पीरियड्स में भी 10 घंटे काम कर सकें महिलाएं इसलिए दी जा रही अवैध दवाइयां

महिलाओं ने बताया कि इन दवाओं को खाने के बाद उनका दर्द तो कम हो गया लेकिन उन्हें दूसरी समस्याएं होनी लगीं.

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Updated: June 19, 2019, 7:30 AM IST
पीरियड्स में भी 10 घंटे काम कर सकें महिलाएं इसलिए दी जा रही अवैध दवाइयां
तमिलनाडु में पीरियड्स के दौरान काम करने के लिए महिलाओं को दी जा रही हैं अवैध दवाएं (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: June 19, 2019, 7:30 AM IST
तमिलनाडु से एक परेशान करने वाली ख़बर सामने आई है. यहां कई टेक्सटाइल कारखानों में महिला  कर्मचारियों को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए अवैध दवाइयां दी जा रही हैं. थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने तमिलनाडु में 100 महिलाओं के साथ की गई बातचीत के आधार पर यह खुलासा किया है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कारखानों  में काम करने वाली लगभग हर महिला को बिना लाइसेंस के इस तरह अवैध ड्रग्स दिए जा रहे हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ये महिलाएं पीरियड्स के दौरान छुट्टी न लें और उनका उत्पादन प्रभावित न हो. हैरानी की बात यह है कि ये दवाएं तमाम महिला कर्मचारियों को बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के धड़ल्ले से दी जा रही है.

रिपोर्ट में एक महिला का जिक्र किया गया है. जिसे रोजाना लगभग 10 घंटे काम करना होता है. उसने बताया कि वह नहीं चाहती की पीरियड के दर्द का असर उसके काम पर पड़े और उसकी मजदूरी में कटौती हो. इसलिए एक दिन उसने अपने फैक्ट्री सुपरवाइटर से दर्द कम करने की दवा मांगी तो उसने महिला को एक दवा दे दी. महिला ने बताया कि वह दवा का नाम तो नहीं बता सकती लेकिन वह उसके रंग से उसे पहचान सकती है. महिला ने बताया कि इसे खाने के बाद महिला का दर्द तो कम हो गया लेकिन उसे दूसरी समस्याएं होनी लगीं.

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन सभी महिलाओं को पीरियड पेन के लिए बिना लाइसेंस वाली दवाएं दी जा रही थीं. कई महिलाओं का कहना है कि इन दवाओं का वे नाम नहीं जानती लेकिन रंग से वे उन्हें पहचान सकती हैं और इन दवाओं को खाने के बाद उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हुई हैं. जो महिलाएं इन दवाओं का लगातार सेवन करती आ रही हैं, उन्होंने इसकी शिकायत की है. इन महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कभी इन दवाओं की एक्सपायरी डेट भी नहीं देखी है.

रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं के लिए कभी डॉक्टरों की सलाह नहीं ली जाती है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने भी माना है कि वह इन श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करेगा. महिलाओं ने बताया कि इन दवाओं के बारे में कभी कंपनी ने उन्हें जानकारी नहीं दी थी.

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 40,000 कपड़ा कारखाने है. यहां लगभग 300,000 से अधिक महिला श्रमिकों काम करती हैं. इन कारखानों में मुख्य रूप से गरीब, अनपढ़ और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की युवा और गांव की महिलाएं काम करने आती हैं.

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