कश्मीर: 'सच्चा जिहादी' बनने के लिए आपस में ही भिड़ गए हैं PAK समर्थक और खलीफा समर्थक आतंकी

आतंकी बुरहान वानी भी इस झगड़े से अलग नहीं था और वह भी पाकिस्तान में जम्मू-कश्मीर को शामिल करवाने के बजाए, खलीफा का शासन यहां लाने का सपना देखा करता था.

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Updated: July 17, 2019, 6:51 PM IST
कश्मीर: 'सच्चा जिहादी' बनने के लिए आपस में ही भिड़ गए हैं PAK समर्थक और खलीफा समर्थक आतंकी
कश्मीर में दो आतंकी धड़ों के बीच आपस में ही लड़ाई हो रही है (सांकेतिक फोटो)
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Updated: July 17, 2019, 6:51 PM IST
श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के ईदगाह में दो कब्रों पर 'शहीद' के पत्थर लगे हुए हैं. एक पत्थर है श्रीनगर के प्रमुख मौलाना मीरवाइज मोहम्मद फारुख का, दूसरा है उनके हत्यारे मोहम्मद अब्दुल्ला बांगरू का. मीरवाइज एक अलगाववादी था, जिसका सपना था भारत से अलग स्वतंत्र कश्मीर. जबकि बांगरू आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन का आतंकी था. वह कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने का ख्वाब लेकर 'जिहाद' की राह पर चल रहा था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार मई, 1990 में मीरवाइज की हत्या की गई थी और उसके एक महीने बाद बांगरू को भी उसके बगल में दफन कर दिया गया. इसके बाद दोनों की कब्रों पर 'शहीद' खुदवाया गया था. इस घटना ने घाटी में पाकिस्तान की ओर झुकाव रखने वाले जिहादियों और जम्मू-कश्मीर की आजादी के समर्थक जिहादियों के बीच जंग छेड़ दी थी. हालांकि उस वक्त यह माना गया था कि इस जंग में जीत पाकिस्तान समर्थक आतंकियों की जीत हुई है.

कश्मीर में आतंकियों के आज भी हैं दो धड़े
इस घटना को तो 29 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी कश्मीरी उग्रवादी दो धड़ों में बंटे हुए हैं. इनमें से एक धड़ा पाकिस्तान का समर्थक है, तो दूसरा धड़ा खलीफा का शासन लाने के लिए लड़ने वाले आतंकियों का है. पिछले महीने इस्लामिक स्टेट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (ISJK) के आतंकी को हिज्बुल ने ही मार दिया था. इसके बाद ISJK ने ऐलान भी किया गया था और कश्मीर में पाक समर्थित आतंकी समूह इस्लामिक जिहाद के नजरिए से गद्दार बताए गए थे. इससे पहले, अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने भी कहा था कि कश्मीर में 'जिहाद' खलीफा शासन स्थापित करने के लिए हो रहा है. उसने यह भी कहा था कि पाकिस्तान को ISI और आर्मी से मुक्त करने की जरूरत है.

ISJK और अंसार गजवात उल हिंद के बीच क्यों है तनातनी?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया है कि 90 के दशक में हिज्बुल की मुखबिरी पर जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (ये कश्मीर की आजादी के समर्थक हैं) के आतंकियों को मार गिराया गया था. अब अलकायदा और IS से जुड़े आतंकी गुट कश्मीर में ISJK और अंसार गजवात उल-हिंद की नजर अपनी वैसी ही पैठ बनाने की है. जिसको लेकर कभी कश्मीर की आजादी चाहने वालों और पाक समर्थकों के बीच खूनी संघर्स हुआ था.

कश्मीर युवाओं में बढ़ रही इस्लामी शासन की चाहत
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इन दोनों ही गुटों के बीच में नए दौर में युद्ध तब छिड़ा, जब 2014 में श्रीनगर में मुखौटे लगाए युवा IS के झंडे लहराते देखे गए. एक कश्मीरी अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान समर्थित हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी जब सोशल मीडिया का इस्तेमाल IS के विचारों को फैलाने को करने लगा. इतना ही नहीं बुरहान ने यह घोषणा भी कर दी थी कि वह खलीफा शासन स्थापित करने के लिए लड़ रहा है. बुरहान की लोकप्रियता से यह बात पूरी तरह से साफ हो चुकी थी कि कश्मीर के उग्रवादी युवा इस्लामिक स्टेट की ओर आकर्षित थे.

विशेषज्ञ कहते हैं कि बुरहान पाकिस्तान में जम्मू-कश्मीर को शामिल करवाने के बजाए, खलीफा का शासन यहां लाने का सपना देखा करता था. हालांकि उसके मारे जाने के बाद लगातार होने वाली हिंसा से साफ था कि कश्मीर के ज्यादातर आतंकवादी युवा बुरहान के ही विचार को फॉलो करने वाले हैं. बुरहान की विचारधारा के बारे में कई पुलिस वालों ने भी यही बात कही है.

आतंकी बुरहान वानी को 2016 में मार दिया गया था (फाइल फोटो)


अंसार गजावत उल हिंद का संस्थापक था जाकिर मूसा
एक जानकार ने बताया, वानी की अलग विचारधारा ही वह वजह थी, जिसके चलते वानी के उत्तराधिकारी जाकिर मूसा ने भी हिज्बुल से नाता तोड़ लिया और अलकायदा के सहयोगी संगठन से जुड़ गया. उसने 2017 में यहां अंसार गजवात उल हिंद के नाम से अलकायदा की प्रादेशिक शाखा खोल दी.

कश्मीर में दिखने लगे हरे पाकिस्तानी झंडे की जगह IS के काले झंडे
ये वही वजहें हैं, जिनके चलते पाकिस्तानी हरे झंडे की जगह आतंकी संगठन IS का काला झंडा दिखने लगा. कई आतंकियों को काले झंडे में समेटकर ही दफनाया जाता है. एक अधिकारी ने बताया है कि इस परंपरा के चलते एक बार इन दोनों गुटों में आपसी संघर्ष हो गया था. यह संघर्ष इतना बढ़ा कि मारे गए आतंकियों के शव से पाकिस्तान का झंड़ा हटाकर उसे IS के काले झंडे में लपेटा गया.

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First published: July 17, 2019, 6:38 PM IST
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