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जज लोया मामला: सिब्बल के 'मुख्य गवाह' ने HC जजों पर आरोपों के खिलाफ मांगी माफी

जज लोया मामला: सिब्बल के 'मुख्य गवाह' ने HC जजों पर आरोपों के खिलाफ मांगी माफी

जज लोया (फाइल)

जज लोया (फाइल)

सतीश उके ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आरोपों के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है.

    जज लोया मामले में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा बताए गए मुख्य गवाह कार्यकर्ता-वकील सतीश उके ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आरोपों के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है. उके की ओर से सिब्बल सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सामने पेश हुए और उन्होंने पीठ से छुट्टी मांगी जिससे वो हाईकोर्ट की बेंच के सामने पेश हो सकें और सभी आरोपों को वापस ले सकें.

    जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ये हाईकोर्ट की अवमानना है. अगर वे आपकी माफी स्वीकार करते हैं तो हम आपके रास्ते में नही आएंगे. पीठ ने उके को अपोलॉजी सबमिट करने और लौटने का समय दिया.

    लगभग एक साल पहले हाईकोर्ट ने उके को अदालत की आपराधिक अवमानना करने और जजों और दूसरे लोगों पर आरोप लगाने के लिए 2 महीने जेल की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने उके को वकीलों, जजों और अदालत के अधिकारियों के खिलाफ किसी भी कानूनी कार्यवाही की शुरुआत करने पर रोक लगाई थी.

    इसके बाद उके ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसे पिछले साल अगस्त में खारिज कर दिया गया था. जब उके ने अपने अपील की खारिज करने के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दायर की तो जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर जांच करने की सहमति दी. साथ ही कोर्ट ने ये शर्त रखी कि कोर्ट याचिका अस्वीकार करने के मामले में उनकी जेल की सजा बढ़ा सकता है.

    हालांकि इस मामले में तब नया मोड़ आया जब उके जस्टिस लोया मौत मामले पर कांग्रेस द्वारा बुलाए गए एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सिब्बल, सलमान खुर्शीद और रणदीप सुरजेवाला के साथ बैठे दिखाई दिए.

    सिब्बल ने उके को मामले का प्रमुख गवाह बताया. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बीएच लोया की मौत से पहले उनकी मदद की थी. सिब्बल ने बताया कि वह जुलाई 2017 में उनसे मिले और लोया की मौत के पीछे के गुत्थी को उन्हें समझाया. तब कांग्रेस ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

    प्रेस कांफ्रेंस में उके ने दावा किया कि तीन लोगों जिसमें वो और एक अन्य जज शामिल थे, जो रहस्मयी परिस्थितियों में मृत पाए गए थे, जज लोया की मौत से 3 हफ्ते पहले 2014 में एडवोकेट प्रशांत भूषण से मिले थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने भूषण से उनकी सुरक्षा के लिए मदद मांगी और वो जज लोया के जुड़े खतरे से वाकिफ थे, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में अपनी कोशिश कर रहे थे.

    लेकिन भूषण ने बाद में एक अखबार से बातचीत में बताया उन्हें उके के साथ मुलाकात की बात याद नहीं है. बता दें सुप्रीम कोर्ट एक अलग मामले में जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी.

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    Tags: Bombay high court, Supreme Court

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