कर्नाटक में पुराना वैरिएंट खात्मे की ओर, राज्य में ब्रिटेन और डबल म्यूटेंट वायरस का असर ज्यादा

निम्हांस की स्टडी के अनुसार, मार्च के अंत तक बेंगलुरु में यूके वैरिएंट और महाराष्ट्र के डबल म्यूटेंट कम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Coronavirus Variant एक्सपर्ट ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई भी स्ट्रेन किसी अन्य स्ट्रेन से ज्यादा गंभीर होता है. वायरोलॉजिस्ट ने कहा 'क्लीनिकल बिहेवियर को लेकर बात करें, तो वायरस वही है. हम ज्यादा गंभीर मामले इसलिए देख रहे हैं, क्योंकि हम पहले से 5 गुना ज्यादा मामले देख रहे हैं.'

  • Share this:
    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर शोध जारी हैं. इसी बीच निम्हांस (Nimhans) में वायरोलॉजी विभाग में जारी जीनोम सीक्वेंसिंग से एक अहम जानकारी मिली है. पता चला है कि कर्नाटक में मार्च से फैल रहे कोविड वायरस को महाराष्ट्र के डबल म्यूटेंट स्ट्रेन (B.1.617) और ब्रिटेन के स्ट्रेन (B.1.1.7) ने कम कर दिया है. इससे पहले राज्य में वायरस वैरिएंट (B.1.36.29) काफी तेजी से फैल रहा था.

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निम्हांस की स्टडी में 69 में से 36 मरीजों यानि 52 फीसदी में B.1.617 स्ट्रेन पाया गया है. जबकि, 19 यानि 27.5 फीसदी में B.1.1.7 की पुष्टि हुई है. ये सैंपल मार्च और अप्रैल के अंत के बीच इकट्ठे किए गए थे. स्टडी में यह भी पता चला है कि दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2021 की शुरुआत तक कर्नाटक में B.1.36.29 वैरिएंट तेजी से फैल रहा था. कोविड वायरस का यह रूप मार्च 2020 से ही फैल रहा था.

    रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में फैल रहे वायरस को महाराष्ट्र के डबल म्यूटेंट और ब्रिटिश वैरिएंट ने लगभग खत्म कर दिया है. इसे लेकर लैब में कोविड-19 जीनोमिक्स पर काम कर रहे प्रोफेसर वी रवि बताते हैं, 'ब्रिटेन और महाराष्ट्र के वैरिएंट्स से B.1.36.29 तेज संक्रामकता के बारे में बताता है.' उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन के वैरिएंट की उच्च संक्रामकता के बारे में जानकारी है, लेकिन इसे B.1.617 को लेकर जानकारी जुटाई जानी है.'

    हालांकि, उन्होंने जानकारी दी है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई भी स्ट्रेन किसी अन्य स्ट्रेन से ज्यादा गंभीर होता है. वायरोलॉजिस्ट ने कहा, 'क्लीनिकल बिहेवियर को लेकर बात करें, तो वायरस वही है. हम ज्यादा गंभीर मामले इसलिए देख रहे हैं, क्योंकि हम पहले से 5 गुना ज्यादा मामले देख रहे हैं.' उन्होंने साफ किया है, 'म्यूटेंट्स का गंभीरता से कोई लेना देना नहीं है. इस बात का कोई सबूत नहीं है.'

    निम्हांस की स्टडी के अनुसार, मार्च के अंत तक बेंगलुरु में यूके वैरिएंट और महाराष्ट्र के डबल म्यूटेंट कम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में थे. कर्नाटक में कोविड-19 के मामले में मार्च के अंत से इजाफा जारी है. इससे पहले कर्नाटक में मजबूत B.1.36.29 वैरिएंट बीते साल लॉकडाउन में सामने आया था. स्टडी के अनुसार, फरवरी 2021 के अंत तक यह वैरिएंट 20 से 30 प्रतिशत मामलों में देखा गया था.