तमिलनाडु का यह चुनाव तय करेगा जयललिता और करुणानिधि का 'असली वारिस'

तमिलनाडु का यह चुनाव तय करेगा जयललिता और करुणानिधि का 'असली वारिस'
जे. जयललिता और एम. करुणानिधि

दक्षिणी राज्य जिसने पिछले तीन दशकों में ज्यादातर पर्सनैलिटी पॉलिटिक्स देखी है, अब एक विकल्प की तलाश में है. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के लिए यह लोकसभा चुनाव विरासत की लड़ाई भी है.

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  • Last Updated: April 14, 2019, 10:19 AM IST
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(पूर्णिमा मुरली)

लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को तमिलनाडु के 39 सीटों पर मतदान होने हैं. राज्य की राजनीति में ये मतदान कई मामलों में बेहद अहम है. द्रविड़ राजनीति में दो मुख्य नेता पूर्व सीएम जे. जयललिता और एम. करुणानिधि के निधन के बाद राज्य में पहला चुनाव हो रहा है.

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तमिलनाडु की तिरुवल्लूर, चेन्नई नॉर्थ, चेन्नई साउथ, चेन्नई सेंट्रल, श्रीपेरंबदुर, कांचीपुरम, अराकोनम, वेल्लोर, कृष्णागिरी, धर्मपुरी, तिरुवन्नामलाई, अरानी, विलुपुरम, कल्लाकुरिची, सलेम, नमक्कल, इरोड, तिरुप्पुर, नीलगिरी, कोयम्बटूर, पोलाची, डिंडीगुल, करुर, तिरुचिरापल्ली, पेरांबलूर, कुडालोर, चिदंबरम, मायिलादुथराई, नागापट्टिनम, थंजावुर, शिवगंगा, मदुरई, थेनी, विरुधुनगर, रमनाथापुरम, थूथूकुडी, टेनकासी, तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी में 18 अप्रैल को वोटिंग है.



दक्षिणी राज्य जिसने पिछले तीन दशकों में ज्यादातर पर्सनैलिटी पॉलिटिक्स देखी है, अब एक विकल्प की तलाश में है. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के लिए ये मतदान विरासत की लड़ाई भी है.

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18 अप्रैल के मतदान से ये भी साफ हो जाएगा कि जयललिता के निधन के बाद AIADMK में उनका असली उत्तराधिकारी कौन है? ई. पलानीस्वामी (EPS), ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) या फिर टीटीवी दिनाकरन. दिनाकरन जयललिता की सहयोगी शशिकला के भतीजे हैं. फिलहाल वह जयललिता की प्रतिष्ठित सीट आरके नगर से निर्दलीय विधायक हैं.

जयललिता के जाने के बाद उनके पसंदीदा सिपाही ओ पन्नीरसेल्वम थोड़े दिनों के लिए मुख्यमंत्री बनना. फिर पार्टी में बगावत. जयललिता की करीबी शशिकला का पार्टी प्रेसिडेंट बनना और अघोषित संपत्ति के मामले में जेल जाना. इसके बाद शशिकला की पसंद के तौर पर एडप्पन पलानीस्वामी (EPS) का मुख्यमंत्री बनना. उसके बाद शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन का नेता के रूप में उभरना. ये ऐसे कारक हैं, जिन्हें तमिल मतदाओं वोटिंग करते समय ध्यान में रखेंगे.


इसके अलावा, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के लिए भी ये चुनाव एक लिटमस टेस्ट है. इस चुनाव से ये भी तय होगा कि मतदाता करुणानिधि का असली वारिस किसे मानते हैं, एमके स्टालिन को या एमके अलागिरी को.

DMK चीफ एमके स्टालिन अपना उत्तराधिकार साबित करने के लिए राज्यभर में ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं. राज्य में बेशक एआईएडीएमके की सरकार है, लेकिन हाल के दिनों में एआईएडीएमके का संगठन कितना कमजोर हुआ है, स्टालिन इससे अच्छी तरह से वाकिफ हैं. ऐसे में वो इस हालात को जरूर भुनाना चाहेंगे.

लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया है. ऐसे में स्टालिन को लगता है कि ये उनके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि तमिल मतदाता हमेशा से राष्ट्रीय पार्टियों के राज्य की राजनीति में दखलअंदाजी को नापसंद और अस्वीकार करते आए हैं.


इस बीच, डीएमके में भी दिल्ली से कांग्रेस के कथित 'हस्तक्षेप' की खबरें हैं. ऐसे में डीएमके चीफ के तौर पर स्टालिन ये तो कतई नहीं चाहेंगे कि उनकी चाल उनपर ही उल्टी पड़ जाए. खासकर तब जब चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है और उत्तराधिकार का सवाल सामने है.

(मूल रूप से अंग्रेजी में छपे इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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