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प्रदर्शनों के दौर में BJP सांसद ने छोड़ा यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश करने का इरादा

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Updated: February 8, 2020, 10:29 PM IST
प्रदर्शनों के दौर में BJP सांसद ने छोड़ा यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश करने का इरादा
बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा को राज्यसभा में UCC बिल पेश करना था (फाइल फोटो)

प्राइवेट मेंबर बिल (Private Member Bill) सरकारी बिल से अलग होता है. यह बिल एक ऐसे सांसद (MP) द्वारा पेश किया जाता है, जो मंत्री (Minister) नहीं होता.

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  • Last Updated: February 8, 2020, 10:29 PM IST
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नई दिल्ली. सरकार इस समय देश भर में नए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) में हुए बदलावों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को शांत करने में जुटी हुई है. ऐसे में बीजेपी सांसद (BJP MP) को एक प्राइवेट मेंबर बिल (Private Member Bill) के तौर पर समान नागरिक संहिता बिल (UCC) को पेश करना था लेकिन आखिरी मौके पर वे संसद से नदारद थे. यह एक ऐसा मुद्दा है जो पार्टी के एजेंडे में बहुत ऊपर रहा है. लेकिन यह डर था कि इसे अभी पेश किया जाना सिर्फ वर्तमान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को हवा देने का काम करेगा.

एक प्राइवेट मेंबर बिल, सरकारी बिल (Government Bill) से अलग होता है. यह बिल एक ऐसे सांसद द्वारा पेश किया जाता है, जो मंत्री नहीं होता. कोई सांसद, प्राइवेट मेंबर बिल (Private Member Bill) को सरकार का ध्यान उस मुद्दे पर खींचने के लिए पेश कर सकता है, जिसे वह कानून बनवाने के लिए जरूरी मानता है.

बिल पेश करने के लिए जब पुकारा गया नाम तो सदन से नदारद मिले बीजेपी सांसद
समान नागरिक संहिता पर पेश किया जाने वाला विधेयक सदन के एजेंडे में था और इसे सभी सदस्यों में बांट दिया गया था. हालांकि, जब बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा (BJP MP Kirodi Lal Meena) का नाम बिल को पेश करने के लिए पुकारा गया तो वे राज्यसभा में मौजूद ही नहीं थे. पता चला कि वे सदन से नदारद हैं.

लेकिन मीणा ज्यादा देर तक सदन से बाहर नहीं रहे. वे कुछ ही देर में सदन में वापस आ गए और एक दूसरे बिल को पेश किया. दूसरा बिल बिल्कुल अलग था और इसमें राजस्थान के लिए खास वित्तीय सहायता (Special Financial Assistance for Rajasthan) की मांग की गई थी.

मीणा के पहले बिल में समान नागरिक संहिता के लिए कमेटी के निर्माण की मांग की गई थी
हालांकि दूसरे बिल के साथ भी उनका नाम लिया गया था लेकिन न ही मीणा ने लिस्ट किए गए पहले बिल- द यूनिफॉर्म सिविल कोड इन इंडिया बिल, 2020 (The Uniform Civil Code in India Bill, 2020) को पेश करने की इजाजत मांगी. न ही सभापति ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी.मीणा का पहला बिल समान नागरिक संहिता का संविधान बनाने और इसे पूरे भारत में लागू किए जाने और इससे जुड़े मामलों को निपटाने के लिए के लिए राष्ट्रीय निगरानी एवं जांच समिति (National Inspection and Investigation Committee) के निर्माण की मांग करने वाला था. पार्टी की शुरुआत से ही समान नागरिक संहिता, बीजेपी के घोषणा-पत्र (BJP's Manifesto) का हिस्सा रही है.

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First published: February 8, 2020, 10:29 PM IST
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