अपने कश्मीरी मुस्लिम दोस्त को रिहा कराने में जुटा VHP सदस्य

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Updated: August 25, 2019, 11:32 AM IST
अपने कश्मीरी मुस्लिम दोस्त को रिहा कराने में जुटा VHP सदस्य
फाइल फोटो.

विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) की अमृतसर शाखा के सदस्य राकेश खन्ना (Rakesh Khanna) गेस्ट हाउस की गेट पर मौजूद गार्डों से अंदर जाने देने की गुजारिश कर रहे थे, क्योंकि अंदर उसका दोस्त सोफी नजरबंद था.

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उत्तरी कश्मीर टॉउन (North Kashmir Town) में सरकारी गेस्ट हाउस के बाहर एक बेहद दिलचस्प वाकया नजर आया. विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) की अमृतसर शाखा के सदस्य राकेश खन्ना (Rakesh Khanna) गेस्ट हाउस के गेट पर मौजूद गार्डों से अंदर जाने देने की गुजारिश कर रहे थे, क्योंकि अंदर उसका दोस्त सोफी नजरबंद था. ऐजाज अहमद सोफी (Aijaz Ahmed Sofi) हंदवाड़ा मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इस वक्त गेस्ट हाउस में नजरबंद हैं.

29 सालों से है सोफी-खन्ना की दोस्ती
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जे को खत्म करने और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन के फैसले के बाद से सैकड़ों लोगों को यहां हिरासत में लिया गया, जिनमें अलगाववादी, मुख्यधारा के राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रेड एसोसिएशन के नेता के साथ कई अन्य लोग भी शामिल हैं. इसी क्रम में मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक पूर्व विधायक के बेटे सोफी को सुरक्षाबलों ने 9 अगस्त को हिरासत में ले लिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने दोस्त की एक झलक के इंतजार में गेस्ट हाउस की गेट पर खड़े अमृतसर मार्केट एसोसिएशन के एक पूर्व अध्यक्ष खन्ना ने बताया कि सोफी से उनकी पिछले 29 सालों से दोस्ती है और वो उनके लिए परिवार के सदस्य की तरह है. खन्ना उन लोगों में से रहे हैं जो कभी अनुच्छेद 370 को रद्द करने की मांग में सबसे ज्यादा मुखर थे.

खन्ना ने भाजपा के लिए किया था प्रचार
खन्ना का अपने पिता के समय से कश्मीर में कारोबारी लिंक रहा है. वह मुख्य रूप से किराना और कपड़ा व्यापारी हैं. अपना मोबाइल फोन निकालकर खन्ना ने आरएसएस की शाखा वाली अपनी एक तस्वीर दिखाई. खन्ना ने लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के लिए प्रचार भी किया था. एक साल पहले अमृतसर में हुए कपड़ा मेला के दौरान उन्होंने एक पाकिस्तानी स्टाल पर तोड़-फोड़ भी की थी. उन्होंने बताया, 'सब कुछ ठीक चल रहा था. मैं अपने कारोबार की वजह से एक महीने के लिए श्रीनगर में एक किराए के घर में रहता हूं. हालात शांतिपूर्ण हो गए थे. पर्यटकों का आना शुरू हो गया था. अब सारा काम फ़िर से खराब हो गया.'

'निर्दोष लोगों को जेल में क्यों डाला?'
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खन्ना के मुताबिक वो हमेशा आर्टिकल 370 को रद्द करने के पक्षधर रहे थे. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, 'लेकिन यह तरीका ठीक नहीं था. सरकार को कुछ महत्वपूर्ण लोगों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए थी. मुख्यधारा के राजनेताओं के अलावा दूसरे नेता भी हैं. अब उन्होंने सभी को गिरफ्तार कर लिया है. देश को मजबूत जरूर बनाओ, मैं इसके खिलाफ नहीं हूं. पर इंसानियत से काम लेना चाहिए. निर्दोष लोगों को जेल में क्यों डाला? ये नाजायज है. फिर फोन का कनेक्शन भी काट दिया. देखिए कि सभी बाजार कैसे बंद हैं. लोग पीड़ित हैं. अमरनाथ यत्रियों को भी वापस भेज दिया.'

सोफी की पत्नी रुकैया ने खन्ना से मांगी थी मदद
खन्ना बताते हैं, 'सोफी की पत्नी रुकैया ने मदद का संदेश भेजा था. यही वजह है कि मैं किसी तरह एक निजी कार में लिफ्ट लेकर श्रीनगर से यहां आया. रुकैया और उनके बच्चे कई दिनों से सोफी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है.

सोफी एक संपन्न परिवार से है. बेटा दिल्ली में IAS की तैयारी कर रहा है. दो बेटियां श्रीनगर में पढ़ती हैं, जहां वे खन्ना के घर पर रहती हैं. रुकैया ने कहा कि पुलिस 4 अगस्त की आधी रात को उनके पति की तलाश में आई थी, और जब उन्होंने कहा कि वो श्रीनगर में हैं, तो उनपर यकीन नहीं किया और घर के सभी कमरों की तलाशी ली.

रुकैया ने बताया कि सोफी के लौटने पर तो पुलिस वाले एक बार फिर आए. वो एसपी के पास खुद गए और समर्पण कर दिया. रुकैया के मुताबिक पुलिस स्टेशन जाते समय सोफी ने उनसे कहा, 'उन्होंने मुझसे कहा, मेरे पास बंदूक नहीं है, मैं भूमिगत नहीं हूं, घर पर छापा मारने का ये ड्रामा फिर क्यों? मैं पुलिस स्टेशन जा रहा हूं, और मैं उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कहूंगा"

सीआरपीएफ कैंप में बदला गया गेस्ट हाउस
सोफी जिस गेस्ट हाउस के भितर हिरासत में हैं, उसे सीआरपीएफ कैंप में बदल दिया गया है. गेस्ट हाउस के गेट पर भारी संख्या में गार्ड्स की तैनाती की गई है. खन्ना, ट्राउजर और शर्ट पहने हुए और गोल्डन रंग का चश्मा पहने, बाहर खड़े थे. खन्ना हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने की उम्मीद वाले कश्मीरियों लोगों की छोटी सी भीड़ के बीच वहां मौजूद थे.

खन्ना गार्ड से अनुरोध कर रहे थे, 'वो मेरा दोस्त है, वो मेरे भाई की तरह है, वो एक सामाजिक कार्यकर्ता है, उसकी पत्नी बीमार है, उसके बच्चे रो रहे हैं. आप एक मासूम के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उसका क्या दोष है? आपने उसे गिरफ्तार क्यों किया है? उन्होंने अपने जीवन में किसी को चोट नहीं पहुंचाई.'

खन्ना ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'सोफी की एकमात्र गलती ये थी कि उन्होंने कुछ साल पहले श्रीनगर में एक धरने में हिस्सा लिया था. इनके पास सोफी का नारा लगाते हुए एक वीडियो क्लिप है. अब अगर कोई एक-दो नारे लगाता है तो क्या बड़ी बात है? किसने ऐसा नहीं किया है?'

खन्ना ने सोफी को उसकी मां, पत्नी और बच्चों के बारे में बताया
गार्ड ने खन्ना को विनम्रता से कहा कि उनके पास किसी को भी अंदर जाने देने का अधिकार नहीं है, और उन्हें हंदवाड़ा पुलिस स्टेशन के एसएचओ से लिखित पत्र की जरूरत है, लेकिन वे सोफी को गेट तक लाने के लिए सहमत हो गए. वो लम्बे गेट के पीछे खड़ा था. केवल उसका चेहरा दिखा रहा था. खन्ना ने उसे उसकी मां, पत्नी और बच्चों के बारे में खबर दी. दो दोस्त उत्साह के साथ मिल रहे थे, एक वीएचपी का सदस्य, और दूसरा कश्मीरी मुस्लिम. एक-दूसरे के बंद लोहे के गेट के सामने खड़े थे दोनों. सोफी भावुक था. खन्ना ने सोफी को आश्वासन दिया कि उसकी पत्नी और बच्चों को भी उससे मिलवाने की पूरी कोशिश करेगा. फिर वो पुलिस स्टेशन से बाहर निकल गया.

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First published: August 25, 2019, 10:20 AM IST
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