लाइव टीवी

इन सरकारी अस्पतालों में भी पिछले एक महीने में 219 नवजातों की मौत

जनक दवे | News18Hindi
Updated: January 5, 2020, 12:47 PM IST
इन सरकारी अस्पतालों में भी पिछले एक महीने में 219 नवजातों की मौत
बच्चों के माता-पिता मौत के लिए अस्पताल प्रसाशन की बड़ी लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं

बच्चों की मौत पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर गुणवंत राठौर का कहना है, 'यहां सुविधाओं की कमी नहीं है, निजी अस्पतालों और बाकी सरकारी अस्पतालों से बच्चा क्रिटिकल कंडीशन में सरकारी अस्पताल भेजा जाता है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2020, 12:47 PM IST
  • Share this:
अहमदाबाद. देश में सर्दी का सितम बढ़ने के साथ सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा एक बार फिर उजागर हो गई है. राजस्थान के कोटा में दिसंबर से लेकर अब तक 110 बच्चों की मौत के बाद बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में 162 बच्चों की मौत (Infant deaths) की बात आई. वहीं राजस्थान के बाद अब गुजरात (Gujarat) के सरकारी हॉस्पिटल में बच्चों की मौत की खबर है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले महीने यानी दिसंबर में 85 बच्चों की मौत हो गई, जबकि राजकोट में एक महीने में 134 बच्चों ने दम तोड़ दिया. यानी पिछले महीने इन दोनों अस्पतालों में 219 नवजात बच्चों की मौत हो गई.

मौत के आंकड़ें
गुजरात में दिसंबर 2019 में 85 बच्चों की मौत हुई. वहीं नवंबर में 74, जबकि अक्टूबर में 94 बच्चों ने दम तोड़ा. इतना ही नहीं राजकोट के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में एक साल में 1235 बच्चों की मौत हो गई.

हॉस्पिटल की सफाई



बच्चों की मौत पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर गुणवंत राठौर का कहना है, 'हर महीने 400 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में दाखिल होते हैं, उस हिसाब से मृत्युदर 20 फीसदी जितना ही है. यहां सुविधाओं की कमी नहीं है, निजी अस्पतालों और बाकी सरकारी अस्पतालों से बच्चा क्रिटिकल कंडीशन में सरकारी अस्पताल भेजा जाता है. ऐसे में बच्चों की मौत पर आंकड़ा केवल सरकारी अस्पतालों में देखने को मिलता है. हर महीने 400 बच्चे अस्पताल में दाखिल होते है, जिसमें से 80 फीसदी बच्चे स्वस्थ होकर जाते हैं'.



लापरवाही का आरोप
वहीं दूसरी ओर बच्चों के माता-पिता मौत के लिए अस्पताल प्रसाशन की बड़ी लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. ऐसे ही एक बच्चे के पिता इमरान चावड़ा ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे का हॉस्पिटल में गलत एक्सरे किया गया. उन्होंने कहा, 'मेरे बच्चे को न्यूमोनिया हुआ था. डॉक्टर्स ने बच्चे की छाती का एक्सरे लेने को कहा तो हमलोग तकनीकी स्टाफ के पास गए और एक्सरे निकाला गया. जब मैं एक्सरे के साथ डॉक्टर्स के पास गया तो पता चला कि एक्सरे छाती का नहीं बल्कि पेट का निकाला गया था.'

कुपोषण के शिकार बच्चे
बता दें कि राज्य सरकार ने खुद विधानसभा में स्वीकार किया था कि 2019 तक गुजरात में कुपोषण से 1,41,142 बच्चे पीड़ित हैं. आदिवासी इलाकों में कुपोषण की हालत और भी खराब है. दाहोद और नर्मदा कुपोषण से सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले हैं. दाहोद में कुपोषित बच्चों की संख्या 14,191 है. जबकि नर्मदा जिले में 12,673 बच्चे कुपोषित हैं.

ये भी पढ़ें: उद्धव सरकार में विभागों का बंटवारा, अजित को वित्त, अनिल देशमुख को गृह मंत्रालय

दिग्विजय सिंह ने कहा- भगवान राम सबके हैं, धर्माचार्य करें मंदिर का निर्माण

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Ahmedabad से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 5, 2020, 11:47 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading