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ओडिशा में बर्बादी की दास्तां! नक्शे से गायब हो रहे 7 गांव, यहां मंदिर तक में नहीं बचे देवता

ओडिशा में तटीय कटाव के चलते अब ये सात गांव राज्य के नक्शे से लगभग मिट चुके हैं. (प्रतीकात्मक)

ओडिशा में तटीय कटाव के चलते अब ये सात गांव राज्य के नक्शे से लगभग मिट चुके हैं. (प्रतीकात्मक)

चेन्नई में नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च (National Centre for Coastal Research) की स्टडी बताती है कि ओडिशा (Odisha) ने 1990 और 2016 के बीच 550 किमी की तटीय रेखा खो दी है. अकेले केंद्रपड़ा ने ही 31 किलोमीटर गंवाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 6, 2021, 10:52 AM IST
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केंद्रपड़ा. यह कहानी है ओडिशा के सतभाया (Satabhaya) की. कभी 700 परिवारों का आशियाना अपने अंदर समेटने वाले 7 गांवों का यह सूमह अब वीरान है. अब यहां जहां तक नजर जाती है, वहां रेत के मैदान, पेड़, मवेशी ही नजर आते हैं. तट के पास की जमीन अतीत की कुछ यादें समेटे हुए है. यहां जमीन में आधा धंसा हुआ एक हैंडपंप है. एक मंदिर है, जहां देवता नहीं हैं. आलम यह है कि तटीय कटाव के चलते अब ये सात गांव राज्य के नक्शे से लगभग मिट चुके हैं. हालांकि, राज्य सरकार ने इनके सुधार में कदम तो उठाए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि कभी जो मंदिर वीकेंड्स पर परिवारों के पहुंचने का स्थान होता था, अब वहां केवल प्रफुल्ल लेंका जाते हैं. लेंका का 6 सदस्यीय परिवार उन 571 परिवारों में शामिल है, जिसे जिला प्रशासन ने बागपटिया की कॉलोनी में पहुंचाया था. लेकिन 40 वर्षीय लेंका बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद अपनी 20 भैंसों की देखभाल के लिए यहीं रुक गए. फिलहाल 148 में से 118 परिवारों के पुनरुत्थान के आदेश जारी किए जा चुके हैं. वहीं अधिकारी बताते हैं कि 30 परिवारों का पेपरवर्क अभी बाकी है.

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लाभार्थियों में से एक बाबू मलिक बताते हैं, 'जमीन के एक प्लॉट के लिए हमने बिल्कुल बहुत इंतजार किया, लेकिन हमारी जीविका और हमारे घर को समुद्र ने छीन लिया. बीते 4 सालों में यह चौथी बार है, जब हम अपना घर बदल रहे हैं.' एडीशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बसंत कुमार रौउत कहते हैं, 'प्रशासन बीजू पक्का घर योजना के तहत हर परिवार को 10 डेसिमिल जमीन और प्रत्येक को 1.5 लाख रुपए मकान निर्माण के लिए देगा.' 2018 में पुनर्वास की पहली लहर के बाद, जो बच गए थे, वे सतभाया के बाहर दूसरे गांवों में पहुंच गए हैं. खुद को समुद्र से बचाने के लिए वे किराय पर रह रहे हैं.

समुद्र ने जमीन को भी नुकसान पहुंचाया है. कई एकड़ जमीन बंजर हो चुकी है. युवाओं ने केरल, गुजरात और तमिलनाडु पहुंचकर नौकरियां करना शुरू कर दिया है. हाल ही में चेन्नई में नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च की स्टडी बताती है कि ओडिशा ने 1990 और 2016 के बीच 550 किमी की तटीय रेखा खो दी है. अकेले केंद्रपड़ा ने ही 31 किमी गंवाई है.
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