गुजरात: 'मोदी लहर' भुनाने की कोशिश में BJP, कांग्रेस ने उठाए मुद्दे

गुजरात: 'मोदी लहर' भुनाने की कोशिश में BJP, कांग्रेस ने उठाए मुद्दे
प्रतीकात्मक तस्वीर

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि गुजरात में कम से कम एक दर्जन लोकसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला हो सकता है. प्रधानमंत्री मोदी खुद चुनाव प्रचार के दौरान गुजरात में सात रैलियां कर चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2019, 6:31 PM IST
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(विजयसिंह परमार)

गुजरात में तीसरे चरण के दौरान 26 संसदीय सीटों और चार विधानसभा सीटों पर मतदान किया जा रहा है. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात में मंगलवार को मतदान भी किया.

गुजरात में दोपहर तीन बजे तक 50 फीसदी से ज़्यादा मतदान हो चुका था और इसी बीच, राज्य के चुनावी माहौल में कहा जा रहा है कि क्या भाजपा 2014 की तरह इस बार भी राज्य की पूरी 26 सीटों पर कब्ज़ा कर सकेगी? भाजपा को पता है कि मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के लिए गुजरात की अहम भूमिका होगी और पार्टी इसके लिए सभी कोशिशें कर रही है.



प्रधानमंत्री मोदी खुद चुनाव प्रचार के दौरान गुजरात में सात रैलियां कर चुके हैं. इन रैलियों में मोदी ने बार बार खुद को 'इस मिट्टी का बेटा' कहकर वोट मांगा है. भाजपा की चुनावी प्रचार रणनीति साफ है कि वो 'मोदी लहर' को भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है और सीट कोई भी हो, मोदी के नाम और चेहरे को आगे रखकर ही वोट मांगे जा रहे हैं.



दूसरी तरफ, कांग्रेस ने गुजरात में मुद्दे उठाने की रणनीति अपनाकर ग्रामीणों की समस्याओं के हल, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, बेरोज़गारी, नोटबंदी के बुरे असर और व्यापारियों के लिए जीएसटी का खराब क्रियान्वयन जैसे मुद्दे उठाकर वोट मांगे हैं. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि सुरेंद्रनगर, जामनगर, जूनागढ़, अमरेली, बनासकांठा, पाटण, मेहसाणा, छोटा उदयपुर, वलसाड, बारडोली, दाहोद और कच्छ लोकसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला हो सकता है.

लोकसभा सीटों पर ये हैं चेहरे
अमरेली में, भाजपा के वर्तमान सांसद नरन कछाड़िया के खिलाफ कांग्रेस ने परेश धनानी को चुनाव मैदान में उतारा है, जो गुजरात में नेता प्रतिपक्ष हैं. आनंद में, कांग्रेस ने भरतसिंह सोलंकी पर दांव खेला है जो पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी के बेटे हैं और संगठन में प्रदेश नेता का पद तक संभाल चुके हैं. 2004 और 2009 में सोलंकी ने चुनाव जीता था लेकिन 2014 में सोलंकी भाजपा के दिलीप पटेल के खिलाफ 63 हज़ार से कुछ ज़्यादा वोटों के अंतर से हारे थे.

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वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में आनंद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 7 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 5 जीती थीं और भाजपा के खाते में केवल दो सीटें गई थीं.

बारडोली में, कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता तुषार चौधरी मैदान में हैं जो पूर्व मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी के बेटे हैं. मनमोहन सरकार में तुषार राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. उत्तर गुजरात की साबरकांठा सीट से भाजपा ने वर्तमान सांसद दीपसिंह राठौड़ को टिकट दिया है जबकि यहां से कांग्रेस ने विधायक राजेंद्र ठाकोर को लोकसभा के रण में उतारा है. इस सीट पर ठाकोर, पटेल, क्षत्रिय और आदिवासियों की आबादी ज़्यादा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में साबरकांठा संसदीय क्षेत्र की 7 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 4 जीती थीं.

कांग्रेस को फायदे-नुकसान के समीकरण
वहीं लोकसभा चुनाव से कुछ ही पहले कांग्रेस का दामन थामने वाले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस के लिए गुजरात में स्टार प्रचारक के तौर पर सभाएं व रैलियां कर रहे हैं. दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक इस पर भी नज़र रख रहे हैं कि कांग्रेस से बागी हुए विधायक अल्पेश ठाकोर कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कितना नुकसान पहुंचाने वाले हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकोर की बगावत महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उत्तर गुजरात के बनासकांठा, पाटण और साबरकांठा क्षेत्रों में ठाकोर समुदाय के वोट अहम हैं.

कांग्रेस के लिए एक और बुरी खबर ये भी रही है कि कांग्रेस के विधायक जवाहर चावड़ा, पुरुषोत्तम साबरिया, वल्लभ धाराविया और आशाबेन पटेल जैसे नेता भाजपा में शामिल हुए हैं. चावड़ा, साबरिया और आशाबेन भाजपा के टिकट पर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार हैं. वहीं, जामनगर ग्रामीण विधानसभा सीट से भाजपा ने राघवजी पटेल को टिकट दिया है.

अंतत: 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात में कुल 63.66 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि राज्य में 1967 के बाद से सबसे बड़ा आंकड़ा था.

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First published: April 23, 2019, 6:31 PM IST
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