क 18 के 'राइजिंग इंडिया समिट' में मिला था. उस वक्त हममें से किसी ने नहीं सोचा था कि आपके मन में क्या चल रहा है. आप उस दिन के बारे में बता सकते हैं,जब आपने बालाकोट पर एयर स्ट्राइक का मन बनाया और जब आपको मिशन कामयाब होने की जानकारी मिली? आपका क्या मूड था? आपके साथ कौन-कौन था? आपको कैसे अपडेट दिया जा रहा था?

मैंने पहले ही दिन घोषणा की थी कि आतंकवादियों और पाकिस्तान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है. मेरी बॉडी लैंग्वेज और मेरी भाषा से समझ आ सकता है कि मेरे भीतर क्या चल रहा है. मैं हड़बड़ी में, जल्दबाजी में शॉर्टकट वाले निर्णय नहीं लेता. मैंने सभी लोगों से चर्चा की. सेना से चर्चा की, सुरक्षाबलों से चर्चा की. अफसरों से चर्चा की. इसके बाद मैं धीरे-धीरे सोच रहा था कि इसको कैसे आगे बढ़ाया जाए. हमारी सेना ने पुलवामा हमला करने वालों को तो यहीं पर मार गिराया, ये अपने आप में बड़ा काम था. मैं इतने से संतुष्ट नहीं था. आतंकवादियों का लालन-पालन जहां होता है, जहां उनकी खातिरदारी होती है, वहां तक अगर हम कुछ नहीं करेंगे तो ये सुधरने वाले नहीं हैं. 26/11 का अनुभव कहो, पार्लियामेंट अटैक का अनुभव कहो, बाकी घटनाएं देखो, पाकिस्तान मानकर बैठा था कि भारत कुछ करने वाला नहीं है. इसलिए उनकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी. इस बार हमें लगा कि नहीं भई, जब उरी हुआ तो हमने सर्जिकल स्ट्राइक करके दिखा दिया. इस बार हुआ तो हमें लगा कि सर्जिकल स्ट्राइक का रास्ता ठीक नहीं होगा. एयर स्ट्राइक का रास्ता ठीक होगा. तो हमने एयर स्ट्राइक बहुत सफलतापूर्वक किया. मैं मानता हूं कि हमने सबको जोड़कर यह काम किया है. सबको विश्वास में लेकर किया.

सर्जिकल स्ट्राइक हुई और बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, लेकिन उसके बाद भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान में घूम रहे हैं. यहां तक कि आतंकी जब चाहते हैं कश्मीर में टेरर स्ट्राइक कर देते हैं. आपकी नजर में इसका इलाज क्या है? क्या कुछ और कड़े कदम उठाने होंगे?

थोड़ा एनालिसिस करना चाहिए. आतंकवादी हमले करते हैं, वो घटनाएं बहुत कम हो गई हैं. पुलवामा एक अपवाद है. सिक्योरिटी फोर्सेज़ जब उनको पकड़ने के लिए जाते हैं, तो गोलियां चलती हैं और उसमें आतंकवादी मारे जा रहे हैं. हमारे कार्यकाल में जितनी घटनाएं घट रही हैं, उनमें अधिकतम सिक्योरिटी फोर्सेज़ की ओर से एंगेजमेंट की हैं. अब ऐसा नहींं है कि आतंकी आए और मारकर चले गए.

बालाकोट में आतंकी शिविर नष्ट हुआ, क्या सरकार के पास इसके पुख्ता सबूत हैं? क्या सही वक्त आने पर आप इसे देश की जनता के सामने लाएंगे? ये दावा किया गया कि वहां 250 आतंकवादी मारे गए, खुद बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने यह बात कही थी.

जब आप एक दुश्मन से लड़ाई लड़ रहे हो, तब ऐसी भाषा दुश्मन को बल देती है. देश को कन्फ्यूज करती है. देश के जवानों को डीमॉरेलाइज करती है. ऐसे समय देश को एक सुर से एक ही बात कहनी चाहिए कि हमें वीर जवानों पर गर्व है. हमें उनके पराक्रम का गौरव करना चाहिए. इसके पहले कई युद्ध हुए. क्या कभी किसी ने ऐसी भाषा प्रयोग की है, कभी नहीं की. कई एक्शन हुए, कभी किसी ने ऐसी भाषा प्रयोग नहीं की. सत्ता के लिए छटपटाने वाली कांग्रेस ने मर्यादा खो दी है. इस कारण उसके नेता ऐसी भाषा बोलते हैं. जहां तक सबूत का सवाल है, पाकिस्तान अपने आप में बहुत बड़ा सबूत है. क्या कारण है कि पाकिस्तान ने सुबह पांच बजे ट्वीट किया, हमारे साथ ऐसा किया गया है. हम तो चुप थे. पाकिस्तान को ये क्यों कहना पड़ा. यह अपने आप में सबूत है. ऐसा तो नहीं है कि भारत सरकार पहले जाकर बोली या हमारी सेना के लोग जाकर बोले.

क्या पाकिस्तान को मसूद अजहर को भारत के हवाले करना चाहिए? आपको उम्मीद है कि जो पीएम इमरान खान पूरी तरह से पाकिस्तान की आर्मी के प्रभाव में हैं वो ऐसा करेंगे? इमरान खान अब भी वॉर मॉन्गरिंग की बात कर रहे हैं कि भारत हमला कर सकता है.

भारत के अंदर पाकिस्तान की किसी भी बात पर रत्ती भर विश्वास नहीं है. हमारे देश में पाकिस्तान की जीरो क्रेडेबिलिटी है. पाकिस्तान में क्या बोला जाता है, क्या लिखा जाता है. हिंदुस्तान का सामान्य इंसान भी कभी स्वीकार नहीं करेगा. ये चिंता का विषय है कि दुर्भाग्य से विरोधी दल के लोग पाकिस्तान की हर बात को अपनी बात बनाने लगे हैं. चुनाव तो हिंदुस्तान में बहुत आते हैं. हमारे यहां तो हर छह महीने में चुनाव होते हैं. अगर कोई चुनाव के साथ जोड़कर बात करता है, तो इससे बड़ी दूसरी गलती क्या हो सकती है.

आपकी सरकार का क्लीयर स्टैंड है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करेगा, उसके साथ कोई समझौता नहीं हो सकता. लेकिन चीन लगातार पाकिस्तान को समर्थन देता रहा है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी मसूद अजहर के मुद्दे पर उसने चौथी बार वीटो लगाया, हम चीन पर कैसे डील करेंगे?

चीन के साथ हमारे द्विपक्षी संबंध ऐसे हैं कि भारत का निवेश वहां और वहां का निवेश हमारे यहां हो रहा है. हमारे नेता वहां जाते हैं, उनके नेता यहां आते हैं. इस बीच भी सीमा विवाद है. सीमा विवाद अभी सुलझा भी नहीं है. भारत का एक पक्ष है, चीन का दूसरा पक्ष है. इसलिए दोनों देशों ने मन बनाया है कि हम अपने डिफरेंसेज को स्वीकार करके चलें. हम कोशिश करें कि डिफरेंसेज डिस्प्यूट में कन्वर्ट न हों. अगर ऐसा कुछ होता है तो हायर लेवल पर एकदूसरे के पास बात पहुंचाई जाए. ये प्रक्रिया हायर लेवल पर चलती रहती है. जहां तक अंतरराष्ट्रीय संबंंधों में उनके स्टैंड की बात है तो यह हर देश अपने-अपने तरीके से तय करता है. जैसे हम कई बातोंं में हम फिलिस्तीन के साथ होते हैं. कई में इजरायल के साथ होते हैं, कई बार ईरान के साथ होते हैं और कई बार अरब देशों के साथ होते हैं. इसलिए हर देश अपने-अपने हित में कुछ न कुछ राजनीति के तहत सोचता है.
मुझे विश्वास है, देश समझेगा कि एक जमाने में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अकेला रूस हमारे साथ होता था और सारी दुनिया पाकिस्तान के साथ होती थी. अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है. आज अकेला चीन पाकिस्तान के साथ है और पूरी दुनिया भारत के साथ है. इस बदलाव को हमें समझना चाहिए और यही भारत की सफलता है. हर मीटिंग में हर मुद्दे पर चर्चा होती है. उनमें ये भी मुद्दे होते हैं.

चीन का भारत के साथ बहुत बड़ा व्यापार है, अगर देश की जनता कहती है कि हमें चीन के प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट करना है, तो क्या ये सही है. कई लोग मानते हैं कि भारत में चीन के निवेश को रोक देना चाहिए. इस पर क्या आप सहमत हैं?

आज की दुनिया बायपोलर नहीं है. इस ग्लोबलाइज युग में हर देश एक-दूसरे पर निर्भर है और जुड़ा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय कानून भी है. डब्ल्यूटीओ के हम भी सदस्य हैं. एक सरकार के नाते ऑफिशियल स्टैंड तो हमारा अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक ही रहना चाहिए. भारत इसका पालन भी करता है. जहां तक नागरिकों को क्या चीजें लेनी चाहिए, किन चीजों का उपयोग करना चाहिए, वो उनकी सूझबूझ पर निर्भर करता है. नागरिकों का हमें मार्गदर्शन करते रहना चाहिए.

अटल बिहारी वाजपेयी ने जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत की बात की थी. आपने मुझसे पिछले इंटरव्यू में कहा था कि कश्मीर को विकास चाहिए, कश्मीर को विश्वास भी चाहिए लेकिन उसके बावजूद कश्मीर के हालात लगातार खराब होते चले गए. कश्मीर का युवा अलग हो रहा है और बहुत तेजी से जेहादी समूहों की तरफ जा रहा है. आपकी नजर में ये समस्या कैसे हल हो सकती है?

कश्मीर की समस्या बेहद पुरानी है. अच्छा होता अगर ये जम्मू-कश्मीर का मामला सरदार बल्लभभाई पटेल के पास होता तो आज जो मुसीबत हम झेल रहे हैं, वो नहीं झेलनी पड़ती. उन्होंने इसका रास्ता वैसे ही निकाला होता, जैसे जूनागढ़ का निकाला, जैसे निजाम का निकाला. ये मामला पंडित नेहरू ने अपने पास रखा और तभी से विवादों में घिरा है. अब तक हमारे हजारों जवान मरे हैं. विकास के लिए बजट में कभी कोई कमी नहीं आई. भारत की तरफ से कभी कश्मीर के साथ अन्याय नहीं हुआ. इस समस्या को समझकर हल निकाला जाना चाहिए. इस पर पहले की सरकारों में कोई न कोई कमी रही है. दूसरी बात है, लद्दाख में कोई परेशानी है, नहीं है. जम्मू में कोई दिक्कत है, नहीं है. श्रीनगर के अंदर वैली में ढाई जिलों मेंं यह समस्या है. इन ढाई जिलों की घटनाओं को हम पूरे जम्मू-कश्मीर की घटनाओं के रूप में देखते हैं. ये दृष्टिकोण बदलना चाहिए.

जम्मू-कश्मीर में हो रहे काम तारीफ के काबिल हैं. स्पोर्ट्स में बच्चे निकल रहे हैं. टॉपर्स बच्चे दूसरी यूनिवर्सिटीज में जा रहे हैं. आज हिंदुस्तान की टॉप यूनिवर्सिटी में कोई न कोई कश्मीर का बच्चा पढ़ता है. इसे हमें बढ़ावा देना चाहिए. अभी वहां पंचायत चुनाव में 70 से 75 फीसदी वोटिंग हुई. हजारों की तादाद में पंच-सरपंच जीतकर आए. अब कई दिनों से लटके काम शुरू हो गए हैं. उनको अवसर मिल गया. जम्मू-कश्मीर में अब निवेश होना चाहिए, नए रोजगार पैदा होने चाहिए. लेकिन नए रोजगार की राह में वहां के आर्टिकल 35A और 370 रुकावट बने हुए हैं. इसीलिए कोई निवेश करने के लिए वहां नहीं जाता है. वहां आप IIM बनाओ, लेकिन कोई प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं है. प्रोफेसर जाएगा और उसके बच्चों को एडमिशन चाहिए, तो कानून आड़े आता है. उसको मकान चाहिए, तो कानून रुकावट बनता है. इन कानूनों के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों का बहुत नुकसान हुआ है. जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए कुछ ऐसे नियम बनाकर पंडित नेहरू गए हैं जो बहुत मुश्किल कर रहे हैं. उनको फिर से देखने की जरूरत है.

कश्मीर में विधानसभा चुनाव कब तक होने की उम्मीद है? क्या मुफ्ती मोहम्मद सईद से गठबंधन गलत कदम था?

वो एक प्रयोग था. नागरिकों ने जो बहुमत दिया था, वो फ्रैक्चर्ड मैनडेट था. कोई भी एक दल सरकार नहीं बना सकता था. हम लंबे समय तक आशा करते रहे कि PDP और NC के लोग मिलकर सरकार चलाएंगे लेकिन उनका मेल बैठा नहीं. अब लोकतंत्र का तकाजा ये था कि वहां सरकार बने. मुफ्ती साहब सीनियर थे. दो-तीन महीने के बाद बातचीत शुरू हुई. हमने खुलकर कहा कि हम दो ध्रुव के लोग हैं. हमारी विचारधारा मेल नहीं खाती लेकिन व्यवस्था देने के लिए हम जिम्मेदारी लेने आगे आए. हम प्रयोग के रूप में कोशिश करेंगे. मुफ्ती साहब थे, तब तक कुछ अच्छी चीजें हुई भीं. बाद में महबूबा जी आईं, पहले दो-तीन महीने तो वो आगे नहीं आईं. राज्यपाल शासन लग गया. इसके बाद वो आगे आईं, उन्होंने हमारा सहयोग मांगा और हमने सहयोग दे दिया. लेकिन जब पंचायतों के चुनाव का मुद्दा आया तो वो टालती रहीं. कहने लगीं खून-खराबा हो जाएगा, लोग मर जाएंगे. बंगाल में पंचायत चुनाव में हिंसा हुई और लोग मारे गए, जबकि जम्मू-कश्मीर में चुनाव उतना ही शांत रहा. जम्मू-कश्मीर में बिल्कुल हिंसा नहीं हुई. एक भी घटना नहीं हुई. मैं मानता हूं कि निष्पक्ष मीडिया भी इस बात को दिखाए कि जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या काम हो रहे हैं.

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आपकी पार्टी हमेशा से आर्टिकल 35A और 370 को हटाने की बात करती रही है, ये बीजेपी के मेनिफेस्टो का हिस्सा भी है. आप भविष्य में इस विषय से कैसे निपटेंगे? क्योंकि महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और कश्मीरी नेताओं ने कहा है कि ऐसा करने से कश्मीर का भारत से संबंध खत्म हो जाएगा.

कश्मीर की समस्या की जड़ में वहां बैठे कुछ राजनीतिक परिवार हैं. इतने साल इन्हीं कुछ परिवारों ने सारी मलाई खाई है. ये कश्मीर के सामान्य नागरिकों को कोई फायदा नहीं पहुंचने देते हैं. ये मुद्दों को इमोशनल बनाकर अपनी राजनीति चला रहे हैं. इन दिनों भारत सरकार की तरफ से इनकम टैक्स विभाग हवाला और भ्रष्टाचार को लेकर वहां काम कर रहा है.
आप हैरान हो जाएंगे, आतंकी घटना के समय पाकिस्तान से पैसे लेकर पत्थर मारने वाले तो आ जाते हैं लेकिन वही नागरिक एनआईए या इनकम टैक्स की रेड और भ्रष्टाचारियों पर कदम उठाने केे दौरान बाहर खड़े होकर ताली बजाते हैं. कश्मीर का सामान्य नागरिक इन लोगों से मुक्ति चाहता है. कुछ परिवारों ने 50 साल से वहां कब्ज़ा किया हुआ है. इसलिए अब कश्मीर की जनता ही बदलाव चाहती है, चाहे फिर आर्टिकल 35ए का मामला हो या 370 का.

आपकी पार्टी अपने चुनावी अभियान में राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बना रही है. विपक्ष का कहना है कि ऐसा करके बीजेपी बेरोजगारी और किसानों की बदहाली जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाह रही है.

राष्ट्रवाद का मतलब है 'भारत माता की जय'. अगर मैं भारत माता की जय बोलता हूं और अगर मेरी भारत माता गंदी है तो फिर वो राष्ट्रवाद है क्या? अगर मैं भारत माता को स्वच्छ करने का अभियान चलाता हूं, तो वो राष्ट्रवाद है कि नहीं? अगर गरीब के पास रहने के लिए घर नहीं है और मैं घर बनाता हूं तो ये राष्ट्रवाद है कि नहीं? अगर मैं भारत माता की जय बोलता हूं लेकिन अगर हमारा गरीब बीमार है और वो अस्पताल तक जाने का इंतजार कर रहा है. वो मौत का इंतजार कर रहा है. अगर आयुष्मान भारत योजना के तहत उसको पांच लाख तक की दवाई की मदद मिलती है तो ये राष्ट्रवाद है कि नहीं?
हमारे देश के किसान आधुनिक खेती करें, अन्न उत्पादन करें, अन्न के पूरे दाम पाएं, एमएसपी लागू करूं, लागत का डेढ़ गुना कीमत दूं तो ये राष्ट्रवाद है कि नहीं? देश के जवानों को ताकतवर बनाने के लिए आधुनिक हथियार और सामग्री उपलब्ध करवा सकूं तो वो राष्ट्रवाद है कि नहीं? इसलिए राष्ट्रवाद की परिभाषा व्यापक है. भारत माता की जय इसका मतलब होता है, 130 करोड़ देशवासियों के सपनों की जय. राष्ट्रवाद इन अर्थों में व्यापक है और हमारा राष्ट्रवाद जन-जन के कल्याण के लिए है.

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राष्ट्रवाद के अलावा वो कौन-कौन से मुद्दे हैं, जिनके आधार पर इस बार आपकी पार्टी लोगों से वोट मांगने जा रही है?

एक तो विकास. विकास के मुद्दे पर भी हमारा मानना है कि दो पटरियों पर विकास चलता है, पहला, सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूसरा, फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर. भारत के अंदर बहुत लोग ऐसे हैं जिनको अभी भी प्राथमिक सुविधाएं पहुंची नहीं हैं. जिसके पास घर नहीं है, उनको घर देना, जिसके पास दवाई नहीं है, उनको दवाई देना. जिसके पास शिक्षा नहीं है, उनको शिक्षा देना, स्वास्थ्य सेवाएं आदि. भारत का हर नागरिक सम्मान और निश्चिंतता के साथ जी सके, इस बात का ख्याल रखना हमारी प्राथमिकता है.
भारत का मिडिल क्लास हमारे देश की बहुत बड़ी ताकत है, जिसे पिछली सरकारों ने नकारा. हमारी नजर में मिडिल क्लास नीति-नियमों और कानून का पालन करता है, सरकार को टैक्स देता है और सरकार से बहुत कम मांगता है. इस तबके की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है. कांग्रेस पिछले तीन-चार दिनों से जिस प्रकार मध्य वर्ग के बारे में अनाप-शनाप बोल रही है, यह स्थिति ठीक नहीं है.
उसी प्रकार से, भारत का ग्रामीण अर्थतंत्र है. भारत के किसानों की आय दोगुनी करने की बात हमने कही है. साथ ही, किसानों और खेत मजदूरों को 60 साल के बाद पेंशन मिले. इस पेंशन का अर्थ यह नहीं है कि किसान कुछ न करे बल्कि वह जब तक दम है, अपना काम करता रहे, सरकार उसके साथ होगी. इस बारे में हम विस्तृत योजना बनाएंगे.
इसी कड़ी में, छोटे दुकानदारों की बात भी हमने की. ये छोटे दुकानदार, जो रोज कमाते हैं और परिवार पालते हैं, उनके लिए पेंशन की व्यवस्था के बारे में भी हमने बजट में योजना की बात कही है. हम चाहते हैं कि हमारे देश में 100 लाख करोड़ का निवेश आए ताकि भारत नए आयाम छुए. रोजगार के ढेरों अवसर पैदा हों. हमारा संकल्प पत्र जमीन से जुड़ा हुआ है. पांच साल सरकार में रहने के बाद पूरी जिम्मेदारी के साथ हमने इसे बनाया है. हम जानते हैं कि अगले पांच साल में हमें ही इस लक्ष्य को पाना है, ये सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए नहीं है. हमारा संकल्प पत्र 24 घंटे की वाहवाही लूटने के लिए नहीं, बल्कि 2024 तक आम जनता की जिंदगी बदलने के लिए है.

कहीं न कहीं विपक्ष आपको राफेल के मुद्दे पर घेरना चाह रही है. यहां तक कि उन्होंने कहा कि चौकीदार चोर है. आपने इस पर पलटवार किया और कहा कि मैं भी चौकीदार. तो ये कहां से उठा और इसको आप कैसे हम लोगों के बीच में लाए?

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जहां तक राफेल का सवाल है. पहले तो विरोधी दल भी इसके साथ जुड़ा नहीं था. लेकिन, फिर एक व्यक्ति बार-बार झूठ दोहराते गए और हर जगह पर उनकी पिटाई होती गई. सुप्रीम कोर्ट तक उनको मुंह की खानी पड़ी, सीएजी जैसी संस्थाओं के सामने भी उन्हें करारी मात मिली. यहां तक कि कई पत्रकारों ने भी ये सवाल उठाया कि बोफोर्स कांड में तो भ्रष्टाचार के सबूत मिलते थे लेकिन यहां आधार के बिना तुम बोलते रहते तो कितने दिन चलेगा.
उनके सलाहकारों ने भी उन्हें बताया कि राफेल का मुद्दा चुनाव जिताने वाला नहीं है, इसलिए इसे छोड़ दें. लेकिन उनके पिताजी का जो पाप है बोफोर्स का, उसको धोने की फिराक में ये वो करते रहते हैं. कांग्रेस को लगता है कि कांग्रेस सरकार का पतन रक्षा सौदों के कारण हुआ था. इसलिए वो दूसरी सरकारों को भी रक्षा सौदों में फंसाने की कोशिश करती है.
ऐसा कांग्रेस करती रही है. आपको याद होगा कि अटल जी की सरकार में भी जॉर्ज फर्नांडीस को ऐसे ही किसी सौदे में फंसाने की कोशिश की गई थी, लेकिन यूपीए सरकार में उस मामले का सच सामने आ गया कि ऐसा कोई घपला नहीं हुआ था. अब भी वो यही कर रहे हैं. इसलिए ये मुद्दा चल नहीं रहा है और चलने वाला भी नहीं है. विपक्ष के ही एक नेता का बयान है कि मोदी पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. तो इसलिए ये लाख कोशिश कर लें, भारत की जनता झूठ कभी स्वीकार नहीं करती है. भारत की जनता में भी समझदारी है. वो समझते हैं लोगों को.
जहां तक चौकीदार का सवाल है, 2013-14 में मैं लोकसभा के चुनाव का प्रचार कर रहा था, तब मैं लोगों को कहता था, 'आप मुझे चौकीदार का काम दीजिए' और मैं भारत के खजाने पर किसी 'पंजे' को पड़ने नहीं दूंगा. यही आज मैं कहता हूं, मैं चौकीदार हूं, और मैं किसी का पंजा नहीं पड़ने दूंगा. अगर कोई कुछ गलत करता है तो मैं कानून और कठोर करने की दिशा में काम कर रहा हूं, एक्शन लेता जा रहा हूं. सरकार आज एक वातावरण बनाने में सफल हुई है. ईमानदारी को प्रोत्साहन देने की.

कांग्रेस का कैंपेन जो चला है वो कहता है 'अब होगा न्याय'. 'न्याय योजना' में न्यूनतम 20 फीसदी लोगों को 6000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है. कहा है कि 72 हजार रूपये साल में मिलेगा. आप इस स्कीम को कैसे देखते हैं. क्या ये इनके लिए गेम चेंजर साबित हो सकतीी है?

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उनका जो मुख्य मंत्र है वो है, 'अब होगा न्याय'. इसका मतलब ये हुआ कि वो ये स्वीकारते हैं कि 60 साल के शासनकाल में उन्होंने अन्याय किया. जब ये न्याय की बात करते हैं तो 1984 के दंगों के पीड़ित सिखों के साथ जुल्म हुआ, वो भी न्याय मांग रहे हैं, क्या वो उनको न्याय देंगे. ट्रिपल तलाक से पीड़ित बहनें भी न्याय मांग रही हैं, क्या कांग्रेस की ये स्कीम उन्हें न्याय देगी? छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के जिन किसानों से कर्ज माफी का वादा किया गया था, वो किसान न्याय मांग रहे हैं कि आपने तो 10 दिन कहा था 100 दिन हो गए, न्याय कब मिलेगा. भोपाल के गैस पीड़ित न्याय मांग रहे हैं कि क्यों आपने गुनहगारों को विदेश जाने के लिए हवाई जहाज की व्यवस्था कर दी थी, वो न्याय मांग रहे हैं?
इसके साथ ही देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक नंबी नारायण न्याय मांग रहे हैं, जिन्हें झूठे केस में फंसाकर कांग्रेस सरकार ने जेल में डाल दिया. अब कांग्रेस उन्हें न्याय देगी? समझौता केस में झूठे मामलों में जेल में डाल दिए गए लोग न्याय मांग रहे हैं. समझौता केस में कांग्रेस ने हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द जोड़ दिया, देश का हिंदू न्याय मांग रहा है कि आपने उनको आतंकवादी क्यों कहा. नरसिम्हा राव ने कांग्रेस के लिए जीवन दिया, लेकिन उनके शव को कांग्रेस के दफ्तर में नहीं जाने दिया गया, नरसिम्हा राव की आत्मा भी न्याय मांग रही है. देश के महापुरुष बाबासाहब आंबेडकर, सुभाषचंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल भी न्याय मांगते हैं कि इतिहास में उन्हें उचित स्थान क्यों नहीं मिला. उनको हर बार इस प्रकार से नीचा दिखाने की कोशिश क्यों की गई. तो न्याय मांगने के लिए देश के हर कोने से आवाज़ उठ रही है और मैं नहीं मानता हूं कि कांग्रेस उन्हें न्याय दिला पाएगी.

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2019 के चुनाव को लेकर मेरा सीधा सवाल है, आप कितनी सीटें बीजेपी और एनडीए को देते हैं इस बार के चुनाव में?

'एक भी सीट मैं नहीं देता हूं, देश की जनता देती है.' सवा सौ करोड़ देशवासियों ने भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाने का मन बना लिया है. भारतीय जनता पार्टी 2014 में जो सीटें मिली थीं, इससे कहीं ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाएगी. हमारे जो एनडीए के साथी हैं, वे भी पहले से अपनी ताकत बढ़ाएंगे और कुल मिलाकर एनडीए की ताकत आज जो है उससे भी ज्यादा बढ़ेगी. जिस आत्मविश्वास के साथ, जिस समर्पण भाव के साथ हमने देश की सेवा का काम किया है, आने वाले पांच साल उतने ही कमिटमेंट के साथ, उतने ही समर्पण भाव के साथ इस काम को आगे बढ़ाएंगे.

पिछली बार बीजेपी ने हिंदी हार्टलैंड में लगभग सभी सीटें जीती थीं. उत्तर प्रदेश में 73, कहीं 26 में से 26, कहीं 27 में से 25 और कहीं 25 में से 25 सीटें. इस बार कैसे संभव होगा इस आंकड़े को अच्छा करना?  

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अगर इसी आंकड़े से चलते तो त्रिपुरा के चुनाव परिणाम को कैसे देखेंगे. जहां भारतीय जनता पार्टी का एक भी विधायक जीतता नहीं था. आज त्रिपुरा के अंदर तीन-चौथाई बहुमत के साथ हम सरकार चला रहे हैं. अगर इन्हीं समीकरणों को देखते तो हम कभी आगे ही नहीं बढ़ते. हम 1984 में दो सीट पर थे और आज 2014 आते-आते हिंदुस्तान में पहली गैर-कांग्रेसी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी है. मैं समझता हूं कि अर्थमेटिक और राजनीति का इस प्रकार का मेल नहीं होता है.

साल 1993 में जब, कांशीराम और मुलायम साथ में आए थे तो नारा था, 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम' का नारा चला था. तो इस बार क्या आपको लगता है कि जो 42 से 45 फीसदी का वोटशेयर बन रहा है इस गठबंधन का, उससे आपको कोई चिंता नहीं है?

जो लोग आपस में दुश्मन थे. एक-दूसरे को मारने-काटने पर तुले थे, वे दल जब गले लग रहे हैं तो इसका मतलब ये है कि जमीन खिसक चुकी है. वो अपने बचाव के लिए इधर-उधर की कोशिश कर रहे हैं. बच पाएंगे, ऐसा मुझे लगता नहीं है.

मायावती ने खुलकर कहा है कि मुस्लिम महागठबंधन को वोट करें. वोट बंटना नहीं चाहिए. क्या आपको लगता है कि चुनावों में ध्रुवीकरण होगा? ऐसे बयानों को आप कैसे देखते हैं?

लगातार पराजय के कारण हताश हुईं मायावती जी. इस प्रकार की बातें कहें इसे मैं बहुत स्वाभाविक मानता हूं. मुसलमानों को स्पेशल वोट करने के लिए अपील करना ये सब चुनाव आयोग का विषय है. लेकिन मुझे चिंता मायावती की कम है, क्योंकि अब वो डूबती हुई नैया हैं और बचने के लिए मुसलमानों का सहारा ढूंढ रही हैं. मैं उनकी मुसीबत समझ सकता हूं.
मेरी चिंता देश में 24 घंटे सेक्युलर झंडा लेकर घूमने वालों से है. उनके मुंह पर ताला क्यों लग गया है. अगर ऐसी ही बात किसी ने हिंदू समाज के लिए बोल दी होती, तो ये कितनी उठापटक करते. कितने अवॉर्ड वापसी वाले निकल आते. कितने हस्ताक्षर वाले निकल आते. ये जमात चुप क्यों है? देश के लिए चिंता का विषय है ये जमात और आपसे भी मेरा आग्रह है कि ऐसी जमात को एक्सपोज करने की जरूरत है. ये जमात इस प्रकार की सलेक्टिव क्यों है? क्या इससे उनके सेक्युलरिज्म को कोई चोट नहीं पहुंची. क्या ये उनके सेक्युलरिज्म को बढ़ावा देने वाली चीज थी? इसलिए सबसे बड़ा खतरा ये नकाबी लोगों का है. मायावती की तो मजबूरी है. कैसे भी करके बचना है तो वोट मांगने के लिए इधर-उधर कोशिश करती रहेंगी.

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पिछले पांच साल में बीजेपी ने बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर में काफी काम किया है. आपको यहां से कितनी सीटों की अपेक्षा है. क्या आपको लगता है कि बंगाल में आप अपनी सीटों की संख्या काफी आगे ले जा पाएंगे?

हिंदुस्तान के हर कोने में भारतीय जनता पार्टी अपना प्रभुत्व बढ़ाएगी. हमारी संख्या भी बढ़ेगी. देश के हर कोने में हम बढ़ने वाले हैं. जहां पूरी की पूरी सीटें हैं, वहां मेंटेन करेंगे और वोट शेयर बढ़ाएंगे. जहां एक-दो कम हैं, वो भी पूरी हो जाएंगे. पूरे देश में एक लहर चल रही है. आप नॉर्थईस्ट में जाइए या कच्छ के रेगिस्तान के गांव में जाइए, पूरे देश में लहर चल रही है.

पश्चिम बंगाल में अमित शाह कह रहे हैं 23 सीटों से ज्यादा लाएंगे, ओडिशा में भी 11-12 सीट की बात हो रही है. क्या लगता है कि ऐसा हो पाएगा?

मैं आंकड़ों में नहीं जाता हूं. लेकिन हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई सर्वाधिक मेहनत करने वाले नेता हैं. मेरे प्रवास को तो मीडिया में जगह मिलती है लेकिन उनके प्रवास की चर्चा कम होती है. मैं देखता हूं कि हिंदुस्तान में शायद ही किसी राजनीतिक दल का अध्यक्ष इतनी मेहनत करता है. सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, साल के हर दिन हर जिले तक जाना, लोगों से मिलना, वहां की समस्याओं को समझना, ऐसा अद्भुत परिश्रमी नेतृत्व आज भारतीय जनता पार्टी को मिला है. इसलिए उनके असेसमेंट में मैं और ज्यादा भरोसा करता हूं.

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तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में क्या आपका चुनाव बाद केसीआर और जगन मोहन से कोई गठबंधन हो सकता है. क्या चुनाव के बाद ऐसी कोई संभावना है?

भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से जीतेगी. पहले से ज्यादा सीटें आएंगी. एनडीए एक अतिरिक्त ताकत हमारे पास है, उसकी सीटें भी बढ़ने वाली हैं. देश में सरकार बनाने के लिए बहुत से भी अच्छी स्थिति में हम होंगे. इसलिए सरकार बनाने में हमें कहीं पर भी किसी की मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन हमारा मकसद सिर्फ सरकार बनाना नहीं है, हमारा मकसद सिर्फ सरकार चलाना नहीं है. हमारा मकसद देश चलाना है, देश बढ़ाना है. और जब देश चलाना और देश बढ़ाना है तो बहुमत के आधार पर नहीं होता है, सर्वमत के आधार पर होता है. इसलिए हमारा ये सैद्धांतिक मत है कि एक सांसद भी चुना गया होगा, तो भी हम उसे साथ लेकर के चलेंगे. कोई भी दल हमारा कितना भी विरोधी क्यों न हो, घोर विरोधी क्यों न हो, उसको भी हम साथ लेकर चलेंगे क्योंकि देश को आगे बढ़ाना हमारा लक्ष्य है.

आपके मेनीफेस्टो में एक बार फिर राम मंदिर मुद्दे की बात कही गई है. लेकिन ज्यादातर आपके नेता पिछले कुछ छह महीनों से राम मंदिर के मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं बोलते. क्या ऐसा लगता है कि ये अब जरूरी मुद्दा नहीं रह गया है?

परेशानी मीडिया की है. बोलें तो कहते हैं कि हिंदुत्व के सिवाय आपके पास कोई मुद्दा नहीं है. न बोलें तो आप कहते हैं कि राम मंदिर पर बोलते क्यों नहीं हैं. यह दिक्कत मीडिया की है. भारतीय जनता पार्टी इस विषय पर अपने स्टैंड पर कायम है. हमने एक सैद्धांतिक स्टैंड लिया हुआ है और इसमें हमने कभी बदलाव नहीं किया.

 प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश में कैंपेन करने के फैक्टर को कितना महत्व देते हैं. क्या लगता है इससे कांग्रेस की संख्या में कोई फर्क पड़ेगा?

मैं समझता हूं कि मुझे किसी भी व्यक्ति विशेष को लेकर चर्चाओं में नहीं उतरना चाहिए.

राहुल गांधी के दो जगहों से चुनाव लड़ने को कैसे देखते हैं. वायनाड से उन्होंने लड़ने का फैसला लिया है?

कोई भी दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है. संविधान में व्यवस्था है, लड़ सकता है. दो सीट पर लड़े वो बुरी बात नहीं है. चर्चा का विषय अमेठी से भागना पड़ा, वो है. जो दशकों से एक परिवार की विरासत रही है, वहां से भागने के लिए मजबूर होना ये चर्चा का विषय है.

आपने गांधी परिवार पर काफी हमले किए हैं, पिछले चार-पांच सालों में...

जी नहीं, मैंने कभी नहीं किया है. मैं वंशवाद का सैद्धांतिक विरोध करता हूं. व्यक्तिगत मैंने कभी किसी पर हमला नहीं किया है. इसलिए इस प्रकार से सहानुभूति लाभ लेने के लिए, मोदी हमारे साथ ये कर रहे हैं, मोदी हमारे साथ वो कर रहे हैं. मेरा कोई विरोध नहीं है, सिर्फ सैद्धांतिक विरोध है. वंशवाद भारत के लोकतंत्र के लिए खतरा है. ये मैं नहीं कह रहा हूं, बाबा साहब अंबेडकर ने अनेक बार इस बात को कहा है और मैं बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति बहुत श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति हूं.

भ्रष्टाचार पर भी आपने गांधी परिवार पर काफी उंगली उठाई है पिछले सालों में...

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करप्शन पर उंगली मैंने नहीं उठाई. करप्शन हमारा मुद्दा है. जैसे कल भोपाल में हुआ. 'भ्रष्टनाथ' कुछ भी बोल दें इससे बात बनती नहीं है. क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए कि नहीं चाहिए? आप मुझे बताइए, नेशनल हेराल्ड का केस, क्या हमारे समय में हुआ था? लालू यादव का केस, क्या हमारे समय में हुआ था? हमारा मानना है कि जो प्रक्रियाएं ठंडे बस्ते में डाली गई थीं उनको कानूनी तौर पर आगे बढ़ना चाहिए. अब उनको जमानत पर आना पड़ा.. तो गुनहगार को जमानत पर आना पड़ता है. मैं कौन होता हूं उनको कहने वाला, उन्होंने गुनाह किया है, इसलिए जमानत पर घूम रहे हैं मां-बेटा दोनों.

आपने सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान के बारे में बहुत सारी बातें की हैं. तमाम नेताओं के योगदान के बारे में बात की है. पंडित जवाहर लाल नेहरू के बारे में आपके क्या विचार हैं?

मैं लाल किले से बोला हूं और देश का पहला प्रधानमंत्री हूं जो बोला हूं. इसके पहले किसी ने बोला नहीं है. मैं संसद के अंदर बोला हूं कि देश आज जहां पर पहुंचा है, उसमें सभी सरकारों का कोई न कोई योगदान है. हर राज्य सरकार का भी कोई न कोई योगदान है. उन सरकारों को चलाने वालों का भी योगदान है. ये मैंने हमेशा कहा है. लेकिन हमारी शिकायत ये है कि सरदार वल्लभ भाई अगर देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की प्राथमिकता अलग होती, देश की गति अलग होती. देश नई ऊंचाइयों पर बहुत पहले पहुंच गया होता. 2014 में आने के बाद मुझे जो आज टॉयलेट बनाने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ रही है, सरदार वल्लभ भाई पटेल होते तो शायद ये पहले हो गया होता.

पिछले पांच साल में इकोनॉमी की प्रोग्रेस के बारे में क्या कहना चाहेंगे? क्या आप सात परसेंट प्लस ग्रोथ से खुश हैं?

अगर कोई व्यक्ति विकास में विश्वास करता है तो 10 परसेंट के बाद भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए. कभी-कभी असंतोष भी ऐसी उर्जा भरता है जो नया करने की प्रेरणा देता है. कितना ही अच्छा करूं, बढ़िया से बढ़िया करूं लेकिन मेरे भीतर के असंतोष को मैं हमेशा जिंदा रखता हूं. लेकिन आज हमारे लिए खुशी की बात है कि दुनिया भर की एजेंसियां और संस्थाएं मान रही हैं कि सबने एक स्वर से कहा है कि भारत दुनिया की बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में है. फिर भी मेरा मानना है कि भारत की क्षमताएं इससे भी ज़्यादा हैं और हम और आगे बढ़ना चाहते हैं.

आपके आलोचक और कई बड़े अर्थशास्त्री मानते हैं कि नोटबंदी उतनी कामयाब नहीं हुई जितनी कि बताई गई थी. यहां तक कि 99.9 फीसदी कैश इकोनॉमी में वापस आ गया. रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद 19 प्रतिशत कैश जारी करने की प्रक्रिया बढ़ी है. इससे इकोनॉमी को भी झटका लगा है. क्या आप मानते हैं जिस तरीके से नोटबंदी को लागू होना चाहिए था वो नहीं हुआ?

आपका हिसाब-किताब ठीक नहीं है. जिस गति से करंसी का वॉल्यूम बढ़ रहा था, उस गति से चलते तो आज हमारी करंसी का वॉल्यूम इससे कई गुना ज्यादा होता. दूसरी बात, नोटबंदी से नुकसान काला कारोबार करने वालों को हुआ. देश की आम जनता को नोटबंदी की वजह से कुछ समय की तकलीफ जरूर हुई लेकिन देशहित की भावना को समझते हुए जनता ने हमारा साथ दिया. उत्तर प्रदेश का चुनाव नोटबंदी के मुद्दे पर लड़ा गया जिसमें हम विजयी होकर आए. नोटबंदी से कई लोगों के काले खेल बंद हुए, अवैध कारोबार ठप हुए, इसलिए वो आज भी रो रहे हैं. लेकिन हिंदुस्तान की जनता जानती है कि उनके इस शोर की वजह क्या है. दूसरा पहलू ये है कि इसी नोटबंदी की वजह से हमारी अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ी है. आप देखिए कि आजादी के 60 साल में जितने लोग इनकम टैक्स के दायरे में थे, आज पांच साल में ये संख्या दोगुनी हो गई. छोटे से कमरों में गैर कानूनी रूप से चलने वाली, हवाला का धंधा करने वाली साढ़े तीन लाख कंपनियों को नोटबंदी के कारण खोजा जा सका. उनके गैर-कानूनी कामों पर ताले लगाए जा सके. इनसे करोड़ों रुपये सरकारी खजाने में पहुंचे. अगर हमने ये कदम नहीं उठाया होता तो शायद इसी तरह की पैरेलल इकोनॉमी चलती रहती. मकानों के दाम कम हुए क्यों हुए क्योंकि बेइमानी के पैसे गए, कालाधन गया तब जाकर होने लगा.

विपक्ष का आरोप है कि आपके कार्यकाल में रिजर्व बैंक, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और यहां तक कि कोर्ट की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाई गई है. सीबीआई के अंदर की लड़ाई बाहर आ गई. आपके कार्यकाल में आरबीआई के दो गवर्नर छोड़कर चले गए. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

कांग्रेस पार्टी ये जो मुद्दे उठाती है वो इतने वाहियात हैं. जब वो चुनाव हार जाते हैं तो चुनाव आयोग बेकार. उनके अनुरूप न्यायपालिका चले, इसके लिए दबाव डालने के लिए चीफ जस्टिस के खिलाफ अभियोग चलाते हैं और अपने अनुकूल फैसला लेने तक परेशान करते हैं. हर संवैधानिक संस्था को तबाह करने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया है. हमने पिछले पांच साल में हर संस्था को ताकतवर बनाने का काम किया है.
कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाकर देश की हर संस्था को तबाह कर दिया था, पूरे देश को जेलखाना बना दिया था. अगर ये लोग इस तरह की बात करते हैं तो इन्हें शोभा नहीं देता.

कुछ दिनों पहले लालकृष्ण आडवाणी ने कहा- नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट, आपने ट्वीट करके उनके बयान का पूरी तरह से समर्थन भी किया. आडवाणी ने ये भी कहा कि बीजेपी का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं को राष्ट्रविरोधी कहना गलत है. आप इस बात पर क्या कहते हैं?

बीजेपी के ही सिद्धांतों को आडवाणी जी ने दोहराया है. हम और बीजेपी का हर कार्यकर्ता यही कहता है. राष्ट्रवाद के संदर्भ में भी हमारी यही भूमिका है. विपक्षी दल इन मर्यादाओं को तोड़ते हैं. आपको याद है कि कांग्रेस के एक नेता ने अटल बिहारी वाजपेयी जी को गद्दार और देशद्रोही कहा था. इसलिए आडवाणी जी की बात बिल्कुल सही है कि इस तरह की भाषा को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

आपने जनता से वोट डालने की अपील की है. आपने मीडिया के साथ-साथ तमाम सेलिब्रिटीज से भी जागरूकता फैलाने की अपील की है ताकि लोग बाहर निकलें और वोट डालें. नेटवर्क 18 ने 'बटन दबाओ, देश बनाओ' कैंपेन लॉन्च किया है. आप देश के वोटरों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

मैं सभी मतदाताओं से आग्रह करना चाहता हूं कि जलपान करने से पहले सुबह-सुबह ही वोट करें. इसलिए मैं कहता रहता हूं, 'पहले मतदान बाद में जलपान'. दूसरा मेरा आग्रह है, मतदाता इन दिनों काफी जागृत हुए हैं. लंबी-लंबी कतार होती हैं. अच्छा होगा अपना पानी साथ लेकर जाएं. क्योंकि गर्मी के दिन हैं और मैं चाहूंगा कि बहुत शांतिपूर्ण मतदान हो. हम भारी मतदान करें, जहां भी आपकी पसंद हो वहां वोट डालें. विशेषकर मेरा नए मतदाताओं से आग्रह है जो पहली बार मतदान कर रहे हैं. क्योंकि जो पहली बार मतदान करने वाले लोकसभा चुनाव में, वो 21वीं सदी का उनका पहला मत है, उनके जन्म के बाद का. ये अपने आप में बड़ा गौरव है. हमारे देश में जो नए मतदाता हैं उनका बहुत सम्मान होना चाहिए क्योंकि वो पहली बार राष्ट्रीय मुद्दों पर निर्णय की भूमिका अदा करने जा रहा है. इसलिए जो फर्स्ट टाइम वोटर है मेरा उनसे विशेष आग्रह है कि आप जरूर मत डालिए.
मेरा दूसरा आग्रह है कि आजकल ऑनलाइन आप वेरिफाई कर सकते हैं कि आपका मतदाता सूची में नाम है या नहीं है. हम क्यों न इस काम को खुद कर लें. जितना जल्दी हो सके खोजें ताकि आखिरी दिन  जो दौड़-धूप होती है वो न हो. मैं सभी मतदाताओं को लोकतंत्र के इस पर्व में उमंग-उत्साह के साथ भागीदार बनने के लिए निमंत्रित करता हूं. लोकशाही अमर रहे इसी एक संकल्प के साथ हम आगे बढ़ें. ये ही मेरी सद्भावना है.

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