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SCO-CSTO बैठक: बिना बातचीत अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन, सोच-समझकर फैसला ले वैश्विक समुदाय- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने साफ कहा- अफगानिस्तान (Afghanistan) में हाल के घटनाक्रम का सबसे अधिक प्रभाव हम जैसे पड़ोसी देशों पर होगा. इसलिए, इस मुद्दे पर क्षेत्रीय फोकस और क्षेत्रीय सहयोग बहुत ही आवश्यक है.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शंघाई कॉरपोरेशन (SCO) और CSTO के बीच विशेष बैठक में अफगानिस्तान से संबंधित हर मुद्दे (Afghanistan Issues) पर बातचीत की. पीएम ने साफ कहा- अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम का सबसे अधिक प्रभाव हम जैसे पड़ोसी देशों पर होगा. इसलिए, इस मुद्दे पर क्षेत्रीय फोकस और क्षेत्रीय सहयोग बहुत ही आवश्यक है. पीएम ने कहा कि अफगानिस्तान में बिना बातचीत के सत्ता परिवर्तन हुआ है और दुनिया को इस नई व्यवस्था को मान्यता देने में सोच-समझकर फैसला करना चाहिए.

पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि अफगान और भारतीय लोगों के बीच सदियों से एक विशेष संबंध रहा है. अफगान समाज की सहायता के लिए हर क्षेत्रीय या वैश्विक पहल को भारत का पूर्ण सहयोग रहेगा. हम सभी को मिल कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान तक मानवीय सहायता निर्बाध तरीके से पहुंच सके. पीएम मोदी ने अफगानिस्तान को लेकर चार विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है.

अफगानिस्तान में सत्ता-परिवर्तन समावेशी नहीं है
पहला मुद्दा, अफगानिस्तान में सत्ता-परिवर्तन समावेशी नहीं है, और बिना बातचीत के हुआ है. इससे नई व्यवस्था की स्वीकार्यता पर सवाल उठते हैं. महिलाओं और अल्पसंख्यकों सहित अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण है. और इसलिए, यह आवश्यक है कि नई व्यवस्था की मान्यता पर फैसला वैश्विक समुदाय सोच-समझ कर और सामूहिक तरह से ले. इस मुद्दे पर भारत संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है.

पूरे विश्व में आतंकवादी और अतिवादी विचारधाराओं को बढ़ावा मिलेगा
दूसरा मुद्दा, अगर अफगानिस्तान में अस्थिरता और कट्टरवाद बना रहेगा, तो इससे पूरे विश्व में आतंकवादी और अतिवादी विचारधाराओं को बढ़ावा मिलेगा. अन्य उग्रवादी समूहों को हिंसा के माध्यम से सत्ता पाने का प्रोत्साहन भी मिल सकता है. हम सभी देश पहले भी आतंकवाद से पीड़ित रहे हैं. और इसलिए हमें मिल कर सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान की धरती का उपयोग किसी भी देश में आतंकवाद फैलाने के लिए न हो.

SCO के सदस्य देशों को इस विषय पर सख्त और साझा नियम विकसित करने चाहिए. आगे चल कर ये नियम वैश्विक आतंकरोधी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं. ये नियम आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए. इनमें सीमापार आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए. और इन्हें लागू करने की प्रणाली भी होनी चाहिए.

ड्रग्स, अवैध हथियारों और मानव तस्करी का अनियंत्रित प्रवाह बढ़ सकता है
तीसरा मुद्दा, ड्रग्स, अवैध हथियारों और मानव तस्करी का अनियंत्रित प्रवाह बढ़ सकता है. बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार अफगानिस्तान में रह गए हैं. इनके कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बना रहेगा. इन कमियों को मॉनीटर करने और सूचना का आदान प्रदान बढ़ाने के लिए SCO का RATS mechanism सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. इस महीने से भारत इस संस्था की काउंसिल की अध्यक्षता कर रहा है. इस विषय पर हम ने व्यावहारिक सहयोग के प्रस्ताव डेवलप किये हैं.

अफगानिस्तान में गंभीर मानवीय त्रासदी
चौथा मुद्दा, अफगानिस्तान में गंभीर मानवीय त्रासदी है. वित्तीय और व्यापार फ्लो में रुकावट के कारण अफगान जनता की आर्थिक विवशता बढ़ती जा रही है. साथ में COVID की चुनौती भी उनके लिए यातना का कारण है. विकास और मानवीय सहायता के लिए भारत बहुत वर्षों से अफगानिस्तान का विश्वस्त सहयोगी रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से ले कर शिक्षा, सेहत और कैपेसिटी बिल्डिंग तक हर क्षेत्र में, और अफगानिस्तान के हर भाग में, हमने अपना योगदान दिया है. आज भी हम अपने अफगान मित्रों तक खाद्य सामग्री, दवाइयां आदि पहुंचाने के लिए इच्छुक हैं.

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