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PM Modi in Bangladesh: पीएम मोदी के ओराकंडी दौरे से पश्चिम बंगाल के मतुआ हार्टलैंड में बढ़ीं BJP की उम्मीदें

पीएम मोदी बांग्लादेश दौरे पर पहुंचे हैं. (तस्वीर-narendramodi twitter)

पीएम मोदी बांग्लादेश दौरे पर पहुंचे हैं. (तस्वीर-narendramodi twitter)

West Bengal Election: बांग्लादेश (Bangladesh) स्थित मंदिर में पीएम के पहुंचने पर भी ठाकुरनगर के लोगों में खासा उत्साह है. मतुआ हिंदू दलित समुदाय है. ये शरणार्थी हैं, जो विभाजन के बाद बांग्लादेश से आकर यहां बस गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2021, 11:39 AM IST
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(अमन शर्मा)
कोलकाता.
अपने बांग्लादेश दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ओराकंडी (Orakandi) स्थित मतुआ समुदाय (Matua Community) के मंदिर पहुंच रहे हैं. इस बात से पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय खासा खुश है. बंगाल के नॉर्थ 24 परगना स्थित ठाकुरनगर के मंदिर जा रहे परिवार ने कहा, 'हम जल्द नागरिकता चाहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बांग्लादेश के ओराकंडी में हमारे पवित्र मंदिर जाना भी भावनात्मक इशारा है.' खास बात है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी के घोषणापत्र में पहली कैबिनेट मीटिंग में ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने की बात कही है.

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ठाकुरनगर पहुंचे पीएम मोदी की यात्रा मतुआ समुदाय को अब तक याद है. इस दौरान पीएम ने कुलमाता बारो मां से भी मुलाकात की थी. उस चुनाव में बीजेपी के खाते में 42 में से 19 सीटें आई थीं. इसी क्रम में बीजेपी ने पहली बार बनगांव सीट जीती थी. अब बांग्लादेश स्थित मंदिर में पीएम के पहुंचने पर भी ठाकुरनगर के लोगों में खासा उत्साह है. मतुआ हिंदू दलित समुदाय है. ये शरणार्थी हैं, जो विभाजन के बाद बांग्लादेश से आकर यहां बस गए थे.

बनगांव से बीजेपी सांसद शांतनु ठाकुर कहते हैं, 'ममता बनर्जी ने मतुआ समुदाय के लिए क्या किया है? उनके नेताओं में से एक कहते हैं कि 30 फीसदी मुसलमान 4 पाकिस्तान बना सकते हैं.' उनके भाई सुब्रत ठाकुर को बीजेपी ने स्थानीय गायघाट सीट से टिकट दिया है. खास बात है कि इस सीट पर भी मुकाबला कठिन है. यहां टीएमसी 2001 से लगातार जीत दर्ज कर रही है. सुब्रत मानते हैं कि पीएम मोदी का ओराकंडी पहुंचना चुनाव पर 'सकारात्मक प्रभाव' डालेगा.
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उन्होंने बताया '2019 में जब मेरे भाई ने बनगांव लोकसभा सीट जीती थी, तो हमें गायघाट विधानसभा क्षेत्र से 37 हजार वोट की बढ़त मिली थी. मुझे यहां से जीत का भरोसा है.' न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने कहा 'राज्य की 78 सीटों पर मतुआ का बोलबाला है, जहां उनकी 40 से 50 प्रतिशत आबादी है.' सुब्रत ने बताया 'राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने में यह समर्थन बड़ी भूमिका निभाएगा.' उन्होंने कहा कि बीजेपी के घोषणापत्र में सीएए को लेकर सभी शंकाएं दूर किए जाने के बाद मुताआ बीजेपी के साथ आ गए हैं.

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सुब्रत ने बताया '74 साल हो गए हैं और किसी सरकार ने हमें नागरिकता दिलाने में मदद नहीं की.... मतुआओं को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया गया. हमारे समुदायों को पैरों तले जमीन चाहिए.' इसके अलावा उन्होंने सीएम बनर्जी की भी जमकर आलोचना की. सुब्रत ने कहा 'उन्हें लगता है कि बाकी सभी बेवकूफ हैं और दुनिया में बस एक वे ही समझदार हैं.' बीजेपी ने सीएए के अलावा भी मतुआ समुदाय से कई वादे किए हैं. इनमें शरणार्थियों के वेलफेयर के लिए 100 करोड़ रुपए, आधार, राशन और वोटर कार्ड के लिए सिंग्ल विंडो जैसी सुविधाएं देने का वादा किया है. स्थानीय लोगों से चर्चा में न्यूज18 ने पाया कि लोगों के बीच 3 हजार रुपए की मासिक पेंशन की बात वोटर्स को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है.

कभी किया था टीएमसी का समर्थन
2011 बनर्जी ने राज्य में मतुआ समुदाय के समर्थन से ही सत्ता हासिल की थी. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में समुदाय बीजेपी की ओर चला गया. टीएमसी मतुआ को चेतावनी दे रही है कि एनआरसी उनके समुदाय को नुकसान पहुंचाएगा. वहीं, बीजेपी को उम्मीद है कि शनिवार को ओराकंडी दौरे के विजुअल्स मतुआ समुदाय की सभी शंकाओं को दूर कर देंगे.
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