अनुसूचित जाति-जनजाति के स्टूडेंट्स को पुराने पैटर्न पर मिले स्कॉलरशिप, राज्यसभा में उठी मांग

अनुसूचित जाति-जनजाति के स्टूडेंट्स को पुराने पैटर्न पर मिले स्कॉलरशिप, राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा में SC/ST रिजर्वेशन का पुराना पैटर्न बहाल करने की उठी मांग (न्यूज 18 क्रिएटिव)

पहले स्कॉलरशिप में 90 फीसदी राशि केंद्र और 10 फीसदी राशि राज्य सरकारें देती थीं. अब यह अनुपात 60:40 का हो चुका है.

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अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति ( स्कॉलरशिप) का पुराना पैटर्न बहाल किए जाने की मांग करते हुए कांग्रेस के एक सदस्य ने राज्यसभा में कहा कि नए पैटर्न की वजह से पहले से ही आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे राज्यों को दिक्कत हो रही है.

शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के शमशेर सिंह दुल्लों ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का पुराना पैटर्न 90:10 प्रतिशत का था. इसमें से 90 फीसदी राशि केंद्र द्वारा और 10 फीसदी राशि राज्य सरकारों द्वारा दी जाती थी. राज्य सरकारों के लिए 10 फीसदी की राशि ही देना मुश्किल हो जाता था.

राज्यों के ऊपर ज्यादा दबाव पड़ने का उठाया मुद्दा
शमशेर सिंह दुल्लों ने कहा कि अब नया पैटर्न 60:40 प्रतिशत के अनुपात का है. इसमें 40 प्रतिशत राशि अब राज्यों की ओर से दी जानी है. पहले से ही आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे राज्यों के लिए 10 प्रतिशत राशि देना ही मुश्किल हो रहा था तो वह 40 फीसदी राशि कैसे दे पाएंगे.
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस संबंध में सरकार को एक पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार सबका साथ सबका विकास की बात करती है. उसे ध्यान देना चाहिए कि विकास के लिए शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाना जरूरी है और इसके लिए सबको साथ लेकर भी चलना होगा.’’



दुल्लों ने छात्रवृत्ति का पुराना पैटर्न बहाल किए जाने की मांग करते हुए कहा कि इससे SC/ST विद्यार्थियों के साथ साथ राज्यों को भी माली मदद मिलेगी. विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया.

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठा
भाजपा के विजयपाल सिंह तोमर ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य की देखरेख संबंधी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए तोमर ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 जिले आते हैं और वहां जनसंख्या का घनत्व अधिक है. वहां के लोगों को स्वास्थ्य की देखभाल संबंधी पर्याप्त सुविधाएं न होने की वजह से समीपवर्ती एम्स में जाना पड़ता है जहां तीन से चार पांच महीने के बाद की तारीख मिलती है.

तोमर ने कहा कि हरियाणा के झज्जर की तरह ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी एम्स का एक ‘‘एक्सटेंशन’’ खोला जाना चाहिए ताकि वहां के लोगों को समय पर, स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें और उन्हें दूर न जाना पड़े.

तो आठवां अजूबा घोषित करने की भी उठी मांग
अन्नाद्रमुक सदस्य ए विजय कुमार ने कन्याकुमारी त्रिवेणी संगम को आठवां अजूबा घोषित करने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि कन्याकुमारी के मनोहारी समुद्र तट, वहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के अप्रतिम नजारे को देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक वहां आते हैं.

तलाक में ज्यादा समय लगने का मुद्दा भी उठा
भाजपा के सीपी ठाकुर ने तलाक की कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लगने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि निचली अदालत में और फिर उच्च न्यायालय में सुनवाई होते तथा फैसला आते आते इतना अधिक समय लग जाता है कि तलाक का आवेदन देने वाली महिला दूसरे विवाह की उम्र गंवा चुकी होती है.

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