शुरुआत में महंगी हो सकती है कोवैक्सीन, फिर बाजार के आधार पर तय होगी कीमत: भारत बायोटेक

कृष्णा एल्ला ने कई सवालों के जवाब दिए हैं. (तस्वीर फ़र्स्टपोस्ट से)

कृष्णा एल्ला ने कई सवालों के जवाब दिए हैं. (तस्वीर फ़र्स्टपोस्ट से)

कृष्णा एल्ला (Krishna Ella) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना वैक्सीन से जुड़े कई सवालों को जवाब दिए हैं. गौरतलब है कि भारत-बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा संयुक्त रूप से डेवलप की गई कोवैक्सीन को भारत में सशर्त इमरजेंसी यूज की अनुमति दे दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 10:38 PM IST
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नई दिल्ली. भारत-बायोटेक (Bharat-Biotech) के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा एल्ला (Krishna Ella) ने कहा है कि शुरुआत में कोवैक्सीन (Covaxin) की कीमत महंगी रह सकती है. जैसे ही उत्पादन का स्केल बढ़ेगा, फिर कीमत बाजार के आधार पर तय होगी. कृष्णा एल्ला ने कोरोना वैक्सीन से जुड़े कई सवालों को जवाब दिए हैं. गौरतलब है कि भारत-बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा संयुक्त रूप से डेवलप की गई कोवैक्सीन को भारत में सशर्त इमरजेंसी यूज की अनुमति दे दी गई है.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारे पास 2 करोड़ डोज मौजूद हैं. हम अपने यहां 70 करोड़ वैक्सीन रखने की व्यवस्था कर रहे हैं. इसके लिए चार जगहें हैं. तीन हैदराबाद में और एक बेंगलुरु में. इसके लिए हम कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं जिनमें लॉजिस्टिक्स भी एक है.



जब उनसे पूछा गया कि क्या कोवैक्सीन कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी प्रभावकारी होगी तो उन्होंने जवाब दिया कि इसके लिए एक हफ्ते का वक्त दीजिए. मैं एक हफ्ते बाद कंफर्म डेटा दे सकता हूं.
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इमरजेंसी यूज को समझाते हुए उन्होंने कहा कि कोई प्लेसेबो नहीं दिया जाएगा. हम ओपन लेवल में लोगों का वैक्सिनेशन करेंगे और साथ-साथ सुरक्षा और प्रभावोत्पादकता मापेंगे. वैक्सीन के प्रोडक्शन को लेकर उन्होंने कहा कि हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि BSL-3 प्रोडक्शन फैसिलिटी हमारे पास है. यह अमेरिका के पास भी नहीं है. हम दुनिया के किसी भी कोने में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में मदद कर सकते हैं.

उन्होंने कहा- 'कई लोग कह रहे हैं कि मैं डेटा को लेकर ट्रांसपरेंट नहीं हूं. मुझे लगता है कि लोगों के पास पढ़ने का धैर्य होना चाहिए. उन्हें इंटरनेट पर पढ़ना चहिए कि हमने कितने आर्टिकल इस वैक्सीन पर पब्लिश किए हैं. 70 से ज्यादा आर्टिकल विभिन्न इंटरनेशनल जर्नल में पब्लिश हो चुके हैं. बहुत सारे लोग गॉसिप कर रहे हैं, ये भारतीय कंपनियों के लिए झटका है. ये हमारे लिए सही नहीं है. हम ये डिजर्व नहीं करते. Merck की इबोला वैक्सीन ने कभी ह्यूमन ट्रायल पूरा नहीं किया लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लाइबेरिया और गिनिया के लिए इमरजेंसी ऑर्थराइजेशन किया है.'
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